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ताहिरा की शौर्य-कथा, अध्याय 6 (भाग-1), 'मेयर की पत्नी का विवरण'

संजीवनी टुडे 19-10-2019 07:35:19

ताहिरा की हत्या से पूर्व मेयर की पत्नी का विवरण ताहिरा को मेयर मुहम्मद खान के घर पर एक कमरे में नज़रबंद करके तब कड़ी निगरानी में रखा गया।


डेस्क। ताहिरा को दोषी बनाने वाले उनके लहजे से भौच्चके रह गये। वे अपने घरों को वापस गये और ताहिरा की भर्त्सना करते हुये एक पत्र लिखा, जिसमें लिखा कि ताहिरा ने अपने धर्म का त्याग करने से मना कर दिया था। अंततः इस प्रतिनिधिमंडल की सिफारिश पर ताहिरा को मृत्युदंड दे दिया गया ।

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ताहिरा की हत्या से पूर्व मेयर की पत्नी का विवरण ताहिरा को मेयर मुहम्मद खान के घर पर एक कमरे में नज़रबंद करके तब कड़ी निगरानी में रखा गया। मेयर की पत्नी हालाँकि बाब की अनुयायी नही थी लेकिन उसको उनसे बहुत लगाव हो गया था। ताहिरा की हत्या करने के लिये ले जानेके पूर्व तक वह उनकी समर्पित मित्र बन गई थीं। 

उसने उनके विषय में यह रोचक विवरण छोड़ा है, "एक रात मैं जब उनके कमरे में गई तो उनको बर्फ से श्वेत सिल्क के गाउन में तैयार पाया। 

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मेरे चकित होने पर उन्होंने कहा, "मैं अपने प्रियतम से मिलने के लिये तैयारी कर रही हूँ और मैं मुझ बंदी की देख-भाल की चिंता से आपको मुक्त कर देना चाहती हूँ।" 

"मैं शुरू में बहुत ही चौंक गई थी और उनसे अलग होने के विचार मात्र से मैं रोने लगी। उन्होंने(ताहिरा ने) मुझे यह कहते हुये सांत्वना दी, "रोओ मत! मेरी शहादत की घड़ी तीव्रता से निकट आ रही है। मेरी यह इच्छा है कि मेरे शरीर को गड्ढे में फेंक दिया। जाए और उस गड्ढे को पत्थर और मिट्टी से पाट दिया जाये।

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उन्होंने कहा, ”मेरा अंतिम आग्रह है कि तुम किसी को भी मेरे कमरे में प्रवेश करने की अनुमति न देना। जब तक मुझको यह घर छोड़ने का आदेश नहीं आ जाता, किसी को भी मेरी प्रार्थनाओं में बाधा नहीं डालने देना। मैं उपवास रखना चाहती हूँ, ऐसा उपवास जो तब तक नहीं टूटेगा, जब तक मैं अपने प्रियतम के आमने-सामने नहीं होती।" 

इन शब्दों के साथ उन्होंने उसको अपने कमरे में ताला लगा देने का आदेश दिया और कहा कि इसको तब तक नहीं खोलना जब तक विदा की घड़ी नहीं आ जाये। मैंने उनके कमरे के दरवाजे पर ताला लगा दिया और दुःख से बेहाल अपने कमरे में चली गई। 

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नींद से दूर स्वयं को सांत्वना देने में असमर्थ मैं अपने बिस्तर पर लेट गई। उनकी शहादत के निकट आते समय का विचार मात्र ही मेरी सहनशक्ति के पार था। अपने को रोक पाने में असमर्थ मैं अनेक बार उठकर चुपके से शांतिपूर्वक उनके कमरे की चौखट तक गई। 

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अपने प्रियतम की प्रशंसा का गान करती हुई उनकी मधुर आवाज ने मुझे सम्मोहित कर लिया। ताहिरा ने पूरी रात प्रार्थना की कि सर्वसामर्थ्यशाली ईश्वर से मिलन के लिये, जिनकी सेवा में उन्होंने अपना जीवन न्योछावर करने की कामना की थी, वह कितनी उत्सुक हैं।

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