फ्रीचार्ज वॉलेट को खरीदेगा एक्सिस बैंक, 385 करोड़ में स्नैपडील अमेरिका : सेना में ट्रांसजेंडरों की नहीं होगी भर्ती 2001 में भारत पर एटमी हमले का था प्लान, पर जवाबी कार्यवाही से डर रहे थे मशर्रफ हरमनप्रीत ने खोला राज, क्यों मारती है लम्बे-लम्बे हिट अब्दुल कलाम पुण्य तिथि विशेष : जब आपका दस्तखत ऑटोग्राफ बन जाए तो समझो आप सफल ... PORN STAR की इन बातों के बारें में जानकर आप भी रह जाएंगे दंग! आखिर पता चल ही गया बरमूडा ट्रैंगल का रहस्य चीन पहुंचे डोभाल, डोकलाम पर होगी बात, रणनीति बनाने में जुटा है भारत संजय दत्त की फिर बड़ी मुश्किलें, दोबारा जा सकते है जेल यहां पर बोतल में कंडोम लगाकर बनाई जाती है शराब! कर्मचारियों के शरीर में लगेगी ये अनोखी चिप, कैसे होगी मददगार जानिए... LIVE INDvsSL: श्रीलंका बैकफुट पर, आधी टीम पेवेलियन लोटी, स्कोर 150 पार पुण्य तिथि विशेष : जानिए, शोले के 'गब्बर' का सफर हार्दिक पांड्या ने बनाया रिकॉर्ड, नहीं है किसी भारतीय के नाम इस अनोखी शादी के बारें में जानकर आप भी रह जाएंगे दंग! JDU में बगावत के सुर शुरू, राहुल-शरद यादव की मुलाकात से फिर बिगड़ सकता है बिहार का गणित पगड़ी की वजह से नहीं मिला सिख छात्र को दाखिला, परिवार ने दी चुनौती एयरटेल ने जियो को टक्कर देने के लिए लॉन्च किया है धमाकदार ऑफर जिस गड्ढ़े को लोग समझ रहे थे खरगोश का बिल, वह निकली एक रहस्यमयी गुफा! अश्लील वीडियो बनाकर पूर्व एयर होस्टेस से किया तीन महीने तक दुष्कर्म
Video:- दुनिया में कही नहीं देखे होंगे इतने सूंदर बगीचे, इजराइल के "बहाई बगीचे" जैसे
sanjeevnitoday.com | Sunday, July 16, 2017 | 10:53:08 AM
1 of 1

इजराइल के हाइफा शहर में स्थित बाब की समाधी मांउट कार्मेल को काट-काट कर वहां बहुत खूबसूरत गार्डन्स बनाये है। यह बहाई धर्म के अग्रदूत दिव्यात्मा "बाब" के अलावा युगावतार "बहाउल्लाह" के जेष्ट पुत्र अब्दुलबहा, उनकी पत्नी आसिया खानुम, उन की छोटे बेटे मिर्जा मेहंदी, उनकी बेटी बाहिया खानुम की पवित्र समाधिया है। ये बहाई धर्म का तीर्थस्थान है। 

                                          बाब (अग्रदूत) की समाधी

यहां दुनिया  के सभी देशों से बहुत बड़ी संख्या में बहाई तीर्थ करने आते है। बहाई धर्म के अनुयाईयो के अलावा बहुत बड़ी तादात में पर्यटक इन बहाई गार्डन्स को देखने आते है। इजराइल टूरिस्म डिपार्टमेंट में घूमने के लिए जो स्थान बताये जाते है वो बहाई गार्डन्स बताये जाते है।  

क्यों की बहाई गार्डन्स की खूबसूरती देखते ही बनती है। इजराइल के  हाइफा,  बहजी और अक्का इन स्थानों पर बहाई धर्म के बहुत से धार्मिक स्थल है। 

बहाई धर्म के संस्थापक बहाउल्लाह का जीवन
सन् 1817 में फारस (ईरान) के एक कुलीन परिवार में जन्मे, बहाउल्लाह की नियती तो कुछ ऐसी लगती थी जैसे ऐश-ओ-आराम की उनकी जिन्दगी होगी, लेकिन शाह के दरबार में मंत्री, अपने पिता के पगचिह्नों पर चलने की उनकी कोई खास अभिरुचि बचपन से ही नहीं थी और वह अपना जीवन और अपनी धन-सम्पत्ति को गरीबों की सेवा में लगा देना अधिक पसंद करते थे ।

                                                                  बहाउल्लाह की समाधी

बहाउल्लाह ने 40 साल की कैद, उत्पीड़न और मानवजाती के लिए ईश्वर के आधुनिकतम संदेश के प्रति धर्मान्ध और अनभिज्ञ बने राजतंत्र तथा धार्मिक नेताओं द्बारा दी गई यातना सही। तेहरान स्थित अपने निवास से कारानगरी अक्का तक के देशनिकाले के दौरान उन्होंने दिव्य रूप से प्रेरित जो भी लिखा वह 100 से भी अधिक पुस्तकों के बराबर है। उनके प्रकटीकरण में रहस्यवादी लेख, सामाजिक और नीतिपरक शिक्षायें, विधान और अध्यादेश और दुनिया के सम्राटों और शासकों को उद्घोषित किए गए निर्भिक संदेश शामिल है, बहाउल्लाह का संदेश प्राप्त करने वाले इन शासकों और सम्राटों में नेपोलियन तृतीय, महारानी विक्टोरिया, पोप पायस नवम्, फारस के शाह, जर्मनी के कैसर विल्हेम प्रथम, ऑस्ट्रेलिया के शासक फ्रांज जोसेफ और अन्य लोग थे। 
बहाउल्लाह के पार्थिव जीवन का अन्त 29 मई 1892 को हुआ। धीरे-धीरे बहाई समुदाय अस्तित्व में आया-मुट्ठी भर अनुयायियों से आज लाखों की संख्या में बहाई पूरे विश्व में निवास करते हैं, अब यह एक विश्व समुदाय का स्वरूप धारण कर चुका है, यह समुदाय अब दुनिया के लगभग सभी देश और क्षत्रों में रहता है, जो बहाउल्लाह की विश्व की परिकल्पना को साकार करने में लगा है। 

पूरी दुनिया में बहाउल्लाह का 200वां जन्मदिन मनाने की जोरशोर से तैयारी की जा रही है।जन्मदिनअक्टूबर 2017 में मनाया जायेगा।  बहाई धर्म के अनुयायी (बहाई) जयादा से ज्यादा लोगो को आरोग्यदायी बहाउल्लाह का सन्देश दे कर बहाउल्लाह को उनका जन्मदिन का तोहफा देना कहते है।  

बहाउल्लाह के जीवन की घटनाओं का महत्वपूर्ण क्रमवार विवरण:

 

बहाउल्लाह के जीवन और उनकी ओर से किए गए एक नये धर्मप्रकटीकरण से जुड़ी घटनायें उन्नीसवी शताब्दी में ईरान के इस्लामी समाज और तत्कालीन ओटोमन साम्राज्य में घटित हुई। फारस, जहां उनका जन्म हुआ था, से आरम्भ होकर उनके जीवन की हर गतिविधि को तत्कालीन दो केन्द्रीय शक्तियों द्बारा आदेशित किया गया।

बहाउल्लाह का जन्म: 12 नवम्बर 1817
तेहरान स्थित सियाहचाल (कालकोठरी) में बंदी बनाया जाना: अगस्त 1852
बहाउल्लाह का बगदाद के लिए देश निकाला: 12 जनवरी 1853
बगदाद के रिजवान बाग मंे बहाउल्लाह की सार्वजनिक घोषणा: 21 अप्रैल 1863
कॉन्स्टॅन्टीनोपल के लिए बहाउल्लाह का निर्वासन: 16 अगस्त 1863
एड्रियनोपल के लिए बहाउल्लाह का आगमन: 12 दिसम्बर 1863
अक्का के लिए बहाउल्लाह का निर्वासन: 31 अगस्त 1868
परम पावन पुस्तक किताब-ए-अकदस का प्रकटीकरण: 1873
बहाउल्लाह की संविदा तथा वसीयत और इच्छापत्र 'किताब-ए-अहद’ का प्रकटीकरण: 1892
बहाउल्लाह का स्वर्गारोहण: 29 मई, 1892

Watch Video:-



FROM AROUND THE WEB

0 comments

Most Read
Latest News
© 2015 sanjeevni today, Jaipur. All Rights Reserved.