संजीवनी टुडे

6 साल की मासूम को पंचो ने किया जात से बहिष्कृत

संजीवनी टुडे 13-07-2018 13:55:56


डेस्क। जिले में सथूर ग्राम पंचायत के हरिपुरा गांव में 6 साल की मासूम खुशबू को समाज से बहिष्कृत करने के मामले में जातीय पंचायत के 10 पंचों पर केस दर्ज हो गया है।  पुलिस-प्रशासन से घटना की जानकारी ली। 10 दिन तक बेखबर रहने और पंचों के खिलाफ अब तक कार्रवाई नहीं करने पर राज्य बाल कल्याण आयोग की अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी ने अफसरों को फटकारा। बाल संरक्षण आयोग के निर्देश और बच्ची के पिता हुकमचंद की रिपोर्ट पर 10 पंचों के खिलाफ हिंडौली पुलिस ने केस दर्ज कर लिया। मासूम को बहिष्कृत करने के मामले में जेजे एक्ट-6 (अस्पृश्यता अधिनियम 1955) व अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है। गिरफ्तारी के डर से कई पंच भूमिगत हो चुके हैं। 

 एफआईआर - 
'मैं हुकमचंद रैगर हरिपुरा का रहनेवाला हूं, मजदूरी करता हूं। दो जुलाई को राप्रावि में अन्नपूर्णा दूध योजना के तहत बच्चों को दूध पिलाया जा रहा था। 6 साल की मेरी बेटी खुशबू भी लाइन में लगी थी। इस दौरान अनजाने में बच्ची के पैर से टिटहरी का अंडा फूट गया। जिस पर समाज की पंचायत बैठी, जिसमें पंच छीतर, औंकार, दुर्गा, चतुर्भुज, रघुनाथ, कालू, मोडू, ग्यारसीलाल, रामदेव और रमेश मौजूद थे। इन्होंने मेरी बच्ची को समाज से बहिष्कृत कर दिया। बच्ची को जात में शामिल करने के लिए महादेव के स्थान पर नहलाने, गायों को हरा चारा व कबूतरों को ज्वार डलवाने, पावभर भूंगड़े, एक किलो नमकीन और शराब की बोतल की शर्त रखी। चार जुलाई की रात 9 बजे पानी की टंकी के पास पंचायत फिर बैठी। मैं और मेरी बेटी पंचों के सामने हाजिर हुए। साथ ही उनके द्वारा मंगाया गया सामान भी ले गए। पंच छीतरलाल ने उधारी के 1500 रुपए चुकाने को कहा। मैंने कहा कि एक अगस्त को पंचायत को पैसा चुका दूंगा। पंच अभी पैसा देने पर अड़ गए और बच्ची को जात में शामिल किए बगैर एकराय होकर उठकर चले गए। 11 जुलाई को मैंने प्रशासन को सूचना दी, जिस पर हिंडौली तहसीलदार और थानाधिकारी आए, पंचों को मेरे घर बुलाया, तब उन्होंने मेरी पुत्री को समाज में शामिल किया। बच्ची के हाथ से भूंगड़े, नमकीन खाए। इसी दिन रात को फिर 9 बजे समाज की पंचायत इकट्‌ठा हुई, जिसमें मुझे बुलाकर कहा गया कि तूने पंचायत की शिकायत प्रशासन-पुलिस को दी है। इस वजह से पंच तुझे हमेशा के लिए समाज से बहिष्कृत कर देंगे। और उसकी बेटी को 10 दिन तक अछूत की तरहे दूर रखे जाने को कहा।'
 

सथूर पंचायत के हरिपुरा गांव में मासूम खुशबू पर जातीय पंचायत के फरमान पर जुल्म होता रहा, 10 दिन तक अछूत बनी रही, मां को छूने और घर में प्रवेश तक की इजाजत उसे नहीं थी। खाना-पानी भी उसे अछूत की तरह ऊपर से ही डाला गया। आंगन में खाट पर अपने स्कूल बैग को गोद में लिए बैठी खुशबू को पता ही नहीं था कि उसे किस बात की सजा दी जा रही है।
राज्य बाल कल्याण आयोग की अध्यक्ष मनन च बाहर पीड़ा झेलती रही। 

पंच बोले-हुकमा ने गांव में पुलिस बुलाकर पुरे गाँव की सर्मसार किया है -
बड़े-बुजुर्गों की चली आ रही रीत निभाई है। जीव हत्या पर समाज की पंचायत कुछ दंड लगाती है। जिसे पूरा करने पर वापस जात में शामिल कर लिया जाता है। यह भी हमारे ही परिवार की बच्ची है, हम भी जानते हैं बच्ची के साथ ऐसा नहीं हो। बच्ची को महादेवजी के यहां नहलाकर उसके हाथ से पंचाें को गंगा जल पिलाने, चने, नमकीन, गायों को चारा डालने को कहा था। बच्ची का पिता शराबी है, वह पंचों से गाली-गलौच करने लगा। हम तो खुद ही बच्ची को जाति में शामिल करने वाले थे, पर हुकमा ने पुलिस बुलाकर समाज के बड़े-बुजुर्गों की इज्जत मिट्‌टी में मिला दी। समाज का सहयोग चाहिए तो साथ देना जरूरी है। -(जैसा कि आैंकार, कालू, मोहन, सभी पंच समाज ने बताया)

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