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प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव के नाम पर उपायुक्त को बहन की नौकरी के लिए फर्जी फोन करने वाला गिरफ्तार

संजीवनी टुडे 24-05-2020 06:04:00

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव का नाम लेकर डीसी को फर्जी कॉल करने के आरोपित प्रदीप कुमार व उसके बेटे दीपक कुमार को स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट यमुनानगर द्वारा गिरफ्तार कर लिया।


यमुनानगर। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव का नाम लेकर डीसी को फर्जी कॉल करने के आरोपित प्रदीप कुमार व उसके बेटे दीपक कुमार को स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट यमुनानगर द्वारा गिरफ्तार कर लिया। आरोपित दीपक को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जबकि उसके पिता प्रदीप को 1 दिन के रिमांड पर लिया गया है। एक साल से अधिक समय से पुलिस को आरोपियों की तलाश थी। 

पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि पुलिस पूछताछ में दीपक कुमार ने बताया कि पिता प्रदीप कुमार, बहन जयता व उसने मिलकर योजना बनाई कि प्रधान सचिव का नाम लेकर डीसी से बात करते हैं। जिससे जयता की नौकरी डीसी ऑफिस में लग जाएगी। जिस पर डीसी का नंबर इंटरनेट से निकाला और दीपक के पिता प्रदीप कुमार ने कॉल की और खुद को प्रधान सचिव का पीए आशीष बताते हुए डीसी ऑफिस में क्लर्क रविंद्र से बात की। वहां से कॉल डीसी को ट्रांसफर हुआ, तो प्रदीप ने डीसी को जयता की नौकरी लगाने के बारे में कहा।

 यह दी गई थी शिकायत : 
 रविंद्र कुमार डीसी कैंप कार्यालय में क्लर्क है और अंजू की कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर ड्यूटी है। डीसी के कैंप और ऑफिस पर आने वाली लैंडलाइन काल को रिसीव कर वह डीसी से बात कराते हैं। 12 मार्च को रविंद्र कुमार ड्यूटी पर था। तभी 15595450230 और 18312882683 नंबरों से काल आई। काल करने वाले ने बताया कि वह पीएमओ दिल्ली से बोल रहा है। काल करने वाले ने बताया कि प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा डीसी से बात करेंगे। इस पर उन्होंने काल ट्रांसफर कर डीसी से बात करा दी। इसके बाद 13 मार्च को डीसी कार्यालय में 1559725807 से काल आई।

कॉल करने वाले ने प्रधान सचिव के पीए आशीष कुमार के नाम से परिचय कराया। उसने जयता नाम की युवती की नौकरी डीसी कार्यालय में रखने की बात कही, लेकिन डीसी के मीटिंग में होने की वजह से बात नहीं हो पाई थी। बाद में डीसी को इस बारे में बताया तो उन्होंने नंबरों की जांच कराई। इसमें पाया गया कि तीनों नंबरों में से कोई भी पीएम के कार्यालय का नहीं है। शिकायत में कहा गया कि प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा का नाम लेकर षड्यंत्र रचा गया है। इससे उच्च अधिकारी के पद की गरिमा को ठेस पहुंची है। साथ ही डीसी पर भी पद का दुरुपयोग कर बदनाम करने की कोशिश की गई है और उन्हें नौकरी देने के बारे में अलग-अलग नंबरों से कॉल कर गुमराह किया गया है।

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