संजीवनी टुडे

अनोखी बच्ची: ये बच्ची बचपन से खाती है, कांच, लोहा और प्लास्टिक!

संजीवनी टुडे 28-11-2016 14:37:43

उन्नाव। 'भूख न जाने जाति और पाति' यह कहावत उन्नाव मे 8 साल की बच्ची रीता के ऊपर सच हुई, जब बचपन में मां के मरने के बाद और गरीबी झेल रहे पिता द्वारा भरपेट खाना न दे पाने के बाद ही रीता अपनी भूख बर्दाशत नही कर पायी और एक अनोखी बच्ची बन कर उभरी। 

रीता 8 साल की हो चुकी है और अब वह कांच, लोहा, प्लास्टिक ऐसे खाती है जैसे वह उसके खाने का एक हिस्सा बन गया हो वहीं पूरी तरह स्वस्थ रीता को देख ग्रामीण हैरानी जताते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्नाव के चकलवंसी गांव के मजरे मे रहने वाली रीता भले ही 8 साल की हो गई है और लोहा, कांच, प्लास्टिक उसके खाने का हिस्सा बन चुका है लेकिन यह रीता का शौक नही बल्कि यह उसकी मजबूरी थी जो आदत मे बदल गई है। 

रीता जब 4 साल की थी तो उसकी माँ के देहान्त के बाद गरीब पिता रोटी के जुगाड़ मे जुट गया और भूख से बिलबिलाई रीता ने प्लास्टिक,लोहा और कांच खाना शुरू कर दिया फिर क्या था जब भी रीता को भूख का एहसास होता तो वह कूड़े के ढेर की तरफ बढ़ जाती और लोहा, कांच और प्लास्टिक खाकर अपनी भूख मिटाती रही। 

रीता की दादी, छेदाना ने कहा कि मां के मरने के बाद रीता का पूरी तरह ख्याल न रख पाने का मलाल मेरे मन मे भी है, और मैं इस बात को मान रही हूं कि आज जो रीता की आदत बन चुकी है उसके लिए उसकी देखभाल मे कमी एक बड़ी वजह है और पड़ोसी सुरेन्द्र ने बताया कि, जहां पिता रोजी रोटी की आस में घर से बाहर घूमता रहता था, तो वही रीता भूख मिटाने के लिए लोहा, ब्लेड और प्लास्टिक के कैसेट खाकर अपना गुजारा करती थी।

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