संजीवनी टुडे

दिवाली पर 30 हजार करोड़ का व्यापार, ठोस ई कॉमर्स पॉलिसी बनाने की मांग

संजीवनी टुडे 08-11-2018 14:41:52


मुंबई। इस साल दिवाली के त्योहारी मौसम में देश भर में बाज़ारों में रौनक देखी गई। गोवर्धन पूजा और विश्वकर्मा जयंती के कारण गुरुवार को शेयर बाजार बंद है। हालांकि दिवाली के दूसरे दिन मुंबई, दिल्ली सहित देश भर में व्यापारियों और लघु उद्यमियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे और कोई कारोबारी गतिविधि नहीं हुई। इस दिवाली पर एक अनुमान के अनुसार, 30 हजार करोड़ रुपए का व्यापार हुआ है। इस साल व्यापार में लगभग 15 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। हालाकिं ऑफलाइन कारोबार की तुलना में ऑनलाइन बिक्री में तेजी देखी गई, जिसके कारण रिटेलर और खुदरा व्यापारियों को काफी घाटा हुआ है। ऑनलाइन कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए ठोस ई कॉमर्स पॉलिसी बनाने की मांग की गई है। ई कॉमर्स के लिए एक रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन भी करने की मांग हो रही है। 

कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडेडर्स (कैट) की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले चार साल से दिवाली पर मंदी का असर देखा जा रहा था, लेकिन इस साल व्यापारिक मंडियों और खुदरा सेक्टर्स का माहौल बदला दिखाई दिया। पिछले वर्ष के मुकाबले देश भर में व्यापारियों ने अच्छा व्यापार किया है। नवरात्रि से शुरू हुए त्योहारी सीजन अगले वर्ष मार्च तक रहेगा। इस त्योहारी सीजन में व्यापारियों को बेहतर व्यापार होने की उम्मीद बंधी है। पिछले साल के मुकाबले इस साल व्यापार में लगभग 15 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। हालांकि बेहतर छूट और ऑफलाइन कीमतों की तुलना में काफी कमी का ऑफर दिए जाने से ऑनलाइन बिक्री में तेजी आई है। इससे रिटेलर्स व्यापारियों को काफी घाटा भी हुआ है। एक मोटे अनुमान के अनुसार इस वर्ष दिवाली पर लगभग 30 हजार करोड़ का व्यापार हुआ है, जबकि पिछले साल लगभग 25 हजार करोड़ रुपए का कारोबार हुआ था। दैनिक उपभोग की वस्तुएं, इलेक्ट्रॉनिक्स, बिजली का सामान, सजावटी सामान, गिफ्ट आइटम्स, ड्राई फ्रूट, रेडीमेड गारमेंट्स, कंप्यूटर एवं कंप्यूटर का सामान, हार्डवेयर, खाद्य वस्तुओं का व्यापार काफी अच्छा रहा है। 

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कैट की ओर से कहा गया कि ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म ने देश के रिटेलर्स और छोटे व्यापारियों पर बुरा असर डाला है। ई-कॉमर्स से देश में बिना किसी सरकारी लगाम के ही कारोबार चल रहा है, जिसके कारण व्यापारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। फिलहाल देश में ई कॉमर्स को लेकर कोई ठोस कानून नहीं है, जिसका ऑनलाइन कंपनियां फायदा उठा रही हैं। बाज़ार से प्रतिस्पर्धा को ख़त्म करने और अपना एकाधिकार जमाने के लिए अपनी मनमर्जी से लागत से भी कम मूल्य पर माल बेच रही हैं। यह एफडीआई नीति के खिलाफ है। खुले आम लागत से कम दाम पर माल बेचने के बावजूद भी ऑनलाइन कंपनियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। कैट की ओर से ऑनलाइन कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए ठोस ई कॉमर्स पॉलिसी बनाने की मांग की गई है। ई कॉमर्स के लिए एक रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन भी करने की मांग हो रही है। 

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