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ताहिरा की शौर्य-कथा, अध्याय 7 (भाग-1), 'ताहिरा का बक्सा'

संजीवनी टुडे 21-10-2019 01:05:00

ताहिरा के बक्से के सामने खड़ी मेयर की पत्नी सोच रही थी।


डेस्क। मेयर के पुत्र ने घर जाकर अपनी माता को जो कुछ भी घटा था उसको बताया। बाद में मेयर की पत्नी ने उस पर क्या बीता उसके विषय में बताते हुये कहा, "मैंने गर्म-गर्म आँसू बहाते हुये विलाप किया जब मेरे पुत्र ने उस दुखद कथा के विषय में बताया।

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ताहिरा के बक्से के सामने खड़ी मेयर की पत्नी सोच रही थी कि “ऐसा क्या था जिसने इतनी महान महिला को धन-संपत्ति और उस सम्मान को जिससे वह घिरी हुई थी, त्याग देने के लिये और शिराज के एक अनजान युवक के साथ स्वयं को जोड़ने के लिये बाध्य किया होगा? वह कौन सी गुप्त शक्ति होगी जिसने उनको अपने घर, अपने लोगों तक का मोह भंग कर उनको राह दिखाई होगी? " 

इस प्रकार ताहिरा के शौर्य भरे जीवन का अंत हुआ। बाब के महान शिष्यों में वह एक थीं। शहीद होने वाली वह प्रथम महिला थीं। जैसे ही उनकी मृत्यु का क्षण आया, वह उनकी ओर मुड़कर बोले जिसकी कैद में वह थीं, 'तुम जितनी जल्दी चाहो मुझको मार सकते हो, लेकिन महिलाओं के उत्थान को तुम नहीं रोक सकते।" 

उनका कार्यकाल चकाचौंध से भरा हुआ, संक्षिप्त, दुखद और घटनापूर्ण था। ताहिरा की प्रसिद्धि भी उसी विलक्षण तेजी से फैली जिस प्रकार से बाब की प्रसिद्धि फैली, जो उनकी प्रेरणा के सीधे स्रोत थे। 

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लॉर्ड कर्जन फारस पर अपनी पुस्तक में स्पष्ट रूप से लिखते हैं, "ऐसे सिद्धांत की शक्ति कम नहीं होगी जो अपने अनुयायियों में आत्मबलिदान की ऐसी दुर्लभ और सुंदर चेतना को जगा सके।" 

प्रसिद्ध एक्ट्रेस साराह बर्नहार्ट ने नाटककार कैटुल्ले मैंडेस को ताहिरा के जीवन का एक नाट्य रूपांतरण लिखने का आग्रह किया। नाटककार ने स्वयं उनको फारसी “जोआन ऑफ आर्क " कहा। 

बाब और उनके शिष्यों के विषय में लिखने वाले एक प्रसिद्ध कमेंटेटर ने इन शब्दों से ताहिरा को अपनी श्रद्धाजलि अर्पित की "विज्ञान का और सौंदर्य का एक चमत्कार लॉर्ड कर्जन यह प्रमाणित करते हैं कि वह एक प्यारी लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण कवयित्री आधुनिक इतिहास की सर्वाधिक प्रभावकारी वृतांत हैं।" 

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ब्रिटेन के पूर्वविद् प्रोफेसर इ. जी. ब्राउन ने कहा यदि बाब के धर्म में महानता का कोई अन्य दावा नहीं होता तो सिवा इसके कि इसने ताहिरा के जैसी एक नायिका दी तो यही दावा (मात्र उसकी महानता को प्रमाणित करने के लिए ) काफी होता। 

उन्होंने लिखा, "ऐसी महिला का किसी भी देश, किसी भी युग में प्रकट होना एक दुर्लभ घटना है, नहीं; करीब-करीब चमत्कार है।" 
फ्रांसिसी राजनयिक काम्टे डी गोंबिनीय लिखते हैं: “उनकी अपनी विलक्षणता के लिये प्रत्येक व्यक्ति को सफाई देनी पड़ी।" 

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एक प्रसिद्ध अंग्रेजी पादरी डॉ . टी . के . चेइने ने लिखा, 'फारस में सामाजिक सुधार का अध्याय खोलने का श्रेय उसी संभ्रात महिला को जाता है।“ 
सर वेलेंटाइन चिरोल लिखते है, "कोई भी याद इतना गहरा सम्मान नहीं जगाती, न ही इतना उत्साह बढ़ाती है जितना उनकी याद और जो प्रभाव उन्होंने अपने समय में डाला था अभी तक नारी जाति पर है।" 
प्रसिद्ध तुर्की कवि सुलेमान नजीम खुशी से कहते हैं, "हे ताहिरा , तुम हजारों नसीरुद्दीन शाह के बराबर हो।” 

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ऑस्ट्रिया के एक राजा की माता कहती है, 'स्त्रीत्व की महानतम आदर्श–ताहिरा रही हैं। उनके जीवन का अनुसरण करने वाले इतिहासकारों की एक भेदती टिप्पणी है“ 

ताहिरा के संक्षिप्त जीवन को देखते हुये, कोई भी उसके जोशीले उत्साह और पूर्ण असांसारिकता को देखकर स्तब्ध रह जाता था। यह संसार वास्तव में उसके लिये मुट्ठी भर धूल की तरह था। 

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ताहिरा बाब के धर्म के प्रति अपनी स्वीकृति के प्रथम क्षण से , अपनी मृत्यु के अंतिम क्षण तक वफादार थी। क्षण मात्र के लिये भी वह दृढ विश्वास से पीछे नहीं हटीं जो उन्होंने शीराज में प्रारंभिक काल में उनको भेजे गये अपने संदेश में व्यक्त किया था और फिर ये शब्द कहे थे, "क्या मैं तुम्हारा स्वामी नहीं हूँ? और तब हम उत्तर देंगे तुम्ही हो।

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