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ताहिरा की शौर्य-कथा, अध्याय 5 (भाग-4), 'ताहिरा के मृत्युदंड की सिफारिश'

संजीवनी टुडे 17-10-2019 01:02:00

ताहिरा से सात बार पराजित हो चुके धर्माधिकारियों द्वारा उनके लिये मृत्युदंड की सिफारिश की।


डेस्क। ताहिरा के भाषणों की एक अद्भुत विशेषता उनकी सरलता थी और जब वह बोलती थीं तो उनके श्रोता उद्वेलित हो जाते थे और प्रशंसा से भर उठते थे और अक्सर उनकी आँखें आँसुओं से भर जाती थी।

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ताहिरा ने पूरी राजधानी को इस हद तक उद्वेलित कर दिया था कि सरकार ने उनके धर्म के विषय में प्रश्न पूछने के लिये उनके पास अपने एक विशेष प्रतिनिधिमंडल को भेजा। 

उन्होंने उनके साथ, सात सम्मेलन किये, जिनमें ताहिरा ने “बाब ही ईश्वर के प्रतीक्षित अवतार हैं" , इसके प्रमाण प्रस्तुत किये। उन्होंने उन लोगों को आश्वस्त करने के लिये उनके स्वयं के धर्मग्रंथ से उद्धरण प्रस्तुत किये। 

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इन सम्मेलनों के अंत में ताहिरा किसी भी तथ्य को स्वीकार नहीं करने के उनके दुराग्रह से क्रुद्ध हो गईं। विशेष रूप से कुछ भविष्यवाणियों को लेकर भी उसने कहा, “कब तक आप, इन मूर्खताओं और झूठों से चिपके रहेंगे? कब अपनी आँखों से 'सत्य के सूर्य' की ओर आँख उठाकर देखेंगे?' 

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उनको दोषी बनाने वाले उनके लहजे से भौच्चके रह गये। वे अपने घरों को वापस गये और ताहिरा की भर्त्सना करते हुये एक पत्र लिखा, जिसमें लिखा कि ताहिरा ने अपने धर्म का त्याग करने से मना कर दिया था। अंततः इस प्रतिनिधिमंडल की सिफारिश पर ताहिरा को मृत्युदंड दे दिया गया ।

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