संजीवनी टुडे

बढ़ते पेट्रोल डीजल के दाम विकल्प तलाशने होगें

विकास सोमानी

संजीवनी टुडे 12-09-2018 15:10:57


गत 15-20 दिनों से पेट्रोल-डीजल के दाम काफी तेजी से बढ़े है और इन बढ़ते दामों ने आम उपभोक्ता को प्रभावित भी किया है। पेट्रोल-डीजल हमारी गतिशीलता और औद्योगिक विकास, गांवों में भी ट्रेक्टर, कुओं से पानी खिंचने के लिये डीजल का उपयोग, यातायात में डीजल का उपयोग कहने का तात्पर्य है कि पेट्रोल और डीजल के उपयोग बहुआयामी बन चुके है। इन पेट्रोल-डीजल के दामों में वृद्धि होना अन्र्तराष्ट्रीय व्यापार के अन्र्तगत है जिस पर भारत सरकार, इस अन्र्तराष्ट्रीय व्यापारिक वातावरण पर नजर ही रख सकती है अथवा अन्य प्रभावित देशो के साथ मिलकर इन बढ़ती दरों पर कमी करने का आग्रह कर सकती हैं। पेट्रोल-डीजल के भाव एक तरफ तो मंहगी दर पर मिलने से तो आमजन को प्रभावित कर ही रहे है लेकिन इस अप्रत्यक्ष रूप से इनसे जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी महगांई का बोझ भी झेलने को आम आदमी मजबूर हो रहा है। 

इन बढ़ते दामों से निष्चय है देश की आर्थिक विकास पर भी असर पड़ना लाजमी है। यह तो एक तरफ का चिन्तन है, इसका सबसे बड़ा असर हमारी लोक तांत्रिक व्यवस्थाओं पर भी पड़ता है। लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में हमारे यहाँ किसी ना किसी प्रकार के संवैधानिक दलो वाली संस्थाओं के चुनाव होते रहते है। इन चुनावों में विपक्षी दलों को मुद्दा मिल जाता है और ये बढ़ते दाम सत्तारूढ़ दलों की नींद खराब करते है। यद्यपि पढ़ा लिखा वर्ग इस अन्र्तराष्ट्रीय व्यापारिक व्यवस्थाओं को समझता है, अब उतना भावुक्तता में नहीं आता और सत्तारूढ़ दलों के प्रति इतनी नाराजगी व्यक्त नहीं कर रहा है लेकिन पीड़ित और प्रभावित अवष्य है अनावष्यक आर्थिक बोझ तो सहना ही पड़ता है।

आज के वैश्विक युग में जहां प्रगति के लिये इन पेट्रोल-डीजल का जहां उत्पादन तेजी से बढ़ा है वही इसका उपयोग भी काफी व्यापक हो गया है। प्रष्न यह है कि इस पेट्रोल-डीजल के उपयोग की आवश्यकता और उपलब्धता (सही दामों पर) का सामजंस्य कैसे बैठेे और तथाकथित अन्र्तराष्ट्रीय व्यापारिक परिस्थितियों के निर्मित होने पर आमजन को कैसे आनुपातिक दृष्टि से लाभ दिलाया, जाता रहे जिससे व्यक्ति से उद्योग और खेती तथा देश की प्रगति की रफ्तार निर्विघ्न बनी रहे। ऐसे विकल्पों को तलाषना होगा क्योंकि बढ़ते दामों से विकास की गति और आम आदमी की जेब प्रभावित होती ही है। पेट्रोल-डीजल के उपयोग को कैसे कम किया जाये। क्या सप्ताह में एक दिन हम पेट्रोल-डीजल के बिना अपनी दिनचर्या का यापन कर सकते है क्या हम पेट्रोल-डीजल के उपयोग को दुरूपयोग होने से नहीं बचा सकते ? उपयोग का दुरूपयोग सरकारी क्षेत्रों में अधिक नजर आता है, जिसे नियंत्रित किये जाने की आवश्यकता है।

आज हमारे बड़े-बड़े मंत्री-उच्च अधिकारी राजकीय वाहनों का जो उपयोग करते है उसे भी मर्यादित किये जाने की आवष्यकता है। बड़े स्तर पर राजकीय वाहनों का उपयोग तीन दिन ही कर दिया जाये क्योंकि ये उच्च अधिकार प्राप्त वर्ग सप्ताह में तीन दिन स्वयं के वाहनों से भी काम चला सकता है। लेकिन पेट्रोल की रिटेल कीमतों को अलग करके देखना अपने आप में ही विसंगति है पेट्रोल और डीजल की कीमतें तय करने में दो चीज़ें अहम होती हैं. क्रूड ऑयल ;कच्चे तेलद्ध की कीमतें और केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स अगर टैक्सों को ना बदला जाए तो पेट्रोल और डीजल की कीमतें सीधे सीधे क्रूड ऑयल की कीमतों में होने वाले उतार.चढ़ाव की तरह ही ऊपर.नीचे होंगीण् टैक्स जहां केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से तय किए जाते हैं वहीं क्रूड ऑयल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार और करंसी के एक्सचेंज रेट पर निर्भर करती हैं जिन पर सरकार का खास नियंत्रण नहीं होता ऐसे में किसी वक्त में पेट्रोल की रिटेल कीमतों का सही आकलन तभी किया जा सकता है जब उस वक्त की क्रूड ऑयल की कीमतों को भी ध्यान में रखा जाएण् इसके लिए हमने बीते 14 साल में क्रूड ऑयल की  क्या कीमतें रहींए उनका भी अध्ययन किया इसमें यूपीए के दोनों कार्यकाल और मोदी सरकार का चार साल का कार्यकाल भी शामिल है। 

राजस्थान सरकार ने तेल की बढ़ती कीमतों से राहत देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। रविवार को राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पेट्रोल.डीजल से राज्य सरकार द्वारा वसूले जाने वाले वैल्यू एडेड टैक्स ;वैटद्ध को 4 प्रतिशत कम करने का ऐलान किया है। सभी राज्यों में तेल के दाम आसमान छू रहे हैं। इस तेजी से राजस्थान भी अछूता नहीं हैं। वहां के शहर जयपुर में पेट्रोल.डीजल क्रमशरू 83ण्54 और 77ण्43 रुपये लीटर है। राज्य में पेट्रोल पर 30 की जगह पर 26 प्रतिशत वैट लगेगा और डीजल पर 22 की जगह यह 18 प्रतिशत हो जाएगा। इस फैसले से राजकोष पर 2 हजार करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

उपरोक्तानुसार नियंत्रण एक व्यवस्था हो सकती है लेकिन यह व्यवस्था दीर्घकालिक नहीं हो सकती है। विकल्प तो तलाषने ही होंगे अभी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इलेक्ट्रिक कारों के चलन को बढ़ाने की सुझाव दिया है और यह इस दिशा में काफी उपयुक्त सुझाव है, इन इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है इसलिये इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ाने क साथ-साथ इलेक्ट्रिक उत्पादन को भी हमें बढ़ाना होगा। इलेक्ट्रिकी की उपलब्ध भी काफी चुनौती पूर्ण है। क्योंकि बिजली की मांग तो वैसे ही प्रदेश में काफी है और इसकी वृद्धि के लिये भी प्रकारान्तर दृष्टि से प्रयासरत रहना होगा। हम सौभाग्यशाली है कि हम उस देश में रहते है जहां प्राकृतिक संसाधनों की कमी नहीं है। हमारे देश सूर्य-प्रकाश परिवर्तित कर सकते है यह हमारी मंशा पर निर्भर करेगा। हम इन व्यवस्थाओं को राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुये इन संसाधनों को किस हद तक विस्तृत कर सकते है यह हमारी चारित्रिक परीक्षा की कसौटी पर निर्भर करेगा। 

 हमें इन कसौटियों पर खरा उतरने के लिये राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखना होगा ना कि राजनैतिक दलों की सरकारों के तराजु से तोलकर। राजनैतिक दलों की सरकारें तो आती जाती रहेंगी लेकिन राष्ट्र के निर्माण में आय चरित्र की भागीदारी देश की तस्वीर को विकास के रंगों से खूबसूरत बना देगी। किसी भी देश के निर्माण विकास के लिये हम सरकारों की तरफ देखते है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसा होना भी चाहिये। जब किसी देश के विकास की मूल्यांकन होता है और आम आदमी की भागीदारी उसके समर्पण और त्याग की कसौटी पर होती है तो उस आम आदमी की भागीदारी को राष्ट्र के निर्माण के इन्डैक्स उसका स्थान स्वमेव गुजांयमान होगा, दूसरे देश भी आम आदमी के राष्ट्रीय चरित्र को वन्दनीय मानेंगे ही।

समय-समय पर पेट्रोल-डीजल ही नहीं कई बार खाधान्न वस्तुओं के दाम बढ़ते है, किसानों को उनके उत्पादन का उचित मूल्य नहीं मिल पाता ऐसा विकास की धाराओं में प्राकृतिक इसे कैसे जन आक्रोषों से बचाया जाये ? कैसे आम आदमी को विष्वास में लिया जाये यह सामाजिक और राजनैतिक चिन्तन पर अधिक निर्भर करेगा क्षुद्र राजनैतिक स्वार्थों और व्यापारिक कालाबाजारी जमाखोरी अगर होगी तो उस शासकीय प्रक्रियाओं का सहारा लेना चाहिये। लेकिन आमजन से जो त्याग की अपेक्षा की जाती है वही उच्च वर्ग शासन से जुड़े व्यक्तियों के त्याग और आचरण की अधिक आवष्यकता होती है क्योंकि यही वर्ग आमजन का आदर्ष होता है   बढ़ते पेट्रोल-डीजल दामों में आमजन टैक्सों को कम कराने की अपेक्षा रख रहा है। केन्द्र सरकार को आमजन की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिये और केन्द्र सरकार इस पर प्रभावी रूप से कार्य योजना बना रही है। 

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