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लोकल के लिए वोकल/ प्रवासी मजदूरों और श्रमिकों के लिए ई-रिक्शा स्वरोजगार की दिशा में एक बेहतर विकल्प

संजीवनी टुडे 27-05-2020 11:31:21

इससे बेरोजगारों और लॉकडाउन की कठिन परिस्थितियों में अपनी जॉब खो चुके लोगों में एक नई उम्मीद का संचार होगा।


अलवर। देश मे आत्मनिर्भरता बढ़ाने और स्वरोजगार मिशन में तेजी लाने के उद्देश्य से, अलवर की स्टार्टअप MSME यूनिट 3S Industries द्वारा आधुनिक तकनीक से निर्मित बैटरी चालित वाहन भारत ई-रिक्शा / ई-कार्ट पूर्णतः स्वदेशी उत्पाद है। कंपनी नेे अपने प्रोडक्टस की सर्विसेज को गाँव और तहसील स्तरों पर बढ़ाने का प्लान किया हैं, जिससे गाँव और तहसीलों में न केवल लोकल ट्रांसपोर्ट में सहायता मिलेंगी, बल्कि लॉकडाउन के दौरान बाहर से आये प्रवासी मजदूरों और श्रमिकों को स्वरोजगार को अवसर प्राप्त होगा। 

इससे बेरोजगारों और लॉकडाउन की कठिन परिस्थितियों में अपनी जॉब खो चुके लोगों में एक नई उम्मीद का संचार होगा। विभिन्न निजी फाइनेंस कंपनियों और सरकारी बैंको द्वारा ई-रिक्शा खरीदने के लिए ऋण दिया जा रहा हैं जिससे केंद्र सरकार के आत्मनिर्भरता मिशन को बल मिला हैं। 

भारत ई-रिक्शा एक नजर में-
भारत ई-रिक्शा ने 16 जून 2019 को अपना पहला सेल्स आउटलेट का शुभारंभ अलवर में साहब जोहरा में किया था, तत्पश्चात सितंबर माह में भरतपुर में सेवर रोड पर दूसरा सेल्स आउटलेट का उद्घाटन किया गया। बेहतर डिजाइन, गुणवत्तापूरक प्रोडक्टस के कारण मात्र 9 महीने के मामूली समय मे ही 90 से अधिक ई-रिक्शा बेचकर एक नया कीर्तिमान बनाया हैं, एवम अपने शिष्ट व्यवहार और बेहतर आफ्टर सेल्स सर्विस से 100% ग्राहक संतुष्टि के लक्ष्य को भी प्राप्त किया हैं।

लॉकडाउन के दौरान फल और सब्जियों को  घरों तक पहुँचाने में सहयोग-
लॉकडाउन के समय अत्यावश्यक वस्तुएं जैसे फल, सब्जी और घरों की सामान्य जरूरतों की आपूर्ति के लिए के लिए ई-रिक्शा को ही माध्यम बनाया गया। अलवर सब्जी मंडी प्रशासन द्वारा ई-रिक्शा को स्पेशल अनुमति देकर शहर की जरूरतों को पूरा करने के लिए अवसर दिया और जिससे ई-रिक्शा चालकों को न केवल अपनी वित्तीय स्थिति को संभालने में मदद मिली बल्कि देशहित में आंशिक कोरोना वॉरिअर बनने का भी मौका मिला ।

क्यों हैं बेहतर विकल्प-

  • भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त
  • RTO में रजिस्ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध
  • बैटरी चालित, मात्र 4-5 यूनिट बिजली प्रतिदिन
  • पेट्रोल डीजल का खर्चा नहीं
  • खर्चा कम चले ज्यादा, 1 चार्ज में लगभग 100-120 कि. मी. रनिंग
  • प्रदूषण रहित, पर्यावरण के अनुकुल  
  • कॉम्पैक्ट साइज होने के कारण छोटी और तंग गलियों में आसानी 
  • आसान मासिक किस्तों में भी उपलब्ध
  • आवश्कतानुसार माल वाहक के रूप में उपयोग

कम्पनी का कहना है, "वर्तमान परिस्थितियों में सरकार ने भी लॉकडाउन के दौरान फैली निराशा और बेरोजगारी को दूर  करने के उद्देश्य से ही विशेष राहत पैकेज सभी वर्गों के लिए घोषित किये हैं । ई-रिक्शा भी ऐसी स्थिति में स्वरोजगार और आत्मनिर्भर होने का एक बेहतर विकल्प हो सकता हैं । केंद्र सरकार की मुद्रा योजना के तहत विभिन्न ग्रामीण और सरकारी बैंकों के द्वारा कम से कम दर पर ई रिक्शा खरीदने के लिए ऋण उपलब्ध कराया जा रहा हैं।" 

भारत ई-रिक्शा फाउंडर ने कहा- "कंपनी द्वारा भी एक निजी फाइनैंस कंपनी की सहायता से अलवर शहर के 15-20 कि. मी. के दायरे में आसान मासिक किस्तों पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा हैं । गांव से शहर आकर रिक्शा चलाने वालों के लिए फ्री पार्किंग के साथ में चार्जिंग स्टेशन की भी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही हैं । जल्द ही लीथियम आयन बैटरी युक्त ई-रिक्शा लांच किया जायेगा जिससे ग्राहकों को एक और विकल्प दिया जा सके।"

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