संजीवनी टुडे

बहाई धर्म के अनुसार विवाह का महत्व

संजीवनी टुडे 12-06-2019 13:08:03

बहाई विवाह दो पक्षों के बीच मृदुल मिलन और स्नेहपूर्ण सम्बन्ध है


बहाई धर्म विश्व के समस्त धर्मो का समिश्रण है। यह एक ऐसा धर्म है जो किसी भी धर्म की अवहेलना नहीं करता बल्कि सभी धर्मो को एक समान समझता है व सभी धर्मो और उनके अवतारों व पैगम्बरों का आदर करना सिखाता है। बहाई धर्म परमात्मा और इसके अवतारों की एकता को स्वीकार करता हुआ व ’वसुधैव कुटुम्बकम्’ के सिद्धान्त का समर्थन व पोषण करता है। 

bahai dharm

बहाई धर्म के अनुसार विवाह 

विवाह की प्रतिज्ञा परम पावन पुस्तक ”किताब-ए-अक़दस“ में वर्णित वह श्लोक है जो वर और वधू द्वारा बारी-बारी से वैसे दो गवाहों की उपस्थिति में पढ़ी जानी चाहिये जो आध्यात्मिक सभा को स्वीकार्य हों। 

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विवाह की प्रतिज्ञा इस प्रकार है : ”हम, सत्य ही, परमेश्वर की इच्छा का अनुपालन करेंगे।“

”बहाई विवाह दो पक्षों के बीच मृदुल मिलन और स्नेहपूर्ण सम्बन्ध है, लेकिन उन्हें (विवाह बंधन में बंधने वाले स्त्री-पुरूष को) अत्यंत सावधानी बरतनी चाहिये और एक दूसरे के चरित्र से सुपरिचित हो जाना चाहिये। एक सुदृढ़ संविदा द्वारा यह चिरंतन बंधन संरक्षित कर लिया जाना चाहिये और उद्देश्य होना चाहिये मधुर सम्बन्ध, साहचर्य और एकता तथा अनन्त जीवन को बढ़ावा देना।“

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”....एक विवाहित जोड़े का जीवन आसमान के फरिश्तों की तरह होना चाहिये - ख़ुशियों से भरा और आध्यात्मिक आनन्द से परिपूर्ण, एकता का प्रतीक और मित्रवत् - मानसिक और दैहिक मित्रता....। उनके मत और विचार सत्य के सूर्य की किरणों के समान और आसमान के चमकीले तारों की प्रखरता लिये हों। सहभागिता और समरसता के वृक्ष की टहनियों पर मधुर गान गुंजित करते पक्षियों की तरह उनका जीवन हो। उन्हें बराबर आनन्द से उल्लसित होना चाहिये और दूसरों के दिलों को खुशी देने का साधन बनना चाहिये। उन्हें अपने संगी साथियों के सामने एक उदाहरण बनना चाहिये, एक-दूसरे के प्रति सच्चा प्रेम और वफ़ादारी रखनी चाहिये और अपने बच्चों को कुछ इस प्रकार शिक्षित करना चाहिये कि वे अपने परिवार का नाम रौशन करें।“

- अब्दुल-बहा

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