संजीवनी टुडे

एक पत्र ’उस अनाम चोर’ के नाम

डाॅ. विलास जोशी

संजीवनी टुडे 15-12-2019 14:31:27

हे चोर महाशय, चूंकि मैं तुम्हारा नाम नहीं जानता, इसलिए इस पत्र में तुम्हे ’अनाम चोर’ कहकर संबोधित कर रहा हूं। मैं मध्यप्रदेश के शाजापुर जिले का एक अदद् सरकारी मुलजिम हूं। मैं अपने ससुराल शादी के लिए गया था।


हे चोर महाशय, चूंकि मैं तुम्हारा नाम नहीं जानता, इसलिए इस पत्र  में तुम्हे ’अनाम चोर’ कहकर संबोधित कर रहा हूं। मैं मध्यप्रदेश के शाजापुर जिले का एक अदद् सरकारी मुलजिम हूं। मैं अपने ससुराल शादी के लिए गया था। उसी दौरान तुम मेरे घर की खिड़की तोड़ कर घर में घूसे  ओैर जब तुम्हे चोरी करने के लिए कोई मुल्यवान वस्तुएं नहीं मिली  तो तुमने एक कोरे कागज पर यह संदेश लिखा कि-’’यार,तुम बहुत कंजूस हो, खिड़की तोड़ने की मेहनत तक का मेहताना  मुझे तुम्हारे घर में नहीं मिला’’।  

हे अनाम चारे, तुम जानते हो  कि तुमने जो  चिठ्ठी लिखकर मेरे घर में छोड़ी उसका परिणाम क्या हुआ? जब मेरे घर चोरी होने की खबर कुछ स्थानीय अखबारों में छपी ,तो मेरे रिश्तेदार, परिचितों और मित्रों के फोन मुझे आए कि क्या तुम इतने गए गुजरे हो कि चोर को चोरी करने के लिए तुम्हारे घर में कुछ भी नहीं मिला? यार तुम एक सरकारी मुलाजिम हो और आजकल सरकारी कर्मचारियों को अच्छी खासी  पगार मिलने लगी है,फिर एकचोर  ने तुम्हे कंजूस हो- यह कैसे लिख दिया?एक स्थानीय अखबार ने तो यहां तक कमेंटस् करी कि क्या यह सरकारी कर्मचारी इतना ईमानदार है कि उसके घर में चोर को चोरी करने के लिए कुछ भी नहीं मिला?

हे चोर महाशय, तुम्हे बता दूं कि एक सरकारी कर्मचारी अपनी पगार से तो केवल दो समय समय  रोटी भर खा सकता है। आम लोगों को उसकी मोटी सेलरी दिखती हेै, लेकिन विकराल रूप लिए महंगाई नहीं दिखती, जो उसकी आखी की आखी पगार खा  जाती है।। यकीन मानो हे चोर, तुम्हारी उस चिठ्ठी के कारण मेरी सामाजिक प्रतिष्ठा का ग्राफ इतना गिर गया है कि अब हर कोई ऐरा गेरा तक मुझे ’कंजूस’ समझ राह है। मेरे घर में मुझे एक ’पत्नी’ है, हमे एक’लड़की’ भी है और वह शादी के लायक है। उसके शादी के लिए कुछ जगह मेंने बात चला रखी थी। मेरी पत्नी के पास कुछ सोने और चांदी गहने है,जो उसे शादीके समय उसके माता पिता ने दिए थें। हम वे गहने हमेशा ’’लाॅकर ’’ मेें ही रखते है। तुम तो जानते ही हो कि आज का जमाना गहने पहनकर बाहर घूमने -फिरनेे जैसा नहीं रहा। यदाकदा गले में सोने की चेन पहनकर निकलो और तभी मोटरसाइकल पर ’’मोटू-पतलू की जोड़ी’’ आकर गले पर छपट्टा मारकर चेन उड़़ा ले  तो.....?

हे चोर महाशय, जिन लोगो  के गले से चेन उडाई जाती है उस समय उनके दिल पर क्या गुजरती है,यह जरा उनसे ही जाकर  पूछो। तुमने तो बड़े ही आसानीसे  मुझे ’’कंजूस’’ कह दिया। लेकिन उसका परिणाम यह हुआ कि कुुुछ लोगों के यहां मेरी बिटियां के शादी की बात चली रही थी, वे अब मुझ से कन्नी काट रहे है। वे वास्तव में मुझे कंजूस समझ रहे है, जबकि वास्तविक रूप में ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। हे अनाम चोर, जब तुम मेरे घर चोरी करने आए, तो क्या तुम्हे मेरे घर की दीवार पर लगा ’’32 इंची टीवी’’ नजर नहीं आया? यार, कम से कम उसे हीतुम चुरा ले जाते ,बजाय यह चिठ्टी लिखने के  कि ’’मेैं कंजूस हूं’’? यह टीवी मेैंने आसान किस्तों पर खरीदा था।  

हे अनाम चोर,तुम रोजाना अखबार तो पढते ही होंगे! तो मेरा यह पत्र पढकर जरा सोचना कि यदि तुम्हारे  घर कभी तुम्हारे हीबिरादरी का कोई भाई यानी रातो का राजा यानी कोई चोर तुम्हारा दरवाजा तोड़ कर घूस जाए और जाते समय यह चिठ्ठी छोड़़ जाए कि -’’यार, चोर भाई, तुम बडे ही कंजूस हो, तब तुम पर क्या बितेगी? जरा सोचना! जबकि तुम्हारी तो कोई ’’सोशल वेल्यू’’ भी नहीं है। तुम्हारी चिठ्ठी के बाद तो मेरी ’’सोशल वेल्यू की ’’जीडीपी दर’’ की तरह एकदम गिर गई है, जो कभी 7 प्रतिशत थी, अब वह घट कर 3.5 प्रतिशत से भी कम रह गई है। यार चोर, भविष्य में तुम किसी के भी घर  में चोरी करो तो इतना भर याद रखना कि -’’किसी के घर पर ऐसी चिठ्ठी मत छोड़कर जाना, जैसे मेरे घर छोड़ कर गए हो -समझे।

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