संजीवनी टुडे

जीएसटी ने बढ़ाई भारत की साख

डॉ मयंक जैन

संजीवनी टुडे 13-07-2018 21:28:28


जुलाई 2017 को देश भर में केंद्र सरकार ने जीएसटी को लागू किया था। इससे पहले सरकार ने नोटबंदी की थी, जिसके बाद अर्थव्यवस्था काफी नीचे चली गई थी। शुरआती झटकों के बाद जीएसटी में फिर से रफ्तार देखने को मिली। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक इस वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी 7.4 फीसदी और 2019 में 7.8 फीसदी रहने का अनुमान है। इससे साफतौर पर जाहिर होता है कि जीएसटी ने दुनियां में भारत की साख में इजाफा किया है। 

माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के क्रियान्वयन के साल भर पूरा होने पर आइरिस बिजनेस र्सिवसेज लिमिटेड ने जीएसटी बिल एवं अन्य दस्तावेजों की सत्यता जांचने वाला एप आइरिस पेरिडॉट पेश किया है। यह एप दस्तावेजों को स्कैन कर उसका जीएसटी पहचान नंबर यानी जीएसटीआईएन की सत्यता जांचता है तथा करदाता के दायर रिटर्न की स्थिति की जानकारी देता है। कंपनी ने कहा कि उपभोक्ता अपने फोन के कैमरे से ही किसी भी दस्तावेज को स्कैन कर सकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (कृत्रिम बुद्धिमता) आधारित यह एप दस्तावेज पर अंकित जीएसटीआईएन की पहचान कर करदाता के रिटर्न की विस्तृत जानकारी उपलब्ध करा देता है। यह एप छोटे कारोबारियों के लिए विशेष मददगार है। 

जीएसटी के सरलीकरण के लिए चैतरफा प्रयास किया जा रहा है ताकि इससे किसी को भी कोई तकलीफ न हो। साथ ही सरकार को वांछित राजस्व की भी प्राप्ति हो। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जीएसटी के तहत जून में राजस्व संग्रह 95,000 करोड़ रुपए को पार कर गया, जोकि वित्तवर्ष 2017-18 के औसत मासिक कर संग्रह 89,885 करोड़ रुपए से ज्यादा है।

भारत सरकार  ने इससे पहले कहा था कि बेहतर ढंग से कर अनुपालन के साथ जीएसटी अब सुचारु चरण में प्रवेश कर चुका है। इसलिए अब कर रिटर्न के नियमों को सरल बनाना सरकार की प्राथमिकता होगी। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू हुए एक साल पूरा हो गया है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इससे विकास, सरलता और पारदर्शिता आई है। पीएम मोदी ने कहा कि ळैज् से लघु और मझोले उद्योगों को लाभ हो रहा है। नरेंद्र मोदी ने कहा कि नए कर कानून से विकास, सरलता और पारदर्शिता आई है। जीएसटी विकास, सरलता और पारदर्शिता लेकर आया है। यह संगठित कारोबार और उत्पादकता को बढ़ावा देता है, कारोबार सुगमता को और गति देता है , इससे लघु और मझोले उद्योगों को लाभ हो रहा है। नई व्यवस्था ईमानदारी का उत्सव है जिसने देश में इंस्पेक्टर राज खत्म कर दिया है। जीएसटी सहकारी संघवाद का एक बेहतरीन उदाहरण है, जहां सभी राज्यों ने मिलकर देशहित में फैसला लिया और तब जाकर देश में इतना बड़ा कर सुधार लागू हो सका।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को शपथ ली थी। 26 मई 2018 को उनके 4 साल पूरे हो रहे हैं। आर्थिक मोर्चों पर सरकार ने कई बड़े फैसले लिए जिनका सीधा असर आम जनता पर पड़ा। मोदी सरकार के 2 बड़े फैसले नोटबंदी और जीएसटी का छोटी अवधि में देश की इकोनॉमी पर असर हुआ। जानकारों के मुताबिक ये दोनों ही फैसले लंबे समय में ये देश के लिए फायदेमंद है। मोदी सरकार ने पूरे देश में एक समान टैक्स की व्यवस्था जीएसटी को 1 जुलाई 2017 से लागू किया। ये देश का सबसे बड़ा टैक्स सुधार था। इसके जरिए 8 केंद्र सरकार के टैक्स और 9 राज्य सरकार के टैक्स हटा दिए गए। इसमें पेट्रोल, डीजल और अल्कोहल को शामिल नहीं किया गया। जीएसटी के आने से कई लोग टैक्स के दायरे में आ गए। ऑनलाइन व्यवस्था होने के कारण सरकार का टैक्स भी बढ़ा। पिछले महीने ही जीएसटी से सरकार को एक महीने में 1 लाख करोड़ रुपए का कलेक्शन हुआ।      

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