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CoronaVirus Effect: स्कूलों में 1320 शैक्षणिक घंटों की जगह अब 600 घंटे पढ़ाई की याेजना बना रही है केंद्र सरकार

संजीवनी टुडे 30-05-2020 09:21:54

मानव संसाधन विकास मंत्रालय एनसीईआरटी के सहयोग से सत्र 2020-21 के लिए नई गाइडलाइन जारी करने पर कवायद कर रहा है।


नई दिल्ली। केंद्र सरकार देश की स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव  लाने की तैयारी कर रही है। वर्क फ्रॉम होम की तर्ज पर ही सरकार स्टडी फ्रॉम होम के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इस प्रस्ताव के तहत पूरे अकादमिक सत्र में केवल 100 दिन स्‍कूल खुलेगा। वहीं 50 फीसदी कक्षाएं घर से आयोजित की जाएंगी।

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मानव संसाधन विकास मंत्रालय स्कूलों के मौजूदा 220 शिक्षणदिवस या स्कूलों में 1,320 शिक्षण घंटे के मॉडल को 'स्कूल और घर में मिली-जुली पढ़ाई से बदलने की तैयारी में है। नए प्रस्तावित मॉडल के तहत स्कूलों में पढऩे के समय को 100 दिन या 600 घंटे तक कम करके इस समय को 'घरों पर सक्रिय पढ़ाई में बदल दिया जाएगा। वहीं स्कूलों में भी इतने ही समय यानी 100 दिन या 600 घंटे पढ़ाई होगी। बचे हुए 120 घंटे या 20 दिन (हर माह दो दिन) विद्यार्थियों के भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए स्कूलों या घरों में डॉक्टरों, काउंसलर्स आदि के लिए तय कर दिए जाएंगे।

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ऐसे में बच्चों का कोरोना संक्रमण से बचाव को ध्यान में रखते हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय एनसीईआरटी के सहयोग से सत्र 2020-21 के लिए नई गाइडलाइन जारी करने पर कवायद कर रहा है। इसमें विद्यार्थी हित को देखते हुए शिक्षण व्यवस्था व प्रबंधन में कई परिवर्तन किए जा रहें हैं।

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दो या तीन पारियों में लगेंगे स्कूल
फिजिकल डिस्टेंसिंग की पालना और अत्यधिक भीड़ से विद्यार्थियों के बचाव के लिए एमएचआरडी की और से एक बार में 30 से 50 प्रतिशत बच्चों को ही स्कूल बुलाए जाने पर मशक्कत की जा रही है, जिससे अलग-अलग शिफ्ट में बच्चों को बुलाया जाना प्रस्तावित है।

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ऐसी हो सकती है योजना-
कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को सप्ताह में दो बार कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों को सप्ताह में दो या चार बार कक्षा 9 से 12 तक के बच्चों को चार या पांच बार बुलाया जा सकता है। पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों की आयु 6 से 10 वर्ष होने के कारण शुरुआती दिनों में इन विद्यार्थियों को विद्यालय आने से पूर्ण छूट भी मिल सकती है।

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मूल्यांकन प्रक्रिया में भी परिवर्तन संभव-
विद्यालयों में पढ़ाई के साथ साथ बच्चों के अधिगम स्तर की जांच के लिए समय-समय पर विभिन्न अंतरालों पर विभिन्न परख, अर्द्धवार्षिक व वार्षिक परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है। कोरोना वायरस के दृष्टिगत सत्र 2020- 21 में परीक्षा पद्धति और मूल्यांकन प्रक्रिया में भी काफी परिवर्तन होना संभावित है। इसमें कुछ परीक्षाओं में छूट या समयावधि में कटौती को शामिल किया जा सकता है।

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बता दें कि पूरे सत्र में 220 वर्किंग डेज में 1320 घंटे पढ़ाई होती है। नए मॉडल के तहत इस सत्र को 100 दिन करने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ 50 फीसदी पढ़ाई बच्चे घर से करेंगे। हालांकि फिलहाल ये मामला प्रस्‍ताव तक सीमित है, पर मंत्रालय इस पर विचार करते हुए तमाम परिस्थितियों की समीक्षा कर रहा है। पर इसमें कोई शक नहीं है कि कोरोना वायरस के कारण बनीं स्थिति ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को स्‍कूलों में पढ़ाई के मॉडल में आमूलचूल बदलाव पर विचार करने पर मजबूर कर दिया है।

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