संजीवनी टुडे

नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रमों में बदलाव की आवश्यकता, संस्थानों और दफ्तरों में राजभाषा हो अनिवार्य

संजीवनी टुडे 14-07-2019 21:30:38

विश्वविद्यालयों, विधि महाविद्यालयों में नयी शिक्षा नीति के तहत पढ़ाई के माध्यमों में भी व्यापक बदलाव की आवश्यकता दिखायी पड़ रही है।


नई दिल्ली। विश्वविद्यालयों, विधि महाविद्यालयों में नयी शिक्षा नीति के तहत पढ़ाई के माध्यमों में भी व्यापक बदलाव की आवश्यकता दिखायी पड़ रही है। विधि क्षेत्र में ऐसे महाविद्यालयों में वहां की क्षेत्रीय भाषाओं का प्रचलन बढ़ाया जाना चाहिए। विधि के पंचवर्षीय पाठ्यक्रम को बहुभाषी बनाने की भी जरूरत है।

 ये बातें मुख्य वक्ता भारत सरकार के पूर्व एडिशनल सालीसीटर जनरल अशोक मेहता ने भारतीय भाषा अभियान पूर्वी भारत की ओर से ठाकुर हरित माधव मंदिर दारागंज में आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय अभ्यास वर्ग के समापन सत्र पर रविवार को कही।

उन्होंने कहा कि भारतीय भाषा अभियान मातृभाषा के प्रयोग के लिए जो लड़ाई लड़ रहा है, वह बहुत ही सराहनीय है। अभियान का संकल्प है कि देश भर के न्यायालयों और अन्य सरकारी कार्यालयों में मातृभाषा में काम हो, जो जरूर पूरा होगा।

राष्ट्रीय संयोजक अरूण भारद्वाज ने कहा कि वास्तव में देश के भीतर अपनी मातृभाषा का प्रयोग शत-प्रतिशत नहीं हो पा रहा है। राजभाषा का प्रयोग उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के अलावा विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों समेत सभी शिक्षण संस्थानों, सरकारी दफ्तरों में अनिवार्य किया जाना चाहिए। भारतीय भाषा अभियान इसी उद्देश्य के साथ इस मुहिम को साकार करने का प्रयास कर रही है।

मुख्य स्थायी अधिवक्ता द्वितीय डा.राजेश्वर त्रिपाठी ने भी राजभाषा के प्रयोग एवं उसके प्रसार पर जोर दिया। पंचम सत्र में आगामी योजना एवं खुले सत्र पर देश भर के तमाम प्रांतों से आये बुद्धिजीवियों ने चर्चा की।

प्लीज सब्सक्राइब यूट्यूब बटन

इस अवसर पर कई प्रांतों से अभ्यास वर्ग में प्रतिभाग करने आये स्वयंसेवकों को भी अभ्यास वर्ग में हिन्दी के प्रचार प्रसार पर विशेष बल दिया गया। कार्यक्रम का संचालन सह संयोजक अर्चना शर्मा ने एवं धन्यवाद ज्ञापन उ.प्र के संयोजक राघवेन्द्र शुक्ल ने किया।

गोवर्मेन्ट एप्रूव्ड प्लाट व फार्महाउस मात्र रु. 2600/- वर्गगज, टोंक रोड (NH-12) जयपुर में 9314166166

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल पर जुड़ें

More From career

Trending Now
Recommended