संजीवनी टुडे

आखिर ये ’चित्रकार’ है कौन!

डाॅ. विलास जोशी

संजीवनी टुडे 05-06-2019 14:19:40

अभी एक दिन मेरे पडो़सी ने अपने घर का कचरा मेरे घर के आंगन में फेंक दिया था, तो मुझे इतना गस्सा आया कि मैंने उसे इतनी बात सुनाई कि उसका मुंह रूहासा हो गया। यदि यदाकदा कोई अनजान आदमी मेरे स्कुटर को कट मारते हुए पास से निकल जाता है


अभी एक दिन मेरे पडो़सी ने अपने  घर का कचरा मेरे घर के आंगन में फेंक दिया था, तो मुझे इतना गस्सा आया कि मैंने उसे इतनी बात सुनाई कि उसका मुंह रूहासा हो गया। यदि यदाकदा कोई अनजान  आदमी मेरे स्कुटर को कट मारते हुए पास से निकल जाता है तो मेरे मुंह से उसके  खिलाफ असंख्य अशब्द निकल जाते है,लेकिन  कोई भी आदमी मुंह उठाकर चार लोगों में उन्हे गलियां दे, उनकी पत्नी को लेकर अनाप शनाप बातें करे और फिर भी वह  शांत रहकर यह सब बातें नजरअंदाज करे, तो ऐस व्यक्तित्व को आप क्या कहेंगे? 

कुछ लोग बहुत ही गैरजिम्मेदारी के साथ उनको ’चोर’ कह रहे थे। कुछ एक ने तो उनको ’नीच’ कहने तक में भी परहेज नहीं किया। कुछ लोगों ने तो उन्हे सैनिकों के प्राणों का सौदागर तक कहा। कुछ  लोगों ने तो कहने की  भी इंतहा करते हुए उन्हे ’आरएसएस का कुत्ता’ तक कहा। लेकिन वह इंसान यह सब  बातें सुनकर भी सब सहन करते रहे। कुछ एक लोगों को तो जैसे  दस दस जुबान निकल  आई थी।  वे अपनी दसों जुबान से दिनभर में उनके खिलाफ न जाने क्या क्या बकवास कर रहे थे। कुछ लोग उनकी’’औकात’’ तक निकालने से बाज नही आए। सार्वजनिक सभा हो, टीवी पर बहस हो, कुछ लोग तो उनके विरूद्ध अपना मुंह बंद करने के लिए तैयार ही नहीं थे। ये सब बाते देश भर की अवाम एक मुक दर्शक की भांती  देख और समझ रही थी। इस महान शक्स का विरोध करने के लिए कुछ अभिनेता और अभिनेत्रियों ने तो उनको मिले पुरस्कार तक लौटाने की भाषा बोली थी। बीते कुछ वर्षों में कुछ एक लोगो ने तो यहां तक कहा कि अब हमें इस देश में रहने तक मेे डर लगता है। हम अपने आप को यहां असुरक्षित महसूस करते है।फिर ये बात कहने वाले लोग सामान्य जन  नहीं थे, बल्कि अपने ही देश के ’सेलिब्रिटी लोग’ थे। कुछ एक ने तो यहां तक कह दिया कि इस आदमी की सत्ता में पुनः वापसी हुई तो हम देश छोड़ देंगे। जरा साचिए और इस शक्स की  जगह अपने आप को रखकर देखिए कि इस इंसान की जगह यदि मैं होता तो क्या करता? क्या मेैं ये सब बाते सुनकर भी शांत -खामोश रहता? लेकिन इस महान इंसान ने न तो किसी की शिकायत करी और न ही इन बातों पर अपनी कोई प्रतिक्रिया ही दी।यदि ये इंसान चाहता तो किसी को कानों कान खबर भी नहीं होने देता और  उन लोगों को रातोरात उनके घरों से  उठवा लेता। लेकिन देखिए, सत्ता की सारी शक्ति उनके हाथ में केन्द्रीत होने के बावजूद भी उन्होने असाधारण संयम और धैर्य से काम लिया।

’’एक चायवाला, जो अपनी पत्नी तक को संभाल नहीं पाया, वह देश क्या संभालेगा’’- ऐसी तिखी आलोचनात्मक प्रतिक्रियाएं सुनने के बाद भी वह व्यक्तित्व शांतचित्त रहां। ऐसी कड़वी बातों का बोझ भी वह पूरे पांच साल तक अपने दिल पर ढोता रहा। जरा सोचिए कि यह बात एक आम आदमी के साथ होती तो वह अपने विरोधी के साथ कैसा बर्ताव करता? वह ’हिटलर’ है, वे अपनी मनमानी कार्यशैली से व्यक्ति के अभिव्यक्ति के स्वतंत्रता का गला घोट रहा है। ये आरोप भी कुछ लोग बहुत ही स्वतंत्रतापूर्वक ओैर अभिव्यक्ति की आजादी के साथ उनपर लगाते रहेे।   फेसबुक और वाट्सएप जैसे सोशल मिडिया पर उनकी आलोचना करने के लिए कुछ लोगों ने तो अनेकों बेनामी अकाउंट तक खोल लिए थे।

’’इस प्रकार सम्पूर्ण देश की जनता ही उनके विरोध में है’’- ऐसा द्वेशपूर्ण वातावरण बनाया गया। लेकिन इस देश के’’परिपक्व मतदाताओं’’ ने स्वंयमय ’’अपना विराट जनादेश’उस महान व्यक्तित्व के पक्ष में देकर’उनके विरोधियों ओर आलोचको को, एक करारा जवाब दे दिया। अब इस महान व्यक्तित्व की एक विशेषता देखिए कि गत पांच साल में बिना कोई अवकाश लिए, बिना विचलित हुए अपने काम में लगा रहा ओैर यहां तक इस कार्य अवधि मे वे कभी बीमार तक नहीं पडे़। यह तो स्वीकार करना ही पडे़गा कि इस इंसान में असाधारण सहनशक्ति और उतना ही आत्मविश्वास भी है। ये चित्रकार  विकास के रथ को अपने रंगों में रंगकर अपने देश की छबि ही बदलना चाहता है और इसीलिएि वे ’भगिरत प्रयत्न’ कर रहे है। अब आप समझ ही गए होंगे कि मैं ये किस धैर्यवान, कर्मठ और झुझारू महान इंसान के बारे में आपसे कह रहा हूं?

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