संजीवनी टुडे

अध्यापकों व किताबों के मामले का हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, सरकार से मांगा जवाब

संजीवनी टुडे 05-08-2019 18:35:59

पिथौरागढ़ जनपद में किताबों व अध्यापकों के आंदोलन ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय की संवेदना को झकझोर दिया है।


नैनीताल। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद में किताबों व अध्यापकों के आंदोलन ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय की संवेदना को झकझोर दिया है। उच्च न्यायालय ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया और प्रकरण की सुनवाई करते हुए शिक्षा सचिव के साथ-साथ पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि दो सप्ताह में मामले पर विस्तृत जवाब दे। उच्च न्यायालय ने समाचार पत्रों की खबरों को जनहित याचिका का आधार बनाया है और इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। मामले की सुनवाई न्यायाधीश सुधांशु धूलिया और आलोक कुमार वर्मा की पीठ में हुई।

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मुख्य स्थायी अधिवक्ता परेश त्रिपाठी ने कहा कि कोर्ट ने शिक्षा सचिव से पूछा है कि जनपद में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक, हाईस्कूल व इंटरमीडिएट कालेजों में अध्यापकों के कितने पद स्वीकृत हैं और कितने रिक्त चले आ रहे हैं? सरकार रिक्त पदों को भरने के लिये क्या कदम उठा रही है? कोर्ट ने अद्यतन पाठ्यक्रमों की पुस्तकों के मामले में भी जानकारी मांगी है। उल्लेखनीय है कि अध्यापकों व पुस्तकों की कमी के खिलाफ पिथौरागढ़ जनपद के छात्र मध्य जून से आंदोलनरत हैं। वे ‘शिक्षक-पुस्तक आंदोलन’ के बैनर के तहत विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यह आंदोलन सबसे पहले पिथौरागढ़ मुख्यालय में जून में लक्ष्मण सिंह महर स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शुरू हुआ।

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छात्रों का यह आंदोलन 38 दिनों तक चला और फिलहाल कुछ समय के लिये स्थगित है लेकिन इसी दौरान किताबों व शिक्षकों को लेकर आंदोलन प्रदेश के अन्य हिस्सों में फैल गया और स्कूली छात्र भी विरोध प्रदर्शन में कूद पड़े।

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