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अगर आप भी कर रहे हैं 'वर्क फ्रॉम होम', तो हो जाइये सावधान, आपकी जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी

संजीवनी टुडे 29-03-2020 12:59:58

दुनिया में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के बाद अधिकतर कंपनियों की ओर कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा गया है। वर्क फ्रॉम होम का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है और शायद आप भी ऐसे लोगों में शामिल हों, जो घर से ही ऑफिस के लिए काम कर रहे हैं।


डेस्क। दुनिया में  कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के बाद अधिकतर कंपनियों की ओर कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा गया है। वर्क फ्रॉम होम का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है और शायद आप भी ऐसे लोगों में शामिल हों, जो घर से ही ऑफिस के लिए काम कर रहे हैं। सिक्यॉर नेटवर्क में काम करते वक्त आपकी जरा सी असावधानी या छोटी सी लापरवाही भी आपको या आपके ऑर्गनाइजेशन को साइबर अटैक का शिकार बना सकती है। साइबर सिक्यॉरिटी से जुड़े खतरे भी इस दौरान कई गुना बढ़ गए हैं।

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साइबर हैकर्स के लिए यह समय एक सुनहरे मौके की तरह है क्योंकि बड़ी से लेकर छोटी कंपनियां तक अपने कर्मचारियों से वायरलेस नेटवर्क्स पर वर्क फ्रॉम होम करवा रही हैं। ऐसी स्थिति में नेटवर्क में सेंध लगाना हैकर्स के लिए पहले की तुलना में कहीं आसान है। एलिया कंसल्टिंग के सीईओ दीपक भवनानी ने कहा, 'छोटी और बड़ी कंपनियों पर वर्क फ्रॉम होम की वजह से असर पड़ा है और साइबर सिक्यॉरिटी से जुड़ी चिंताएं भी काफी बढ़ी हैं। कई कंपनियों का डेटा अब लैपटॉप और होम PC पर ऐक्सेस किया जा रहा है, जिनमें इन-ऑफिस सेटअप जैसे फायरवॉल की सिक्यॉरिटी नहीं है।'

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कंपनियों के मैनेजमेंट और आईटी मैनेजर्स को उनके डेटा से जुड़े खतरों को लेकर अलर्ट होने की जरूरत है और ऐसे इंतजाम करने अब जरूरी हो गए हैं, जिनकी मदद से डेटा लॉस होने से रोका जा सके। भवनानी ने कहा कि कंपनियों का डेटा चोरी होना या उनके नेटवर्क्स को पहुंचने वाला नुकसान उनकी रेप्युटेशन को नुकसान पहुंचाएगा और इसका असर लंबे वक्त तक रह सकता है। इसके अलावा साइबर क्रिमिनल्स और हैकर्स दुनियाभर में फैल रहे कोरोना वायरस से जुड़े खतरे और डर का इस्तेमाल भी ईमेल स्कैम, फिशिंग और रैंसमवेयर अटैक्स के लिए कर रहे हैं।

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सोनिकवॉल के रीजनल सेल्स APAC के वीपी देबासीश मुखर्जी ने कहा,  'ऐप्स, वेबसाइट्स से लेकर ईमेल्स तक की मदद से कोरोना वायरस फैलने के दौरान हैकिंग के कई मामले सामने आए हैं और हैकर्स पहले से ज्यादा क्रिएटिव हो गए हैं।' 'यह बिल्कुल ऐसा वक्त है जब हैकर्स अपने मैलिशस फाइल्स को हैकिंग और डेटा चोरी के लिए इस्तेमाल करने के लिए नए-नए तरीके ईजाद कर रहे हैं।' कई कर्मचारी ऐसे हैं जो अपने पर्सनल लैपटॉप या कंप्यूटर पर ऑफिस का काम कर रहे हैं और सेंसिटिव डेटा ऐक्सेस कर रहे है, ऐसे सिस्टम्स पर रिस्क बढ़ जाता है और ऐसे कर्मचारी किसी भी अनजान लिंक या वेबसाइट पर क्लिक करने का रिस्क बिल्कुल नहीं ले सकते।

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पालो आल्टो नेटवर्क के रीजनल वीपी फॉर इंडिया ऐंड SAARC अनिल भसिन ने कहा, 'साइबर क्रिमिनल्स COVID-19 से जुड़े डर का फायदा उठाकर ईमेल स्कैम्स, फिशिंग अटैक्स और रैंसमवेयर अटैक्स कर रहे हैं। इन ईमेल मेसेजेस में यूजर्स से मैलिशस लिंक पर क्लिक करने या फिर मेल के साथ भेजे गए अटैचमेंट को ओपन करने को कहा जाता है। कोरोना वायरस के बारे में ज्यादा जानकारी पाने के लिए यूजर्स से अटैचमेंट में दी गई मैलिशस फाइस ओपन करने के लिए कहा जाता है। ये फाइल्स लिंक, pdf, mp4 या docx फॉरमेट में हो सकती हैं।' इस दौरान कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है कि वे ऐसे किसी लिंक पर क्लिक न करें।

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