संजीवनी टुडे

वोट बहिष्कार के पांच साल बाद भी महादलित इलाके में नदी पर नहीं बन सका पुल

संजीवनी टुडे 11-08-2020 12:07:29

पिछले विधानसभा चुनाव में चंद्रभागा नदी पर पुल नहीं तो वोट नहीं का आह्वान कर मतदान का बहिष्कार करने वाले महादलित बस्ती के ग्रामीणों की बहुप्रतीक्षित मांग पांच साल में भी नहीं पूरी हुई है ।


बेगूसराय। पिछले विधानसभा चुनाव में चंद्रभागा नदी पर 'पुल नहीं तो वोट नहीं' का आह्वान कर मतदान का बहिष्कार करने वाले महादलित बस्ती के ग्रामीणों की बहुप्रतीक्षित मांग पांच साल में भी नहीं पूरी हुई है ।एकबार फिर विधानसभा चुनाव की डुगडुगी बजने वाली है। यह चुनाव में आश्वासन के ढेर पर जनता के वोट ग्रसने वाले नेताओं का क्षेत्र की समस्या को भुला देने का एक उदाहरण बन गया है। ग्रामीण निशिहारा और ब्रह्मदेव नगर के बीच चंद्रभागा नदी पर पुल बनने की मांग कर रहे हैं। मामला अनुसूचित जाति -जनजाति के लिए सुरक्षित बखरी विधानसभा क्षेत्र का है। अत्यंत पिछड़ा, गरीबों, मजदूरों और दलितों का यह इलाका आज भी विकास से कोसों दूर है और यहां की आवाज अंग्रेजी शासन की तरह दबा दी जाती है। 

महादलित इलाका चकचनरपत पंचायत और राटन पंचायत के गांव निशिहारा, चकचनरपत, सुग्गा, मुसहरी, बभाईन, ब्रह्मदेव नगर के 20 हजार से अधिक लोग चंद्रभागा नदी में भंवरा और चचरी पुल बना कर आते-जाते हैं। लेकिन बरसात के मौसम सावन -भादो में ग्रामीणों का आवागमन बाधित हो जाता है। तब लोगों का सहारा छोटी नाव या रेलवे का परित्यक्त ढनढनिया पुल होता है जिस पर जान जोखिम में डालकर लोग नदी पार करते हैं। राटन पंचायत स्थित बभाईन एवं ब्रह्मदेव नगर के ग्रामीणों ने बताया कि चुनाव के समय चंद्रभागा नदी पर पुल का निर्माण मुद्दा बनकर रह जाता है। जनसहयोग से भंवरा पुल बनाया गया था, जो नदी में विलीन हो गया, चचरी पुल भी टूटकर खत्म हो गया। 

ग्रामीण मंटुन पासवान, बौएलाल महतो, गंगाराम सदा, कारो देवी समेत अन्य का कहना है कि जब चुनाव का समय आता है, तो जनप्रतिनिधि झूठे वादे कर चले जाते हैं। चुनाव जीतने के बाद जन समस्या से उन्हें कोई वास्ता नहीं रह जाता है। बाढ़ के समय जीना दुर्लभ हो जाता है, रतजगा कर समय बिताते हैं। अपने को विकास पुत्र कहने वाले स्थानीय विधायक उपेन्द्र पासवान ने कई बार घोषणा की लेकिन उन्हें पुल बनाने से कोई मतलब नहीं है। अपनी विकास योजना का पैसा सिर्फ स्कूलों का गेट बनाने में खर्च कर रहे हैं, जबकि उसके लिए शिक्षा विभाग के पास खुद की योजनाएं हैं। विधायक ने जितना पैसा स्कूलों का गेट बना कर अपना नाम लिखाने में खर्च किया है उससे कम में यहां पुल बनकर तैयार हो सकता है। 

ग्रामीणों का कहना है कि 2015 में वोट का बहिष्कार किया था तो अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने शीघ्र पुल बनवाने का आश्वासन दिया था। लेकिन पांच साल में पुल बनाने की प्रक्रिया भी नहीं शुरू की जा सकी है। एक बार फिर  सरकार और प्रशासन से यथाशीघ्र पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं। हमारी समस्या का समाधान नहीं होता है तो लोग आंदोलन के लिए विवश हो जाएंगे।

यह खबर भी पढ़े: राहुल-प्रियंका से मिलकर भावुक हुए सचिन पायलट, कहा- पार्टी हमें पद देती है तो वापस भी ले सकती है...

यह खबर भी पढ़े: Sushant Case: कोर्ट में रिया ने की मीडिया ट्रायल पर रोक लगाने की गुजारिश, सपोर्ट में उतरी स्वरा भास्कर, बोलीं- फर्जी न्यूज़ फैलाने वालों और साजिशों...

ऐसी ही ताजा खबरों व अपडेट के लिए डाउनलोड करे संजीवनी टुडे एप

More From bihar

Trending Now
Recommended