संजीवनी टुडे

बहाई धर्म के संस्थापक व अग्रदूत युगल अवतारों का जन्म दिवस मनाया

संजीवनी टुडे 18-10-2020 21:32:58

इस अवसर पर अनुयायीयों द्वारा विभिन्न भाषाओं अंग्रेजी में नीमा डोमा, हर्ष मीना हिंदी में अलीशा कुमावत, आशा कुमावत व उर्दू में अनुज अनंत द्वारा प्रार्थना कर कार्यक्रम की शुरुआत कि गई।


जयपुर। स्थानीय आध्यात्मिक सभा जयपुर की ओर से शनिवार को बहाई धर्म के संस्थापक 'बहाउल्लाह' का 203 वां व बहाई धर्म के अग्रदूत 'दिव्यात्मा बाब' का 201 वां जन्म दिवस वर्चुअल रूप से मनाया गया।

इस अवसर पर अनुयायीयों द्वारा विभिन्न भाषाओं अंग्रेजी में नीमा डोमा, हर्ष मीना हिंदी में अलीशा कुमावत, आशा कुमावत व उर्दू में अनुज अनंत द्वारा प्रार्थना कर कार्यक्रम की शुरुआत कि गई।

मुख्य वक्ता बनवारी चंदवाडा़ ने युगल अवतारों के इस पावन पर्व की सभी को शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए बताया कि ग्रिगेरियन कैलेंडर के हिसाब से 'बहाउल्लाह' जिनका जन्म 12 नवंबर 1817 को तत्कालीन फारस की राजधानी तेहरान व अग्रदूत 'दिव्यात्मा बाब' का जन्म 20 अक्टूबर 1819 को फारस के शिराज नामक नगर में हुआ था। लेकिन वर्तमान समय में बहाई धर्म के बदी कैलेंडर लागु होने के बाद युगल अवतारों का जन्मदिवस इसी के मुताबिक मनाया जाता है। 

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यह युग इसलिए भी बहुत महत्वपूर्ण है कि इस युग में एक साथ दो ईश्वर अवतारों का आगमन हुआ है। 'बहाउल्लाह' का उस समय फारस में प्रकटीकरण हुआ जब फारस के लोग उस प्रतिज्ञापित्त की प्रतीक्षा कर रहे थे। वह एक कुलीन परिवार से संबंध रखते थे उनके पिता राजा के दरबार में मंत्री थे लेकिन उन्होंने यह सब कुछ छोड़ कर मानव जाति की सेवा में अपना जीवन न्यौछावर कर दिया।

उनकी बढ़ती ख्याति को देख वहां के मुल्ला, शासकों ने उनको प्रताड़ित करना शुरू किया और देश निकाला दे दिया उसके बाद वह अलग-अलग देशों की यात्राएं करते हुए लगभग 40 वर्षों तक जेल में रहे और संपूर्ण मानव जाति को उस एक सत्य ईश्वर की ओर अभिमुख होने में मार्ग प्रशस्त किया। वही 'दिव्यात्मा बाब' भी एक संपन्न परिवार से संबंध रखते थे। 'दिव्यात्मा बाब' जिनका कि शाब्दिक अर्थ द्वार अथवा दरवाजा होता है वह दरवाजा जिससे एक नये धर्म का आगमन होगा जो संपूर्ण मानव जाति को एकता के सूत्र में पिरोते हुए एक नई विश्व व्यवस्था की नींव रखेगा।

महज 25 वर्ष की उम्र में उन्होंने स्वयं को ईश्वर अवतार के रूप में घोषित किया 'बाब' के भी बढ़ते प्रभाव को देख उनको भी वहां के राजाओं, शासकों द्वारा प्रताड़ित किया गया लेकिन उनके बढ़ते प्रभाव को देखते हुए हजारो की संख्या में उनके अनुयायी बने जिनको कालान्तर में बाबी के नाम से जाना गया। उनके प्रेम के खातिर ही तकरीबन 20 हजार बाबियों ने अपनी शहादत दी और अंत में मात्र 31 वर्ष की उम्र में उनको शहीद कर दिया गया।

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इस दौरान अनुयायियों में खासा उत्साह देखते ही बन रहा था उत्सव का आन्नद तब और बढ़ गया जब मोनिका द्वारा 'ये मत कहो खुदा से मेरी मुश्किले बडी़ है' गीत का गायन किया गया व कविता द्वारा राजस्थानी गीत पर शानदार प्रस्तुति दी गई। वही अनीस ने भी अंग्रेजी के एक गीत पर डांस कर तालिया बटोरी, अंत में अनुज अन्नत व स्नेहा अन्नत ने ऑनलाइन गेम खिलाकर कार्यक्रम को और रोचक बना दिया। कार्यक्रम का संचालन अभिनव अन्नत ने किया।

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