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मनरेगा जॉब कार्ड से बड़ा घोटाला, काम न करने वालों को हुआ भुगतान

संजीवनी टुडे 03-07-2020 20:54:08

मनरेगा जॉब कार्ड से बड़ा घोटाला, काम न करने वालों को हुआ भुगतान


मीरजापुर। सरकार द्वारा गरीबों को मनरेगा के तहत काम देकर रोजगार देने के उद्देश्य से लगातार प्रयास किया जा रहा है। लेकिन कई अधिकारी, कर्मचारी व जनप्रतिनिधि के फर्जीवाड़े से यह पूरी प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में आ गई है। ताजा मामला सिटी ब्लाक के अर्जुनपुर पाठक, तरकापुर ग्रामीण और वीरपुर जैसे गांव का है जहां बिना काम किए ही जॉब कार्ड होल्डर के खाते में धनराशि पहुंच गई। इन जॉब कार्ड वालों ने बताया कि उन्होंने कोई काम नहीं किया लेकिन पैसे खाते में आए तो अंगूठा लगाकर प्रधान प्रतिनिधि ने सारे पैसे ले लिए। वीरपुर गांव में तो और भी बड़ा मामला आया क्योेंकि यहां के ग्राम प्रधान खुद मनरेगा के जाब कार्ड होल्डर हैं और उनके भी खाते में मनरेगा की मजदूरी ट्रांसफर हुई। 

प्रधान को नहीं कोई जानकारी
अर्जुनपुर पाठक गांव की प्रधान कुसुम देवी हैं लेकिन जब उनसे यह पूछा गया कि मनरेगा के तहत कितना काम हुआ तो उन्होंने बताने से इंकार कर दिया और कहा कि वे कुछ भी नहीं जानतीं। उनके अनुसार वे सिर्फ अंगूठा लगाने का काम करती हैं बाकी काम तथाकथित प्रधान प्रतिनिधि अशोक शुक्ला करते हैं। इसका अंदाजा इसी से लग जाता है कि वास्तविक प्रधान तो झोपड़ी में रहती हैं लेकिन तथाकथित प्रधान की इमारत देखने लायक है। ग्राम प्रधान कुसुम देवी ने दावा किया कि बीत चार साल में वे एक बार ब्लाक पर गई थीं वह भी एमएलसी चुनाव में वोट डालने के लिए। उन्होंने कहा कि कोई भी अधिकारी उन्हें न पहचानता है और न ही आज तक कोई उनसे मिलने आया। सारा काम तथाकथित प्रधान द्वारा ही किया जाता है। 

दस फीसदी मिलती है मनरेगा की मजदूरी 
अर्जुनपुर पाठक गांव की रहने वाली गंगाजली ने बताया कि उन्होंने कभी मनरेगा के तहत काम नहीं किया है। उन्होंने स्वीकार किया कि काम न करने के बाद भी उनका जॉब कार्ड बना है, जिसे प्रधान प्रतिनिधि ने अपने पास रखा है। जब उनसे भुगतान के बाबत पूछा गया तो उन्होंने कहा कि करीब ढाई हजार रुपया आया था। प्रधान प्रतिनिधि ने अपने घर बुलाकर अंगूठा लगवाया और दो सौ रुपये देकर सारा पैसा निकाल लिया। गंगाजली ने बताया कि ऐसा पहले भी कई बार हो चुका है कि बिना काम किए खाते में पैसा आ गया और उन्होंने जाकर अंगूठा लगाया। 

कालीन का कारीगर भी मनरेगा मजदूर बना 
अर्जुनपुर गांव के निवासी वीरेंद्र कुमार मौर्य ने बताया कि वे कालीन के कारीगर हैं और आज तक कभी भी मनरेगा के तहत कोई काम नहीं किया। उन्होंने बताया कि उनका मनरेगा जॉब कार्ड बना हुआ है, जिसे तथाकथित प्रधान ने अपने पास रखा है। वीरेंद्र ने बताया कि बिना काम किए उनके खाते में एक बार दो हजार रुपये और दूसरी बार 4950 रुपये आए थे। दोनों बार प्रधान प्रतिनिधि का फोन आया कि आकर अंगूठा लगा दो। वीरेंद्र ने बताया कि दो हजार पर दो सौ रुपये और पांच हजार आने पर पांच सौ रुपये मिल जाते हैं। जिसे नाले की सफाई का दावा कागजों पर किया जा रहा है वह वर्षों से वैसा ही पड़ा है। 

प्रधानजी भी बन गए मनरेगा के श्रमिक 
सिटी ब्लाक के ही वीरपुर गांव के वास्तविक प्रधान नन्हें ने बताया कि वे प्रधान भले ही हैं लेकिन उनका इससे कोई वास्ता नहीं है। सारा काम प्रतिनिधि के तौर पर भरतलाल बिंद उर्फ भागीरथी करते हैं। ग्राम प्रधान से जब यह पूछा गया कि आपके नाम भी जाॅब कार्ड बना है और 2018 में भुगतान भी हुआ है तो उन्होंने इससे अनभिज्ञता जताई। उन्होंने कहा कि भागीरथी ने ही उन्हें चुनाव लड़वाया व जिताया था इसलिए प्रधान का सारा काम वे ही करते हैं। खुद झोपड़ीनुमा घर में गुजर बसर करने वाले वास्तविक प्रधान को यह भी नहीं पता कि उनके ग्राम पंचायत में कितने सरकारी आवास बने हैं।

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