संजीवनी टुडे

राजस्थान/ आकाश पतंगों से हुआ आच्छादित, घरों की छतों से पतंगों और डीजे संग लड़ाये पेच

संजीवनी टुडे 14-01-2020 14:59:45

राजस्थान में मकर संक्रांति का पर्व परम्परा एवं श्रद्धा के साथ मनाया गया। राजधानी जयपुर में पतंगोत्सव के साथ मकरसंक्रांति हर्षाेल्लास से मनायी गयी। मकर संक्रांति के अवसर पर आज सुबह जयपुर के गलता कुंड में श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाकर पवित्र स्नान किया।


जयपुर। राजस्थान में मकर संक्रांति का पर्व परम्परा एवं श्रद्धा के साथ मनाया गया। राजधानी जयपुर में पतंगोत्सव के साथ मकरसंक्रांति हर्षाेल्लास से मनायी गयी। मकर संक्रांति के अवसर पर आज सुबह जयपुर के गलता कुंड में श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाकर पवित्र स्नान किया। बाद में गोविन्ददेव जी के मंदिर एवं अन्य देवालयों में भगवान को तिल एवं इससे बने व्यंजनों का भोग लगाकर दानपुण्य किया। श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर गायों को चारा, पक्षियों को दाना डालकर पुण्यलाभ प्राप्त किया। इसके बाद जयपुर में कई स्थानों पर पतंगोत्सव का आयोजन किया गया। 

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स्थानीय अवकाश होने से सुबह से ही बच्चों का छतों पर जमावड़ा शुरू हो गया। लोगों ने छतों पर ही डीजे लगाकर पतंगबाजी की। जयपुर का पूरा आकाश पतंगों से भर गया। सुबह व्यवसायियों ने आधा दिन ही अपने प्रतिष्ठान खोले और घर पर पेंच लड़ाये। उधर पतंगबाजी के चलते कई परिंदे घायल हो गये। सड़कों पर भी कई बच्चे पतंग लूटने के दौरान दुर्घटना का शिकार हुए। अजमेर से प्राप्त समाचार के अनुसार तीर्थराज पुष्कर में आस्था और पतंगबाजी का अनोखा मिलन देखा गया। पुष्कर में जहां पवित्र सरोवर में आस्था की डूबकी लगाई गयी वहीं आकाश पतंगों से आच्छादित हो गया। पुष्कर में मेले जैसा माहौल बन गया।

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आस्था की नगरी पुष्कर में सुबह से ही कड़ाके की ठंड के बावजूद विशेष धार्मिक स्नान का सिलसिला शुरू हो गया तो पुष्कर के वाशिंदों ने अपने घरों की छतों पर से पतंगों को उड़ाना शुरू कर दिया। पुष्कार में आसमान रंगीन पतंगों से पट गया। पतंगबाजी में पुष्करवासियों के साथ विदेशी पर्यटकों की भी सहभागिता दिखाई दी। विदेश पर्यटक भी पतंगबाजी का जमकर लुत्फ उठा रहे हैं। कई पतंगबाजी करने वालों ने तो घरों की छत पर डीजे लगाकर माहौल को और ज्यादा रोचक बना दिया है ।पुष्कर के ज्योतिषाचार्य पं. कैलाश नाथ दाधीच के अनुसार बुधवार को सूर्योदय से सूर्यास्त तक मकरसंक्रांति का पुण्य काल रहेगा। इस दौरान सरोवर स्नान के बाद दानपुण्य एवं जगतपिता ब्रह्माजी के दर्शन का लाभ श्रद्धालुओं द्वारा उठाया जायेगा।

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