संजीवनी टुडे

सेहत का दुश्मन है फास्ट फूड

डॉ मोनिका ओझा खत्री

संजीवनी टुडे 19-08-2018 19:36:44


आज की छात्र युवा पीढ़ी में फास्ट फूड का क्रेज इतना ज्यादा हो गया हैं की उन्हे घर पर बनने वाली कोई भी वस्तु पसंद नहीं आती हैं। भारत आज रेडीमेड फूड के पूरे कब्जे में है। एक सर्वे के अनुसार, 33.66 फीसदी भारतीयों ने स्वीकारा है कि वे हफ्ते में कम से कम दो बार जंक फूड खाते ही खाते हैं। भारत में भी रेडीमेड फूड का उद्योग तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसकी वार्षिक प्रगति दर 40 फीसदी बताई जाती है। एक जानकारी के अनुसार विश्व में भारत का फास्ट फूड उपभोग में 10वां स्थान है और प्रति व्यक्ति अपनी कमाई का 2ण्17 फीसदी इस पर खर्च करता है। आज यहां यह लगभग 8,500 करोड़ रुपये का व्यापार है। एसोचेम के अनुसार, वर्ष 2020 तक यह कारोबार  25,000 करोड़ रुपये का हो जाएगा। दुनिया में 10 सबसे बड़े फास्ट फूड के ब्रांड हैं जिनकी सालाना आय व धंधा मिलियन डॉलर में हैं। इनमें मैक्डोनल्ड्स के 30,000 से ज्यादा आउटलेट पूरी दुनिया में हैं और  97,723 मिलियन डॉलर का व्यापार हैै। इसी तरह, स्टारबक, सबवे, केएफसी, पिज्जा हट्ट जैसे बडे ब्रांडों ने क्रमश 44,230, 21,713, 13,521, 8,133 मिलियन डॉलर का 2017 में व्यापार किया। इसी तरह, अन्य ब्रांड भी, जैसे डोमिनोज, टिम हॉट्न्र्स, टाको बैल, चिपोल और बर्गर किंग हजारों मिलियन डॉलर का फास्ट फूड परोस देते हैं।

जंक अथवा फास्ट  फूड आज घर घर में अल्पाहार के रूप में प्रयोग में लिए जा रहे है।  जंक फूड चिप्स, कैंडी, शीतल पेय, नूडल्स, सैंडविच, फ्रेंच फ्राइज, पास्ता, क्रिस्प्स, चॉकलेट, मिठाइयाँ, हॉट डॉग जैसे पदार्थों को कहा जाता है। बर्गर, पिज्जा जैसे तले-भुने फास्ट फूड भी जंक फूड की श्रेणी में आती  है। जाइरो, तको, फिश और चिप्स जैसे शास्त्रीय भोजनों को भी जंक फूड मानते हैं। जंकफूड में कार्बोहाइड्रेट,वसा और शर्करा होती है। इसमें अधिकतर तलकर बनाए जाने वाले व्यंजनों में पिज्जा, बर्गर, फ्रैंकी, चिप्स, चॉकलेट, पेटीज मुख्य रूप से शामिल हैं।तीव्र गति से बढ़ते शहरीकरण, व्यस्त जीवन-शैली और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे बदलाव ने भारत में  लोगों के जीवन-यापन के तरीके को बदल कर रख दिया है।  इन बदलावों के फलस्वरूप लोगों ने घर पर खाना पकाने और खाने की आदत में भी बदलाव किया है।  महानगरों में  में रहने वाले परिवारों की  तैयार  भोजन , फास्ट फूड और जंक फूड पर निर्भरता ज्यादा ही बढ़ गई  है।  अब तो इनकी पहुँच घर घर में हो गई है। यह बच्चों के प्रिय नाश्ते में शुमार हो गया है। देखा तो यह गया है पूरा परिवार अल्पाहार में फास्ट फूड का उपयोग करने लगा है।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसन्धान परिषद् के अनुसार फास्ट फूड वे खाद्य पदार्थ होते हैं जो पहले से बने होते हैं या मिनटों के अंदर तैयार किये जाते हैं जैसे कि नूडल, बर्गर, फ्राइड फिश, मिल्क शेक, चिप्स, सलाद, पिज्जा, सैंडविच आदि।  फास्ट फूड का संग्रहण, हैंडलिंग और सूक्ष्म-जैविक संक्रमण इससे जुड़े मुख्य मुद्दे होते है।  इन खाद्य पदार्थों में कैलोरी मान  जरुरत से काफी ज्यादा होता है इसलिए इनके सेवन से हमारे स्वास्थ्य पर बुरा असर होता है। आॅरेगन हैल्थ एण्ड साइंस यूनिवर्सिटी के एक अनुसंधान में यह खुलासा किया गया है कि जंक फूड खाने के बाद व्यक्ति का दिमाग यह बताने में कम सक्षम होता है कि उसने क्या खाया और नतीजतन व्यक्ति जंक फूड खाता ही चला जाता है। जंक फूड दिल और दिमाग दोनों के लिए खराब है। तले और प्रसंस्कृत खाने की सामग्री में पाये जाने वाले रसायन दिमाग को नुकसान पहुंचाने वाले संकेत भेजते हैं, जिनसे उनकी भूख को नियंत्रित करने की क्षमता कम होती है।

भारत में रेस्टोरेंट का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। ऑनलाइन फूड डिलिवरी वेबसाइट जैसे जोमैटो और स्विगी के कारण ऑनलाइन आने वाले ऑर्डरों में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है। अच्छा और स्वादिष्ट खाना हर किसी की जरूरत है इसलिए पिछले कुछ सालों में फास्ट फूड रेस्टोरेंट की इंडस्ट्री काफी मुनाफे में चल रही है। वित्तीय वर्ष 2015 में इंडस्ट्री का कारोबार 258 बिलियन डॉलर पहुँच गया वहीँ   वित्तीय वर्ष 2020 तक यह कारोबार 318 बिलियन डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। भारत के आहार विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं फास्ट फूड  कभी-कभार तो ठीक है लेकिन इनका  ज्यादा इस्तेमाल सेहत के लिए बेहद  खतरनाक है। इन विदेशी उत्पादों के सेवन से बच्चे जल्दी बीमार हो जाते हैं। हमने खुद अपनी सेहत से खिलवाड़ किया है। स्वाद के पीछे के जहरीले रसायन को पहचान कर हमें अपने स्वास्थ्य की रक्षा करनी होगी, इसी में हम सबकी भलाई है।

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