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एमएनसी और राष्ट्रीय कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के ईमेल अकाउंट हैक कर ठगी करने वाला गिरफ्तार

संजीवनी टुडे 19-10-2020 19:36:20

एमएनसी और राष्ट्रीय कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के ईमेल अकाउंट हैक कर ठगी करने वाला गिरफ्तार


नई दिल्ली। देश के नामी कंपनी एमएनसी के वरिष्ठ अधिकारियों के ईमेल अकाउंट को हैक कर ठगी करने वाले एक शातिर बदमाश को सदर बाजार थाने की अहाता किदारा चौकी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपित की पहचान गुजरात निवासी तेजस यशवंत परमार (34) के रूप में हुई है। महज दसवीं क्लास तक पढ़ा-लिखा आरोपी देश की नामी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के ईमेल हैक कर उनके मेल से अकाउंट डिपोर्टमेंट में मेल कर अपने खाते में रुपये ट्रांसफर करवा लिया करता था। अकाउंट डिपार्टमेंट के अधिकारी भी इतने सीनियर के ईमेल को दरकिनार नहीं कर पाते थे और बिना कुछ पूछताछ के रुपये ट्रांसफर कर दिया करता था। आरोपित की गिरफ्तारी से पीएस सशांत लोक, गुरुग्राम और दिल्ली के सदर बाजार के दो मामले सुलझे हैं। पुलिस आरोपी से पछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।

डीसीपी एंटो अल्फोंस ने बताया कि पिछले दिनों सदर बाजार इलाके की एक निजी कंपनी के अकाउंट मैनेजर अमरनाथ शुक्ला ने ठगी की शिकायत दी। उन्होंने बताया कि कंपनी के निदेशक के ईमेल से उनके पास एक मेल आया। मेल में कहा गया कि वह किसी तेजस परमार के खाते में 5.90 लाख रुपये डाल दें। किसी वजह से अमरनाथ ने एक ही लाख रुपये खाते में ट्रांसफर किए थे तो उन्हें निदेशक से पता चला कि उनके खाते को किसी ने हैक कर लिया है। अमरनाथ को सारा माजरा समझ आ गया कि किसी ने निदेशक का खाता हैक कर उनसे रकम ठगी है। पीड़ित की शिकायत पर प‌ुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की। जिस खाते में रुपये ट्रांसफर हुए थे, उसका पता पश्चिम मुंबई का था। पुलिस की एक टीम वहां पहुंची, लेकिन पता चला कि आरोपी पहले यहां किराए पर रहता था। बैंक के साथ अटैच मोबाइल नंबर भी इस्तेमाल में नहीं था।

किसी तरह पुलिस ने तेजस परमार के पिता का पैन नंबर जुटाया, इसके बाद तेजस का मोबाइल नंबर प्राप्त कर लिया। बाद में पुलिस ने टेक्नीकल सर्विलांस की मदद से उसका पता किया तो उसकी लोकेशन गुरुग्राम सेक्टर-53 की मिली। पुलिस ने आरोपी को दबोच लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने कई वारदातों में अपना हाथ होने की बात कबूल की। आरोपी ने बताया कि अपने इस खाते को वह दूसरे बदमाशों को कमिशन पर भी देता था। ठगी की रकम वह इसमें ट्रांसफर करते थे। पांच फीसदी कमिशन अपने पास रखकर वह रकम वापस कर देता था।

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