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राष्ट्रीय शिक्षक दिवस: रियासत काल से वर्तमान तक करौली की शिक्षा में ऐसे हुआ बदलाव

राजेश कुमार मीना (व०अ०) ,स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल ब्लॉक करौली राजस्थान

संजीवनी टुडे 05-09-2020 17:56:38

करौली राजपरिवार गुरुओं को शिक्षा प्रदान करने के बदले में उनके रहने एवं खाने पीने की व्यवस्था करते थे इसके बदले में गुरु शिष्य से शुल्क वसूल नहीं करते थे!


प्राचीन काल में भारतीय शिक्षा पद्धति प्रचलित रही जिसका लक्ष्य ज्ञान, व्यक्तिगत कल्याण और जीविका निर्वाह के साधन उपलब्ध करवाना रहा! इसके साथ ही व्यक्ति के नैतिक आध्यात्मिक विकास का भी ध्येय रहा। बालक की प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही होती थी घनी बस्तियों में शिक्षा के केंद्र होते थे जहां गुरु अपने शिष्यों को विद्या अध्ययन कराया करते थे।

करौली राजपरिवार गुरुओं को शिक्षा प्रदान करने के बदले में उनके रहने एवं खाने पीने की व्यवस्था करते थे इसके बदले में गुरु शिष्य से शुल्क वसूल नहीं करते थे! गुरु की आवश्यकताओं की पूर्ति संपन्न लोग एवं राज्य द्वारा कर दी जाती थी समय-समय पर शिक्षण संस्थाओं को आर्थिक एवं भूमि अनुदान प्राप्त होता रहता था 18 वर्ष तक विद्यार्थी अपनी शिक्षा पूरी कर लेता था प्रमुख विषय जिनका अध्यापन कार्य करवाया जाता था वेदशास्त्र, नीति, मीमांसा, धर्मशास्त्र, कर्मकांड,पुराण, ज्योतिष, गणित, साहित्य, व्याकरण, संगीत, नृत्य,चित्रकला, चिकित्सा आदि थे!

करौली के ईतिहास का अध्ययन करने पर पता चलता है कि 1644 -1947 ईस्वी तक शिक्षा का प्रतिशत केवल 26% था रियासत काल में करौली रियासत की शिक्षा का स्तर अत्यंत पिछड़ा हुआ था। महाराजा गोपाल सिंह (1724-1757) भँवरपाल (1886-1927) ने शिक्षा को बढ़ाने के लिए पूरा प्रयास किया था महाराजा गोपाल सिंह ने ज्योतिष विद्या को बढ़ावा देने के लिए ज्योतिषियों को जयपुर से  करौलीआमंत्रित किया  उन्हीं में से एक विद्वान ने सर्वप्रथम करौली में पंचांग बनाया इस परिवार को करौली में ""जत्ती"" परिवार के नाम से जाना जाता है। 

महाराजा भँवरपाल (1886-1927) में अपने शासनकाल में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा दिया उस समय पंडित सिद्धेश्वर प्रसाद का भवन संस्कृत का केंद्र माना जाता था। उस समय( डांग की रानी) करौली जैसी छोटी रियासत में ही हाई स्कूल था जब कि कोटा जैसी बड़ी रियासत में हाई स्कूल नहीं था यह हाई स्कूल इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अनुबंधित था उस समय इस स्कूल के निर्माण में 38000 रू खर्च हुए।  

महाराजा मदन पाल के शासनकाल में करौली रियासत में 6 मई ,शुक्रवार 1864 को प्रथम अंग्रेजी स्कूल की स्थापना हुई उस समय इस स्कूल में छात्रों की संख्या बहुत कम थी साथ ही अध्यापकों का वेतन भी कम था इस विद्यालय में अरबी,फारसी, अंग्रेजी का अध्ययन मौखिक होता था साथ ही उर्दू, हिंदी, संस्कृत, वर्नाक्यूलर का अध्ययन करवाया जाता था संस्कृत विभाग की परीक्षाएं बनारस विश्वविद्यालय आयोजित करवाता था। 

करौली रियासत में इस स्कूल के अलावा है 6 और प्राइमरी स्कूल मंडरायल, कुडगाव ,सपोटरा, मासलपुर, रोधई, करणपुर में संचालित थे। (1889) में एक हाई स्कूल आरंभ हुआ इस स्कूल का नामांकरण किंग एडवर्ड सप्तम के सिंहासन पर बैठने के उपलक्ष्य में ""किंग एडवर्ड मेमोरियल हाई स्कूल"" रखा गया हाई स्कूल के लिए निर्मित भवन (वर्तमान का डाइट) आज भी करौली की एक ऐतिहासिक इमारत है जिसको सरकार के ने 1957 में डाइट परिसर के रूप में परिवर्तित कर दिया गया। 

महाराजा भँवरपाल (1846- 1927) के समय 1911 में लड़कियों का एक स्कूल खोला गया जिसमें 27 लड़कियो अध्ययन कर रही थी इन लड़कियों को अध्यापन कार्य के साथ सिलाई का कार्य भी सिखाया जाता था। 1905 में करौली रियासत में छात्रों की कुल संख्या 560 थी वही हाई स्कूल में कुल 240 छात्र अध्ययनरत थे हाई स्कूल के कुछ विद्यार्थियों को 12 दिसम्बर 1911 में दिल्ली दरबार में उपस्थित होने का सम्मान मिला उस समय शिक्षा पर रियासत का कुल खर्च 6500/-रू था। 

महाराजा भौमपाल (1927- 1947) के समय स्कूलों की संख्या बढ़कर 13 हो गई जिनमें 1 हाई स्कूल, 1वर्नाक्यूलर, मिडिल स्कूल 8, प्राइमरी स्कूल 1,गल्स स्कूल 1,संस्कृत स्कूल 1 ,इस्लामी स्कूल 1 था स्कूलों पर नियंत्रण का कार्य हाई स्कूल के प्रधानाचार्य द्वारा किया जाता था। 

एक बार जब 19 नवंबर 1938 को राजपूताना  के गवर्नर जनरल स्थानीय राज्य के जुबली अस्पताल का उद्घाटन करने करौली रियासत आये तब हाई स्कूल के छात्रों को उनसे मिलने का अवसर मिला 22 नवंबर 1938 को गवर्नर जनरल ने  इस विद्यालय का दौरा कर बच्चों को पुरस्कार वितरण किया। 

आजादी के बाद  वर्तमान में  करौली जिले में उच्च प्राथमिक स्कूलों की संख्या (1034) है वही माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्कूल  संपूर्ण जिले में (312) हैं जिले में सरकारी क्षेत्र में  4  अंग्रेजी माध्यम के स्कूल  करौली, टोडाभीम, सपोटरा,नादौती, ब्लॉक में ""स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल"" के रूप में संचालित हैं। हाल ही में सरकार के द्वारा  3 ब्लॉकों में  महात्मा गांधी  अंग्रेजी माध्यम के स्कूल  हिण्डौन,करौली ,सपोटरा में भी खोले गए हैं। 

वही जनजातीय विभाग द्वारा संचालित ""एकलव्य मॉडल रेजीडेन्सियल स्कूल रानोली"टोडाभीम के रानोली गांव में स्थित है। लड़कियों की शिक्षा में बढ़ोतरी के लिए  चार कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय  महस्वा(टोडाभीम),नारौली डांग(सपोटरा), दलपुरा (नादौती), और मासलपुर में चल रहे हैं। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जिला मुख्यालय पर महाविद्यालय की स्थापना 1960 मे हुई संस्कृत विभाग मे प्रवेशिका स्कूल 1962 मे स्थापित किया गया।

वर्तमान मे 1 बालिका महाविद्यालय जिला स्तर पर है साथ ही 7 ब्लॉकों में राजकीय महाविद्यालय भी स्थित हैं परंतु फिर भी छोटा काशी के नाम से मशहूर डांग की रानी करौली को  अभी  शिक्षा के ""आशान्वित जिलों ""की श्रेणी में  रखा गया है जहां पर शिक्षा के क्षेत्र में और अधिक सुधार की आवश्यकता है। 

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