संजीवनी टुडे

गठबंधन- एक छोटी सी लव स्टोरी

रामविलास जांगिड़

संजीवनी टुडे 07-06-2019 21:14:46

गठबंधन एक छोटी सी लव स्टोरी है।


कवि कुर्सीदास कहते है कि संसार में कुर्सी ही सत्य है। कुर्सी ही परमात्मा है। पुण्य है। धर्म है। बाकी सब मिथ्या है। अतः हमें कुर्सी के लिए गठबंधन जोड़ने, फोड़ने, मोड़ने, तोड़ने आदि के कर्म मनोयोग से करने चाहिए। कुर्सीदास आगे कहते हैं -'हम वासी उस देश के, जहां अहम है कुर्सी खेल। दीप जले गठबंध का, बिन मुद्दा बिन मेल।। हम वासी उस देश के, जहां जात-धरम है वोट। बिन कुर्सी सब सून है, सब बंधन में खोट।। कुर्सी को दंडवत धोक है, है कोटि-कोटि परनाम। कुर्सी बिन मुक्ति नहीं, स्वार्थ मूल प्रमाण।

अतः हमें कुर्सी की रक्षा के लिए तमाम उपाय करने चाहिए। गठबंघन तो बुलबुला मात्र है। गठबंधन एक छोटी सी लव स्टोरी है। इसे स्वार्थ के मौसम में एक बड़ी सी हेट स्टोरी में बदल देना चाहिए। गठबंधन, लठबंधन और ठगबंधन से लेकर गठभंजन व लठभंजन सब करते रहना चाहिए। चुनाव से पहले, चुनाव के दौरान व चुनाव के बाद तक सिर्फ और सिर्फ कुर्सी को ध्यान में रखकर ही जात, धरम, राग, विराग जैसे नाटक-नौटंकी करते रहना चाहिए। चाहे करोड़ों चन्द्रमा उदित हो जाएं, अरबों सूरज उग आएं; तब भी कुर्सी के बिना कभी भी संतोष नहीं करना चाहिए। इधर-उधर से पार्टी बाजी के लिए जुटाए गए फंड को अपने लिए उपयोग में ले लें। ऐसे धन को विदेशी बैंकों में जमा कराते रहना चाहिए। वक्त-बेवक्त झूठे वादे व जुमलों की बौछार कर ठगबंधन से अपनी कुर्सी पक्की करनी चाहिए। 

वादों व विचारों को जोड़े, तोड़ें, मोड़ें और फोड़ें। मौकापरस्ती का महागठबंधन करें। तब कुर्सीजीवी समस्त सुखों का स्वामी बनकर दिक-दिगंतर में मंत्री बनकर हर पल कुर्सीपति ही बने रहेगा। चुनाव के पहले गठबंधन निखर जाता है और चुनाव के बाद गठबंधन बिखर जाता है। चुनाव के पहले प्रेम प्यार और मीठी मनुहार है और चुनाव के बाद तू-तू, मैं-मैं, लात-घूंसे और तकरार है। राजनीतिक अवसरवादिता का खेल जारी है। इस खेल में अपने-अपने राजनीतिक स्वार्थों का संधान ही सब पर भारी है। पहला-पहला प्यार है! अंखिंया लड़ाई मैंने तेरे लिए। पार्टी बनाई मैंने तेरे लिए। ये बंधन तो कुर्सी का चंदन है। ये बंधन तो दिलों का संगम है।

चुनाव से पहले छोटी सी गठबंधन लव स्टोरी का बाजार है। चुनाव के बाद तूने दिल मेरा तोड़ा। मुझे जगह-जगह से फोड़ा। तेरी राह में अटकाएंगे अब हम ये रोड़ा। मैं निकला! साइकिल लेके। सड़क पे। एक हाथी दिखा। सब मुद्दे छोड़ आया। मैं सारे बंधन तोड़ आया। ये बंधन तो कुर्सी की कसरत है। इस बंधन से मुझे अब नफरत है। अब शुरू होगा बड़ी सी गठबंधन हेट स्टोरी का व्यापार है! 

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