संजीवनी टुडे

कागज से जुड़े मिथकों को दूर करने के लिए कागज दिवस का आयोजन

संजीवनी टुडे 07-08-2019 19:08:46

आह्वान और आईपीएमए के समर्थन से कागत दिवस का आयोजन किया गया है।


नई दिल्ली। इंडियन पेपर मैन्युपॅैक्चरर्स एसोसियेशन (आईपीएमए) ने कहा है कि कागज उद्योग को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है कि वह वनों को नुकसान पहुंचा रहा है जबकि हकीकत यह है कि इस उद्योग ने देश में 9 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में पौधारोपण को प्राेत्साहित किया है। कागज उद्योग से जुड़े मिथक के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए फेडरेशन ऑफ पेपर ट्रेडर्स एसोसियेशन ऑफ इंडिया (एफपीटीए) के आह्वान और आईपीएमए के समर्थन से कागत दिवस का आयोजन किया गया है। 

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आईपीएमए के अध्यक्ष ए एस मेहता ने कहा कि यह एक भ्रम है कि कागज उद्योग वनों को नुकसान पहुंचाता है। जबकि सत्य इसके विपरीत है। कागज उद्योग कागज के लिए उपयुक्त पौधारोपण के जरिये देश में पेड़ों की संख्या बढ़ाने में योगदान कर रहा है। अब तक कागज उद्योग ने देश में 9 लाख हेक्टेयर से ज्यादा अपेक्षाकृत कम उपजाऊ जमीन पर पौधारोपण को प्रोत्साहित किया है।

उन्होंने किसानों की आय दोगुनी करने के सरकार के लक्ष्य पर जोर देते हुए कहा कि कागज उद्योग द्वारा समर्थित कृषि वानिकी से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। लगातार शोध एवं अनुसंधान के जरिये कागज उद्योग ने यूकेलिप्टस और अन्य कागज के लिए उपयुक्त पेड़ों की ऐसी प्रजातियां विकसित कर ली हैं, जो 3 साल में ही तैयार हो जाती हैं। वहीं पहले ऐसे पेड़ों को तैयार होने में 5-7 साल लग जाता था। इसलिए कागज उद्योग के लिए पौधे लगाकर किसानों की आय को और जल्दी बढ़ाया जा सकता है।

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आईपीएमए के उपाध्यक्ष जे पी नारायण ने कहा कि भारत में कागज के लिए उपयुक्त वृक्षों की कमी है, जिस कारण से ऐसे पेड़ों को लगाने के लिए पर्याप्त जमीन होने के बावजूद यहां कागज उद्योग के समक्ष कच्चे माल की कमी का खतरा पैदा हो रहा है। उन्होंने कम उपजाऊ सरकारी जमीनों पर ऐसे पेड़ों को लगाने के लिए सरकार, उद्योग और स्थानीय लोगों के बीच एक त्रिपक्षीय गठजोड़ का प्रस्ताव करते हुये कहा कि ऐसा करना सभी के लिए फायदेमंद होगा। एक ओर इससे जहां स्थानीय लोगों और गरीब किसानों को सामाजिक-आर्थिक रूप से ऊपर उठने का मौका मिलेगा, वहीं सरकार को भी खाली पड़ी जमीनों से राजस्व की प्राप्ति हो सकेगी। ऐसा होने से कागज उद्योग के सामने कच्चे माल का संकट भी नहीं रह जाएगा।

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