संजीवनी टुडे

राजनीतिक परिपक्वता की झलक

संजीवनी टुडे 19-06-2019 15:21:23

नीति आयोग की पांचवीं बैठक इस मायने में महत्वपूर्ण हो जाती है कि देश के लगभग सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इसमें सकारात्मक सोच के साथ हिस्सा लिया। नीति आयोग की बैठक में राजनीतिक परिपक्वता की झलक देखने मिली। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है कि पिछले दिनों आम चुनाव के दौरान सियासी दलों में काफी कटुता देखने को मिली थी


नीति आयोग की पांचवीं बैठक इस मायने में महत्वपूर्ण हो जाती है कि देश के लगभग सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इसमें सकारात्मक सोच के साथ हिस्सा लिया। नीति आयोग की बैठक में राजनीतिक परिपक्वता की झलक देखने मिली। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है कि पिछले दिनों आम चुनाव के दौरान सियासी दलों में काफी कटुता देखने को मिली थी। हालांकि विकास के मसले पर अधिकांश राज्य सरकारें एक साथ दिखीं। नीति आयोग की यह बैठक देश के लिए सकारात्मक संदेश है। हालांकि सियासत की कठिन लड़ाई में फंसीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नीति आयोग की बैठक में यह कहकर भाग नहीं लिया कि यह आयोग अधिकार संपन्न नहीं है। 

पंजाब के मुख्यमंत्री स्वास्थ्य कारणों से और तेलंगाना के मुख्यमंत्री अपनी पूर्व निर्धारित व्यस्तताओं के कारण बैठक में हिस्सा नहीं ले पाए। शेष सभी प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने नीति आयोग की बैठक में हिस्सा लिया। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह का हिस्सा नहीं ले पाना इसलिए मुद्दा नहीं बनता कि कांग्रेस शासित राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नीति आयोग की बैठक में न केवल हिस्सा लिया बल्कि अपने प्रदेश के हितों को पूरी मजबूती के साथ नीति आयोग के सामने रखा।

 यह बैठक इसलिए भी मायने रखती है कि 17 वीं लोकसभा के चुनाव परिणामों और नरेन्द्र मोदी की दोबारा ताजपोशी के बाद यह पहली और महत्वपूर्ण बैठक रही। केन्द्र सरकार के इस साल के पूर्ण बजट के पहले नीति आयोग की बैठक का आयोजन इस मायने में भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि आगामी बजट व वित्तीय वर्ष के लिए राज्यों के लिए पर्याप्त राशि व उसके समय पर पुनर्भरण की समयबद्धता सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही राजस्थान, मध्यप्रदेश सहित कई प्रदेशों में पूर्ण बजट आगामी दिनों में पेश होना है। ऐसे में नीति आयोग की बैठक के माध्यम से केन्द्र के पक्ष को समझने और केन्द्रीय बजट के अनुसार इन राज्यों को अपने बजट को अंतिम रुप देने का अवसर मिल सकेगा। 

नीति आयोग की बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने 2024 तक देश की अर्थव्यवस्था को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य को दोहराया। इसके लिए उन्होंने राज्यों से आय बढ़ाने, रोजगार के अवसर सृजित करने और निर्यात को बढ़ावा देने में सहभागिता निभाने का आग्रह भी किया। 

अब यह पूरी तरह से साफ हो गया है कि जीएसटी के बाद केवल और केवल पेट्रोलियम पदार्थों और मदिरा उत्पादों तक ही राज्यों की राजस्व आय सीमित हो गई है। ऐसे में राज्यों की केन्द्र पर निर्भरता अधिक हो गई है। इसीलिए राजस्थान की मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा केन्द्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात कर राज्यों के हिस्से की धनराशि को महीने की पहली तारीख को ही हस्तांतरित करने की मांग न्यायोचित, सामयिक और महत्वपूर्ण हो जाती है। 

दरअसल, राज्यों को उनका अपना हिस्सा समय पर नहीं मिलने से राज्य की वित्तीय गतिविधियां प्रभावित होती हैं। वैसे भी जब सारी व्यवस्था पारदर्शी और डिजिटलाइज्ड हो गई तो ऐसे में एक तारीख को ही राजस्व में से राज्यों का हिस्सा हस्तांतरित किए जाने में कोई बाधा नहीं है। इसी तरह से विपरीत परिस्थितियों में भी किसानों की आय को 2022 तक दोगुना करने के संकल्प को दोहराया गया है। लगभग सभी प्रदेश कर्जमाफी के कारण वित्तीय संकट से गुजर रहे हैं। ऐसे में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पक्ष को गंभीरता से समझने के साथ ही राजनीतिक लाभ-हानि से ऊपर उठकर केन्द्र सरकार को कर्ज माफी की राशि में अपनी सहभागिता निभानी चाहिए। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं नीति आयोग की बैठक में स्वीकारा है कि देश में जल संकट बड़ी समस्या बन गया है। नदियों को जोड़ने या जल संरक्षण कार्यों व जल संग्रहण की परंपरागत संरचनाओं को संरक्षित करने के साथ ही प्रधानमंत्री के 'हर घर नल' के नारे को फलीभूत करने के लिए ही जल शक्ति महकमा गठित किया गया है। 

इस जल शक्ति विभाग को जल्दी से जल्दी राज्यों से समन्वय बनाते हुए रोडमैप तैयार करना होगा, ताकि इस समस्या पर ठोस कार्य हो सके। पूर्वी राजस्थान जल परियोजना जैसी देशभर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की घोषणाओं व राज्यों से प्राप्त नदी घाटी परियोजनाओं को प्राथमिकता देनी होगी। नदियों को जोड़कर व्यर्थ जाने वाले पानी का उपयोग किया जा सकता है। सरकार को अत्यधिक भूमिगत जल के दोहन से किनारा करना होगा और जल संग्रहण के माध्यम से ही जल समस्या से निपटना होगा।

नीति आयोग की बैठक में केन्द्र सरकार व राज्यों का एजेण्डा उभर कर आ गया है। रोजगार, स्वास्थ्य, पानी, खेती-किसानी केंद्र सरकार की पहली प्राथमिकता में हैं। अच्छी बात यह कि राज्य सरकारें भी इन मुद्दों पर लगभग सहमत हैं। ऐसे में 'सबका साथ, सबका विकास व सबका विश्वास' के मूल मंत्र को आगे बढ़ाते हुए परस्पर सहयोग से राष्ट्रीय मुद्दों व समस्याओं के हल का रोडमैप तैयार करके नीति आयोग आगे आए तो निश्चित रुप से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

 यह अपने आप में सराहनीय है कि नीति आयोग की बैठक में अपवाद को छोड़कर सभी राज्यों के मुख्यमंत्री राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर आगे आए हैं। अब नीति आयोग और केन्द्र सरकार को भी इसी सोच के साथ आगे आना होगा, ताकि केन्द्र व राज्यों के बीच टकराव की नहीं अपितु सहभागिता की भूमिका तय हो सके। आशा की जानी चाहिए कि आने वाले समय में देश में इसी तरह की राजनीतिक परिपक्वता देखने को मिलेगी।

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