संजीवनी टुडे

ताहिरा की शौर्य-कथा, अध्याय 5 (भाग-3), 'शाह का पत्र'

संजीवनी टुडे 16-10-2019 07:26:32

शाह ने मेयर के घर पर ताहिरा को एक पत्र लिखा।


डेस्क। ताहिरा तेहरान के रास्ते में थी, जब उसको उसकी खोज में लगे हुये एक दल ने रोककर मार्गरक्षकों के साथ शाह की उपस्थिति में ले गया। उसने उन पर टिप्पणी करते हुए कहा, “मुझे उसका सौंदर्य अच्छा भा गया है। तुम लोग उसको यहीं छोड़कर चले जाओ। फिर उनको एक कैदी की भाँति तेहरान के महापौर मुहम्मद खान के घर ले जाया गया।

यह खबर भी पढ़े: ताहिरा की शौर्य-कथा, अध्याय 5 (भाग-2), 'ताहिरा का क्रांतिकारी प्रकटन'

शाह ने मेयर के घर पर ताहिरा को एक पत्र लिखा। उसने उनसे आग्रह किया कि वह बाब को त्याग दें और फिर से एक सच्ची मुसलमान बन जायें। उसने उनको वचन दिया कि यदि वह ऐसा करेंगी तो वह उनको अपने हरम की महिलाओं के अभिवावक का ऊँचा दर्जा देगा और उनको अपनी दुल्हन तक बना लेगा। 

उन्होंने उसके पत्र के पीछे कविता में उसका यह जवाब दिया कि “साम्राज्य और ताज उसके लिए था लेकिन दर-दर भटकना और विपदायें उनके लिये थीं।" 

यह खबर भी पढ़े: ताहिरा की शौर्य-कथा, अध्याय 5 (भाग-1), 'ऐतिहासिक सम्मेलन'

उनके उत्तर ने शाह के हृदय को छल लिया। उसने उनकी चेतना और साहस के विषय में कहा 'अभी तक इतिहास ने हमको ऐसी स्त्री के दर्शन नहीं कराये। ताहिरा को मेयर के घर में कैद के दौरान समुचित स्वतंत्रता दी गई और उसको प्रभुधर्म का शिक्षण भी करने दिया गया।

तेहरान में निवास के इस काल के दौरान ताहिरा अपनी लोकप्रियता और प्रसिद्धि की चरम ऊँचाई पर थीं। उन्होंने खुले आम बहुविवाह, पर्दा और सभी सदियों से पूर्व में माहिलाओं को अन्यायपूर्वक बाँधकर रखने वाली बेड़ियों की भर्त्सना की। 

यह खबर भी पढ़े: ताहिरा की शौर्य-कथा, अध्याय 4 (भाग-4), 'नए षडयंत्र से रहस्य्मयी मुक्ति'

उन्होंने उन अधम, दयनीय भूमिकाओं के विषय में बताते हुये जो उनको उनके अतीत के विश्वासों के कारण निभानी पड़ रही थीं, लोगों को जागृत किया और उन्होंने। उनको इस स्वतंत्रता , सम्मान और गरिमा के दर्शन कराकर जो बाब का धर्म उनको प्रदान करेगा उनके विश्वास को जीता। 

सर फ्रांसिस चंगहसबैंड, जिन्होंने ताहिरा के जीवन के विषय में लिखा है, कहते हैं, "वह अपनी आस्था में इतनी दृढ़ हो गई थीं कि हालाँकि वह समृद्ध और सम्भ्रांत थी, उन्होंने अपने स्वामी की सेवा के लिये और उनके सिद्धांतों की घोषणा और उनको स्थापित करने के लिये अपनी समृद्धि को, अपने नाम और प्रसिद्धि को त्याग दिया।

यह खबर भी पढ़े: ताहिरा की शौर्य-कथा, अध्याय 4 (भाग-3), 'प्रार्थना का चमत्कार'

वह एक और स्थान पर लिखते हैं , उनके भाषण की खूबसूरती ऐसी थी कि सुनने वाले विवाह समारोह का भोजन वहाँ का संगीत छोड़कर उसकी ओर आकर्षित हो खिंचे चले आते थे। 

कॉम्टे डी गोबिनियु उनके विषय में लिखते हैं, “अनेक जो उनको जानते थे और भिन्न-भिन्न अवसरों पर उनको सुना था, उनका कहना था कि इतनी विद्वान और इतनी अच्छी तरह धर्म का ज्ञान रखने वाली महिला के लिये यह एक चमत्कार था।' 

प्लीज सब्सक्राइब यूट्यूब बटन

 

उनके भाषणों की एक अद्भुत विशेषता उनकी सरलता थी और जब वह बोलती थीं तो उनके श्रोता उद्वेलित हो जाते थे और प्रशंसा से भर उठते थे और अक्सर उनकी आँखें आँसुओं से भर जाती थी।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल पर जुड़ें

More From bahaifaith

Trending Now
Recommended