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पांडव कालीन ऐतिहासिक मंदिर जाने के लिए श्रद्धालुओं ने बनाया बांस-​बल्लियों का पुल, शासन-प्रशासन बेपरवाह

संजीवनी टुडे 25-11-2020 12:40:54

पांडव कालीन ऐतिहासिक मंदिर पर जाने के लिए दर्जनों गांव के श्रद्धालु प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर ग्रामीणों द्वारा बांस बल्लियों से नहर पर बनाए गए


गोंडा। पांडव कालीन ऐतिहासिक मंदिर पर जाने के लिए दर्जनों गांव के श्रद्धालु प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर ग्रामीणों द्वारा बांस बल्लियों से नहर पर बनाए गए पुल को पारकर जलाभिषेक करने को विवश हैं। 

इस पुल निर्माण के लिए ग्रामीणों की मांग पर कई बार सांसद व क्षेत्रीय विधायक नहर विभाग को पुल बनाने के लिए प्रस्ताव दे चुके हैं। फिर भी आज तक विभाग ने पुल बनाना मुनासिब नहीं समझा। 

चितेश्वर नाथ महादेव की स्थापना अर्जुन ने किया 
जनपद के विकास खंड इटियाथोक की ग्राम पंचायत परसिया गुदर के मजरा चितैया जोत स्थित पांडव कालीन चितेश्वर नाथ महादेव मंदिर की स्थापना पांडवों द्वारा अज्ञातवास के दौरान अर्जुन द्वारा की गई थी। 

जब भक्त मानसिक संतुलन खोया
मंदिर के पुजारी महंत गोली दास ने बताया कि करीब 200 वर्ष पूर्व अर्जुन द्वारा स्थापित यह शिवलिंग खेत में एक टीले पर दिखाई पड़ा था। उस समय पड़ोसी गांव के भटपुरवा की दयाशंकर नामक एक व्यक्ति द्वारा इस विराटतम शिवलिंग को खोदकर अपने घर ले जाने की कोशिश की गई। लेकिन शिवलिंग की अनंत गहराइयों तक वह पहुंच नहीं सके। तब उन्होंने जमीन के नीचे से ही शिवलिंग को काटना शुरू किया। इसी बीच उनका मानसिक संतुलन खराब हो गया और वह पागल हो गए। तब उनके परिजनों द्वारा वहां पर पूजा अर्चन कर ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर निर्माण का कार्य शुरू कराया गया। कुछ समय में मंदिर बनकर तैयार हो गया। तब से यहां महाशिवरात्रि, मलमास, कजली तीज, जैसे पर्व पर जनपद के कोने-कोने से श्रद्धालु जलाभिषेक करने आते हैं। 

बताया कि 20 वर्षों से श्रद्धालु बांस बल्लियों के सहारे नहरपार करते हैं। जलाभिषेक मंदिर जाने वाले मुख्य मार्ग पर करीब 20 वर्ष पूर्व सरयू नहर विभाग द्वारा नहर की खुदाई कर दी गई। तथा इस मार्ग पर आवागमन के लिए पुल का निर्माण नहीं कराया गया। 

ग्रामीण बताते हैं कि यह मार्ग सीधे चितेश्वर नाथ मंदिर होते हुए मनवर नदी के उद्गगम स्थल को जोड़ता था। आसपास के ग्रामीणों द्वारा कई बार शासन-प्रशासन से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों सांसद विधायक से पुल निर्माण की मांग करते चले आ रहे हैं। 

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार सांसद व विधायक यहां पर पुल निर्माण के लिए प्रस्ताव नहर विभाग को भेज चुके हैं। फिर भी पुल का निर्माण नहीं हुआ। निराश होकर खुद चंदा लगाकर बांस बल्लियों का पुल बनाया गया। अब कई दर्जन गांव के ग्रामीण प्रतिदिन इन्हीं बांस बल्लियों के सहारे मंदिर तक पहुंच कर जलाभिषेक करते हैं। 

ग्रामीणों ने बताया कि सैकड़ों वर्ष पूर्व संत घिराऊ दास महाराज ने अयोध्या के सरयू से जल भरकर जमीन पर लेट-लेटकर यहां पहुंचकर जलाभिषेक किया था। शुरुआती दौर में चिंताहरण के नाम से इस शिव मंदिर को जाना जाता था। अरसों पूर्व चितैया जोत गांव में स्थित होने के कारण इस मंदिर का नाम चितेश्वर नाथ महादेव मंदिर पड़ गया। 

प्रतिवर्ष ग्रामीण बनाते हैं लकड़ी का नया पुल 
भवनियापुर उपाध्याय ग्राम पंचायत के मजरा छिछुली गांव निवासी पंडित वेद प्रकाश शुक्ला ने बताया की गांव वालों के सहयोग से प्रतिवर्ष हम लोग लकड़ी का पुल बनाते हैं। कारण पानी में भीगने के कारण लकड़ियां सड़ जाती हैं। जिससे प्रतिवर्ष बदलना पड़ता है। यदि यह पुल ना तैयार किया जाए तो करीब 5 किलोमीटर गोकर्णनाथ शिवाला घूमकर मंदिर पहुंचना पड़ेगा, जबकि नहर के उस पार मंदिर है और इस इस पार कई गांव पंचायत में पड़ती है। 

विधायक बोले प्रस्ताव भेजा गया है जल्द होगा पुल का निर्माण 
मेहनौन से भाजपा विधायक विनय द्विवेदी ने बताया की मुख्य नहर पर चितेश्वर नाथ मंदिर जाने के लिए ग्रामीण काफी दिनों से पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं। विभाग को प्रस्ताव दिया गया है। जल्द ही पुल का निर्माण कराया जाएगा।

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