संजीवनी टुडे

'पत्रकारिता को कलंकित करते फर्जी पत्रकार'

डॉ पुष्पेंद्र मिश्रा

संजीवनी टुडे 27-02-2020 14:55:08

पत्रकारिता आधुनिक सभ्यता का एक प्रमुख व्यवसाय है। जिसका कार्य देश विदेश के साथ-साथ क्षेत्रीय घटनाक्रमों को पाठकों तक निष्पक्ष रुप से पहुंचाना है। आज के युग में पत्रकारिता के भी कई माध्यम हो गए हैं।


पत्रकारिता आधुनिक सभ्यता का एक प्रमुख व्यवसाय है। जिसका कार्य देश विदेश के साथ-साथ क्षेत्रीय घटनाक्रमों को पाठकों तक निष्पक्ष रुप से पहुंचाना है। आज के युग में पत्रकारिता के भी कई माध्यम हो गए हैं। जिनमें इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, वेब मीडिया और प्रिंट मीडिया के साथ-साथ सोशल मीडिया प्रमुख रूप से भारत में सक्रिय हैं। बदलते वक्त के साथ बाजारवाद और पत्रकारिता के अंतर्संबंधों ने पत्रकारिता की विषय वस्तु तथा प्रस्तुत शैली में व्यापक परिवर्तन किए हैं। पत्रकारिता लोकतंत्र का अविभाज्य अंग है। प्रतिपल परिवर्तित होने वाले जीवन और जगत का दर्शन पत्रकारिता द्वारा ही संभव है। परिस्थितियों के अध्ययन चिंतन मनन और आत्माभिव्यक्ति की प्रवृति और दूसरों का कल्याण अर्थात लोकमंगल की भावना ने ही पत्रकारिता को जन्म दिया।

सामाजिक सरोकारों तथा सार्वजनिक हित से जुड़कर ही पत्रकारिता सार्थक बनती है। सामाजिक सरोकारों को व्यवस्था की दहलीज तक पहुंचाने और प्रशासन की जनहितकारी नीतियों तथा योजनाओं को समाज के सबसे निचले तबके तक ले जाने के दायित्व का निर्वाह ही सार्थक पत्रकारिता है। पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा पाया (स्तम्भ) भी कहा जाता है। पत्रकारिता ने लोकतंत्र में यह महत्त्वपूर्ण स्थान अपने आप नहीं हासिल किया है | बल्कि सामाजिक सरोकारों के प्रति पत्रकारिता के दायित्वों के महत्त्व को देखते हुए समाज ने ही दर्जा दिया है। कोई भी लोकतंत्र तभी सशक्त है, जब पत्रकारिता सामाजिक सरोकारों के प्रति अपनी सार्थक भूमिका निभाती रहे। सार्थक पत्रकारिता का उद्देश्य ही यह होना चाहिए कि वह प्रशासन और समाज के बीच एक महत्त्वपूर्ण कड़ी की भूमिका अपनाये। पत्रकारिता के इतिहास पर नजर डाले तो स्वतंत्रता के पूर्व पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रता प्राप्ति का लक्ष्य था। स्वतंत्रता के लिए चले आंदोलन और स्वाधीनता संग्राम में पत्रकारिता ने अहम और सार्थक भूमिका निभाई। उस दौर में पत्रकारिता ने पूरे देश को एकता के सूत्र में पिरोने के साथ-साथ पूरे समाज को स्वाधीनता की प्राप्ति के लक्ष्य से जोड़े रखा।

इंटरनेट और सूचना के अधिकार ने आज की पत्रकारिता को बहुआयामी और अनंत बना दिया है। आज कोई भी जानकारी पलक झपकते उपलब्ध की और कराई जा सकती है। मीडिया आज काफी सशक्त, स्वतंत्र और प्रभावकारी हो गया है। पत्रकारिता की पहुँच और आभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का व्यापक इस्तेमाल आमतौर पर सामाजिक सरोकारों और भलाई से ही जुड़ा है, किंतु कभी कभार इसका दुरपयोग भी होने लगा है। इंटरनेट की व्यापकता और उस तक सार्वजनिक पहुँच के कारण उसका दुष्प्रयोग भी होने लगा है। इंटरनेट के उपयोगकर्ता निजी भड़ास निकालने और आपत्तिजनक प्रलाप करने के लिए इस उपयोगी साधन का गलत इस्तेमाल करने लगे हैं। यही कारण है कि यदा-कदा मीडिया के इन बहुपयोगी साधनों पर अंकुश लगाने की बहस भी छिड़ जाती है। गनीमत है कि यह बहस सुझावों और शिकायतों तक ही सीमित रहती है। उस पर अमल की नौबत नहीं आने पाती। लोकतंत्र के हित में यही है कि जहाँ तक हो सके पत्रकारिता हो स्वतंत्र और निर्बाध रहने दिया जाए, और पत्रकारिता का अपना हित इसमें है कि वह आभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग समाज और सामाजिक सरोकारों के प्रति अपने दायित्वों के ईमानदार निवर्हन के लिए करती रहे।

संचार क्रांति तथा सूचना के आधिकार के अलावा आर्थिक उदारीकरण ने पत्रकारिता के चेहरे को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। विज्ञापनों से होनेवाली अथाह कमाई ने पत्रकारिता को काफी हद्द तक व्यावसायिक बना दिया है। मीडिया का लक्ष्य आज आधिक से आधिक कमाई का हो चला है। मीडिया के इसी व्यावसायिक दृष्टिकोन का नतीजा है कि उसका ध्यान सामाजिक सरोकारों से कहीं भटक गया है। मुद्दों पर आधारित पत्रकारिता के बजाय आज इन्फोटेमेंट ही मीडिया की सुर्खियों में रहता है। आज कुकुरमुत्तो की तरह फैले फर्जी पत्रकारों द्वारा किस तरह से अफवाहों का बाजार गर्म किया जा रहा है | इसका ज्वलंत उदाहरण उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले में देखने को मिला। जहां फर्जी पत्रकारों द्वारा दबाव समूह के रूप में कार्य करते हुए बिना किसी साक्ष्य के एक विद्यालय समूह पर बोर्ड परीक्षा में नकल करवाने का आरोप मढ़ दिया गया। बाद में अधिकारियों द्वारा सीसीटीवी फुटेज जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता देखने को नहीं मिली। अवैध तरीके से धन उगाही इन फर्जी पत्रकारों का पेशा बन चुका है। ऐसे मुट्ठी भर पत्रकारों की वजह से पूरे पत्रकारिता जगत को शर्मसार होना पड़ता है। ऐसे ही पत्रकार होते हैं जिनकी वजह से सही जानकारियां लोगों तक नहीं पहुंच पाती हैं और इन्हीं की शह में भ्रष्टाचार पनपता रहता है। समय की आवश्यकता है कि ऐसे फर्जी पत्रकारों पर अंकुश लगाने के लिए एक नियामक संस्था बनाई जाए। जिससे सही जानकारी लोगों तक पहुंच सके और पत्रकारिता को अवैध उगाही का जरिया बनाने वाले लोगों पर भी अंकुश लग सके। ऐसे पत्रकार आज प्रिंट मीडिया से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तक अपनी पैठ जमा चुके हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल पर जुड़ें

More From editorial

Trending Now
Recommended