संजीवनी टुडे

किताब-ए-अकदस पर सेमिनार का समापन, बहाईयों ने जाने कायदे कानून

संजीवनी टुडे 11-06-2019 19:57:33

स्थानीय आध्यात्मिक सभा जयपुर के ओर से आयोजित किताब-ए-अकदस पर सेमिनार का सोमवार को समापन हुआ


जयपुर। स्थानीय आध्यात्मिक सभा जयपुर के ओर से आयोजित किताब-ए-अकदस पर सेमिनार का सोमवार को समापन हुआ, सेमिनार मे मुख्य वक्ता के तौर पर पधारे राष्ट्रीय आध्यात्मिक सभा के सदस्य डा० अली मर्चेंट व इंदौर से पथारे बहाई विद्वान प्रोफेसर एफ यू शाद ने अपना उद्बोधन प्रस्तुत किया। 

डा० मर्चेट ने बताया की परम पावन पुस्तक 'किताब-ए-अकदस' 'बहाउल्लाह ' द्वारा 1873 मे प्रकट की गई जहां बहाउल्लाह के प्रकटीकरण से लेकर तमाम वह नियम कायदे कानून मौजुद है जो सभी बहाईयो पर लागु होते है और जिनका पालन किया जाना अनिवार्य है।

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यह पुस्तक बहाउल्लाह के एक नये विश्व निर्माण का घोषणापत्र है जिसको सम्पूर्ण मानवजाति पर लागु किया जाना है। किताब -ए-अकदस मे वर्णित कानून मानवजाति को एक सूत्र मे बांधने के साथ ही एक नई विश्व व्यवस्था की ओर ले जाती है। 

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एफ यू शाद ने बताया की यह धर्म एक विश्व धर्म है जिसका किसी भी जाति, संप्रदाय, से कोई संबंध नही है। विश्व के तमाम बहाई सर्वोच्च संस्था विश्व न्याय मंदिर (इजरायल) से मार्गदर्शन प्राप्त कर विभिन्न गतिविधियाँ संचालित करते है यह व्यवस्था 'बहाउल्लाह ' द्वारा ही 'किताब-ए-अकदस' मे उल्लेखित की गई है ,साथ ही बताया गया की सभी अनुयायियो को इसका अध्ययन करना चाहिए। 

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समापन समारोह पर आध्यात्मिक सभा के अध्यक्ष डा० नेजात हगीगत ने सभी मेहमानों का धन्यवाद ज्ञापित किया समारोह मे बनारस, आगरा, गुड़गांव, जोधपुर, टोडाभीम ,करौली, इंदौर व जयपुर के मित्रों ने भाग लिया। 

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