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रेलवे ने रचा इतिहास- लॉकडाउन के बावजूद CLW ने बनाएं 150 रेल इंजन

संजीवनी टुडे 15-09-2020 14:08:01

कोरोना वायरस महामारी के मध्य भारतीय रेलवे के चितरंजन लोकोमोटिव वर्कशॉप (CLW) ने बड़ी उपलब्धि प्राप्त की है।


नई दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी के मध्य भारतीय रेलवे के चितरंजन लोकोमोटिव वर्कशॉप (CLW) ने बड़ी उपलब्धि प्राप्त की है। वर्कशॉप ने वित्तीय वर्ष 2020-21 में अब तक 150 रेल इंजनों का उत्पादन पूर्ण कर लिया है। वर्कशॉप की दनकुनी स्थित यूनिट से 150वें इंजन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। अप्रैल एवं मई में पूरी तरह से लॉकडाउन और जुलाई, अगस्त व सितंबर में आंशिक लॉकडाउन के बावजूद ये प्रोडक्शन किया गया है। 

अब तक तैयार हो चुके हैं 10 हजार इंजन
भारतीय रेलवे के चितरंजन रेल इंजन फैक्ट्री ने भारत की सेवा करते हुए 70 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। इस कारखाने ने स्टीम इंजन से शुरुआत कर डीजल एवं अब इलेक्ट्रिक इंजन को मिलाकर कुल 10,000 से अधिक रेलवे इंजन तैयार करने के कार्य पूरा किया जा चुका है।  

बता दें कि साल 1948 से ये रेल फैक्ट्री लगातार इंजन तैयार कर रही है। साल 2019-20 में कुल 431 इंजन बनाकर CLW ने वर्ल्ड रिकॉर्ड भी तैयार किया है। चितरंजन लोकोमोटिव में डब्लूएपी 7 इंजन भी तैयार किया जा रहा है ये इंजन हेड ऑन जनरेशन तकनीक पर चलता है। 

इसके चलते इस इंजन में बिजली की खपत बहुत कम हो जाती है। इस इंजन को राजधानी एवं शाताब्दी जैसी हाई स्पीड गाड़ियों में चलाया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, चितरंजन लोकोमोटिव वर्कशॉप में कुछ ही दिन पहले  200 किलोमीटर प्रति घंटा तक की गति से चलने की क्षमता वाले इंजन डब्लूएपी 5 भी तैयार किया गया है।

इस इंजन के जरिए पुश एंड पुल तकनीकी की सहायता से भी ट्रेनों को चलाया जा रहा है। इस फैक्ट्री में 6000 एचपी से लेकर 9000 एचपी तक के इंजन को तैयार किया गया है। 9000 एचपी के इंजन को 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक की गति से चलाया जा चुका है। 

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