संजीवनी टुडे

पर्यावरण संरक्षण सबसे बड़ी चुनौती

मंगलव्यास भारती

संजीवनी टुडे 03-06-2020 14:25:26

पर्यावरण संरक्षण वर्तमान में पूरे विश्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल पर्यावरण विभाग ही नहीं वरन आम लोगों को भी सार्थक प्रयास करने होंगे।


पर्यावरण संरक्षण वर्तमान में पूरे विश्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल पर्यावरण विभाग ही नहीं वरन आम लोगों को भी सार्थक प्रयास करने होंगे। विकास के नाम पर पेड़ों की बली के चलते पर्यावरण संरक्षण आज के युग की बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।पर्यावरण संरक्षण  से तात्पर्य पर्यावरण की सुरक्षा करना है। वृक्ष दृवनस्पतियों का मानव जीवन में अत्यधिक महत्व है. वे मनुष्य के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।  वे मानव जीवन का आधार हैं, परन्तु आज मानव इनके इस महत्व व् उपयोग को न समझते हुए इनकी उपेक्षा कर रहा है।  गौण लाभों को महत्व देते हुए इनका लगातार दोहन करता चला जा रहा है। जितने  वृक्ष कटते हैं,उतने  लगनी भी चाहिए, परन्तु ऐसा नहीं हो रहा है और इनकी संख्या लगातार घटती जा रही है।  परिणामतरू अनेकों समस्याएँ मनुष्य के सामने उपस्थित हो रही है

ब्रह्मा ने सौंदर्य स्वरुप जंगलों में वृक्ष पेड़ पौधों के रूप में इसलिए बनाया कि मनुष्य से पूर्व इस धरा पर प्रकट किया। जो फलफूल देने वाले थे। जो जीवों के जीवन पालन पोषण कर सके। जो जीवों के भूख को मिटा सकें वही नदियों का जल उज्जवल पीकर प्यास बुझा सके। तो वही पेड़ पर पक्षियों के रहने का स्थान बने और अपने जीवन का यापन कर सके।पर मनुष्य जब इस धरती पर आया तो मनुष्य ने अपनी बुद्धि के अनुरूप अपने घर घरथी बनाकर रहने लगा ओर आकर्षित धरा पर पेड़ पौधों को अपने खाने पीने सोने साधन उपलब्ध कर लिया यही नहीं औषधि भी ढ़ूंढ़ ली और इस तरह विकास की ओर बढ़ता रहा। तकनीकी के द्बारा खाद्य पदार्थ का प्रयोग करने लगा।  फिर कल कारखाने बनाये जिससे वह अपने जीवन को प्रगति की ओर ले जाता रहा रुका नहीं. फिर कल कारखाने से जो धुवां निकलने से पर्यावरण संरक्षण में बाधा आई जिससे बीमारियों का फैलाव होने लगा इतना होने लगा कि आज वो दूषित जल दूषित वायु प्रदूषण जहर बन कर उभर रहा है। कल कारखाने से दूषित धुआं जो निकलता अपने जीवन का नास करने को आतुर हैं। मनुष्य अपनी धुन  का पका अपने पग पसार ता चला गया कभी यह नहीं समझा कि जीवनका यह अनमोल उपहार स्वरूप प्रकृति अनुपम अपने पर्यावरण का आलौकिक वरदान स्वयं उस विधाता का दिया हैं। जिसे कैसे बिगाड़ने देगा वह हर समय हर पल निगेरबान है. उसके सिवा कोई माबूद नहीं पर जान बुझ कर अनजान बना बैठा है और चाँद से अब मंगल ग्रह पर जा पँहुचा। बड़े बड़े वाहन हवाई जहाज आदि से धुआं ही धुआं निकलता है  वही सभी बीमारियों का कारण बना है।कि शुद्ब वायु नहीं मिल रही जिससे आज कैंसर टी.बी.सुगर हार्ट अटैक आदि बीमारियां बहुत तेजी से बढ़ रही हैं।अगर अभी भी अपने जीवन को बचाना है तो पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता है जिससे स्वच्छ होगा अपना जीवन का भविष्य होगा।भावी पीढ़ी यानि आने वाली संताने स्वास्थ्य होगी तो संसार दुनियां चलेगी. पर कोई नहीं समझता बस पैसे कमाने हैं। बस यही कारण है जो आज देश विदेश कोरोना जैसी महामारी से बीमारी से झूझ रहा हैं अगर जीव जंतुओं और पेड़ पौधों को सुरक्षित रखेंगे तो देख लेना ये जीवन का सौंदर्य हम कभी भूला नहीं पायेंगे और कभी पर्यावरण का आलौकिक रूप नहीं भी भूला पायेंगे क्योंकि जीवन होगा तभी सुख पा सकेंगे। अभी भी समय हैं पेड़ लगाओं जीवन पाओं...। हरि भरी वसुंधरा का ये कौन चित्रकार हैं। अद्भुत कला का भण्डार है शब्द शब्द चीत्कार हैं। धरा बनी है दुल्हन जैसे ओढ़े हरी चुनर ऐसे। 
 

 

ऐसी ही ताजा खबरों व अपडेट के लिए डाउनलोड करे संजीवनी टुडे एप

More From editorial

Trending Now
Recommended