संजीवनी टुडे

नो बॉल पर छक्का और फ्री हिट का गिफ्ट!

-रामविलास जांगिड़

संजीवनी टुडे 26-06-2019 22:55:51

संसार की सभी गोलाकार चीजों में तुम मुझे क्रिकेट की बॉल ही समझो।


महाकिरकिट के साढ़े-दसवें चैप्टर में सिरी किसन चंदर ने अर्जु नरण सिंह को अपने क्रिकेट तत्व का सघन ब्रिटेनावतारी क्रिकेट रूप से परिचय कराया। सब में मैं हूं और मुझ में सब है। यही बात सबको समझाई। सिरी किसन चंदर अपने सिर पर रखी हैट ठीक करते हैं। गले में टंगी टाई की गांठ को दुरुस्त करते हैं। कमर में बेल्ट पर लटकायमान मोबाइल पर हाथ फेरते हैं और कहते हैं-"हे अर्जु नरण सिंह! मेरा क्रिकेट तत्व हसीन है, महीन है। यह असीम और अमाप है। इसके विस्तार का कोई अंत नहीं है। मैं प्राणी मात्र में रहता हूं क्रिकेट के रूप में।

संसार की सभी गोलाकार चीजों में तुम मुझे क्रिकेट की बॉल ही समझो। हे अर्जु नरण सिंह! तुम जरा हेलमेट हटाकर ध्यान से सुनो तो तुम सुनोगे कि ढकने की तमाम चीजों में मैं हेलमेट हूं। लकड़ियों में विकेट की लकड़ी और मॉडलों में सीनियर सेल्समैन हूं। उजालों में स्टेडियम की लाइटें हूं। विज्ञापनबाजी में मैं एक ब्रांड क्रिकेटर हूं। मैं ही बॉलर मैं ही बैट्समैन। मैं ही फिल्डर और मैं ही मैच फिक्सर हूं। मैं झूठों में पाखंडी और हर नेता में कमीशन हूं। मैं हर पार्टी के प्रचार में कुर्सी, हर एक पार्टी का घोषणापत्र और जनता का शोषणापत्र हूं। सब पार्टियों का आपसी ठगबंधन भी मैं ही हूं। इन क्रिकेट तत्वों से पार पाया जाना मुश्किल है। मैंने तो मात्र जरा-सा संकेत मात्र किया है।

जल में और स्थल में। जन में और निर्जन में। विराट काल में और पल-पल में। बॉलिंग, बैटिंग, फील्डिंग, एडवरटाइजिंग और मैच फिक्सिंग में। ये 5 चीजें सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। एडवरटाइजिंग और मैच फिक्सिंग के आधार पर ही बॉलिंग, बैटिंग व फील्डिंग संबंधी क्रियाकलाप किये जाते हैं। व्यक्ति को डॉलर और पाउंड में गहरी अनुभूति होती है तो उसे इन 5 चीजों में प्रीति होती है। जो भी जीव इन 5 चीजों में प्रीति नहीं रखता हो उसकी गंगाजलि उठना तय होता है। हे अर्जु नरण सिंह! यह प्रीति उस बॉलीवुडीय यह प्रीति जिंटा से सर्वथा ऊपर की चीज है। इसे तुम ध्यान लगाकर समझना।" 

तब अर्जु नरण सिंह ने पगबाधा आउट दिए जाने पर एतराज जताया और खटाक देनी सी डीआरएस का घोल अंपायर से मांग लिया। बल्ले को निराशा में जमीन पर लिटाकर कहने लगा - "हे मैच फिक्सर! हे सुपर-डुपर सेल्समेनेजरेश्वर! हे क्रिकेटाधीश! मैं आपका क्रिकेट तत्व रहस्य सुन चुका हूं। आपने विस्तार से वर्णन किया है। किंतु प्लीज! आपका दिव्य क्रिकेट रूप लाइव टेलीकास्ट करो। वरना ये टीवी वाले जंतु बिन विज्ञापन भूंगड़ा बेचते फिरेंगे जिसका पाप आपके मत्थे चिपकेगा। हे सखा हैट्रिक मेन! हे डबल-ट्रिपल शतक वीर! आप बीच-बीच में स्लो मोशन में अपना एक्शन रीप्ले भी करो ताकि मैं अपनी नजरों से आपकी इस क्रिकेट लीला के दर्शन कर इस पिच पर रन बनाने का करतब दिखा सकूं। मुझे आपके क्रिकेटमयी अविनाशी स्वरूप का दर्शन करा दीजिए ताकि मैं शानदार छक्का जड़ सकूं।"

ऐसा कहकर अर्जु नरण सिंह ने पिच पर ढेर सारा थूक उगल कर गले में बंधे ताबीज को चूम लिया। तभी थर्ड अंपायर ने अर्जु नरण सिंह को नॉट आउट करार दिया। इस अंपायर के चाचा के भतीजे को अर्जु नरण सिंह ने एक जूते बेचने की कंपनी में एड गुरू बनवाया था; यही उसका परिणाम मिला। तभी बॉलर ने एक बाउंसर मारा और अर्जु नरण सिंह ने उस पर छक्का जड़ दिया जैसे भारत ने पाकिस्तान की विदेश नीति उर्फ अनीति पर मारा हो; जिसे अंपायर ने नो बॉल इस तरह से दे दिया जैसे संयक्त राष्ट्र संघ भारत को नो बॉल पर फ्री हिट का गिफ्ट दे दिया करता है। यही फ्री हिट वाली बाउंसरी महाकिरकिट कथा घर-घर में किटकिट कथा के रूप में जारी है।

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