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UGC गाइडलाइंस का मामला: अंतिम वर्ष की परीक्षाओं पर फैसला जल्द, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू

संजीवनी टुडे 14-08-2020 12:24:39

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली खण्डपीठ यूजीसी गाइडलाइंस मामले की सुनवाई कर रही है। इस मामले में यूजीसी एवं सरकार का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता रख रहे हैं


नई दिल्ली। कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रुजुएशन की अंतिम वर्ष या अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं अनिवार्य रूप से कराए जाने के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के निर्देश पर आज सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई शुरू हो गयी, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली खण्डपीठ यूजीसी गाइडलाइंस मामले की सुनवाई कर रही है। इस मामले में यूजीसी एवं सरकार का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता रख रहे हैं, जबकि छात्रों का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी रख रहे हैं। सुनवाई के आरंभ में उन्होंने कहा कि जब संस्थान कक्षाओं का आयोजन नहीं कर पा रहे हैं तो परीक्षाएं कैसे आयोजित हो पाएंगे।

क्या आज आएगा फैसला?

जानकारी अनुसार बता दें की अंतिम वर्ष या सेमेस्टर की परीक्षाओं को लेकर क्या आज उच्चतम न्यायालय आज कोई फैसला आएगा? इस प्रश्न का उत्तर आज शायद आज मिल जाए, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में लास्ट सेमेस्टर वर्ष या ईयर की परीक्षाओं को 30 सितंबर तक करा लेने के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के सर्कुलर को चुनौती देनी वाली याचिका पर आज, 14 अगस्त 2020 को सुनवाई होगी। इससे पहले 10 अगस्त को इसी मामले की हुई सुनवाई के दौरान 14 अगस्त यानि आज फिर से सुनवाई के लिए टाल दिया गया था।

बता दें की पिछली सुनवाई के दौरान उत्ततम न्यायालय ने यूजीसी एवं सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से सुनवाई के दौरान पूछा था कि राज्य आपदा अधिनियम (डीएमए) क्या यूजीसी के दिशा-निर्देशों को प्रभावित कर सकते हैं? इस प्रश्न के लिए सरकार का पत्र रखने हेतु सॉलिसिटर जनरल ने समय मांगा था, जिसके बाद खण्डपीठ ने मामले की सुनवाई 14 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी है।

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उधर प्राप्त जानकारी के मुताबिक केंद्र गृह मंत्रालय (एमएचए) द्वारा यूजीसी के पक्ष में प्रतिक्रिया दाखिल की गयी है। जिसके अनुसार एमएचए द्वारा अनलॉक 3 के लिए जारी दिशा-निर्देशों के बावजूद यूजीसी द्वारा अंतिम वर्ष या सेमेस्टर की परीक्षाओं को लेकर जारी सर्कुलर पर अमल किया जा सकता है।
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सरकार और यूजीसी के पक्ष जहां अंतिम वर्ष या सेमेस्टर की परीक्षाओं पर फैसला आज होने की उम्मीद की जा रही है, तो वहीं दूसरी ओर देश भर के छात्रों, छात्र-संगठनों, अभिवावकों और राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा यूजीसी सर्कुलर का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। सोशल मीडिया पर यूजीसी के विरोध में कई टॉपिक्स एवं डिस्कशंस ट्रेंड कर रहे हैं। हालांकि, आज इन सभी पर विराम लगने की उम्मीद है।

बता दें के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देश भर के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, डीम्ड विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में विभिन्न स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के अंतिम वर्ष या सेमेस्टर की परीक्षाओं को अनिवार्य रूप से 30 सितंबर 2020 तक करा लिये जाने से सम्बन्धित सर्कुलर 6 जुलाई को जारी किया गया था। 

कोविड-19 के बीच परीक्षाओं को कराने का विरोध तभी से किया जा रहा है और इसी सर्कुलर को देश भर के अलग-अलग संस्थानों के 31 छात्रों ने मिलकर उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी। इस याचिका में मांग की गयी है कि अंतिम वर्ष या सेमेस्टर की परीक्षाओं को रद्द किया जाना चाहिए और छात्रों के रिजल्ट उनके इंटर्नल एसेसमेंट या पास्ट पर्फार्मेंस के आधार पर तैयार किये जाने चाहिए।

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