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5 विकेट लेने वाले अरुण क्यों है 610 विकेट लेने वाले जहीर पर भारी, जानिए ऐसे ही 5 दिग्गजों से..
sanjeevnitoday.com | Monday, July 17, 2017 | 06:30:43 PM
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नई दिल्ली। अक्सर क्रिकेट की कमेंटरी सुनते हुए जब हम अपने किसी पसंदीदा खिलाड़ी के बारे में कोई भी आलोचना सुनते हैं तो उस कमेंटेटर के लिए हमारा रिएक्शन होता है कि जिंदगी में कभी क्रिकेट खेला नहीं और आज बैठकर कमेंटरी कर रहे हैं। जाहिर है जब हम किसी कोच को देखते होंगे तब भी हमारे जेहन में यही बात आती होगी कि जिसने कभी अच्छा क्रिकेट नहीं खेला, वह अच्छा कोच कैसे हो सकता है। लेकिन यकीन जानिए कोचिंग और क्रिकेट खेलना दोनों अलग अलग बातें हैं।

 

रवि शास्त्री के टीम इंडिया के हेड कोच बनते ही सौरव गांगुली और उनके बीच की कलह सामने आने लगी है। विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर के समर्थन से शास्त्री कोच का पद पाने में तो सफल हो गए हैं, लेकिन गांगुली ने राहुल द्रविड़ को सहायक बल्लेबाजी कोच और जहीर खान को सहायक गेंदबाजी कोच बनाकर अपना दबदबा कायम रखना चाहा। इसके साथ ही जहीर और अरुण के क्रिकेट रिकॉर्ड्स को लेकर भी चर्चा शुरु हो गई है।  लोग कहने लगे हैं कि 5 विकेट लेने वाले भरत अरुण आखिर जहीर खान से बेहतर कैसे हो सकते हैं। बता दें कि एक गेंदबाज के रूप में जहीर खान का भरत अरुण से ज्यादा अनुभव है, जहीर खान ने 200 एक दिवसीय मैच खेले हैं और 282 विकेट लिए हैं। जबकि अरुण ने सिर्फ चार एक दिवसीय मैच खेले हैं और एक विकेट लेने में कामयाब हुए हैं।

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भरत अरुण ने भारत के लिए 2 टेस्ट मैचों में 4 विकेट और 4 वनडे मैचों में सिर्फ 1 विकेट हासिल किए हैं। वहीं, जहीर खान का रिकॉर्ड देखें तो उन्होंने वनडे, टेस्ट और टी-20 में  कुल 610 विकेट हासिल किए है। जहीर ने वनडे में 282, टेस्ट में 311 और टी-20 में 17 विकेट हासिल किए है, जबकि अरुण के खाते में वनडे और टेस्ट मिलाकर सिर्फ पांच विकेट ही हैं। जहीर-अरुण के विवाद के बीच अगर क्रिकेट कोचिंग का इतिहास देखें तो पता चलता है कि जो लोग बहुत अच्छा क्रिकेट खुद नहीं खेले वही अच्छे कोच साबित हुए। यहां हम ऐसे ही कुछ कोचों के बारे में बता रहे हैं जो खुद तो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अच्छा परफॉर्म नहीं कर पाए, लेकिन कोच के रूप में उन्होंने खासी ख्याति अर्जित की है।

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जॉन बुखानन
पूर्व कोच जॉन बुखानन को पूरी दुनिया में एक बेहतरीन कोच के रूप में जाना जाता है। बुखानन शायद क्रिकेट इतिहास के सबसे लोकप्रिय कोच हैं, पांच साल क्वींसलैंड के कोच रहने के बाद बुखानन अक्टूबर 1999 में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के कोच बने। 2011 से 2013 तक बुखानन न्यूजीलैंड क्रिकेट के डायरेक्टर रहे, लेकिन बुखानन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खुद कभी अच्छा परफॉर्म नहीं कर पाए।  

डंकन फ्लैचर
जिंबाब्वे के पूर्व क्रिकेटर डंकन फ्लैचर 1982 में जिंबाब्वे को आईसीसी ट्रॉफी जितवाने वाले खिलाड़ी हैं, लेकिन अपने देश के लिए महज छह मैच ही खेल पाए फ्लैचर ने कोचिंग में अपना करियर तलाश किया। ऐसा इंग्लिश क्रिकेट के इतिहास में 18 साल बाद संभव हुआ था। उन्हें दुनिया के टॉप कोच के रूप में की जाती है, अब शायद उन्हें इस बात का भी अफसोस नहीं होगा कि उनका अपना क्रिकेट करियर फ्लॉप साबित हुआ था। 

टॉम मूडी
मूडी ऑस्ट्रेलिया के शानदार आक्रामक बल्लेबाज थे, 1987 से 1999 के बीच उन्होंने आस्ट्रेलिया के लिए 8 टेस्ट मैच और 76 एकदिवसीय मैच खेले। टॉम मूडी की कोचिंग के दौरान ही 2007 में श्रीलंका ने आईसीसी वर्ल्ड कप जीता। मई 2007 में मूडी वेस्टर्न ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट एसोसिएशन की सहायक टीम वैस्टर्न वारियर के हेड कोच बने। उनकी टीम केएफसी टी-20 बिग बैश में 2007-8 में फाइनल खेली। बाद में मूडी को बिग बैश लीग की कमेंटरी के लिए चैनल नाइन और टैन ने हायर कर लिया। 

माइक हैसन
माइक हैसन को क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ कोच माना जाता है, आधुनिक क्रिकेट में वह सबसे अनुभवी कोच हैं। ओटागो क्रिकेट क्लब के डायरेक्टर के रूप में उन्होंने कोचिंग की शुरुआत की थी। 2011 में वह केन्या क्रिकेट टीम के हैड कोच बन गए. लेकिन 2012 में सुरक्षा से जुड़े कुछ मसलों को लेकर उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। लेकिन 22 साल की उम्र में कोचिंग शुरू करने वाले हैसन के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में प्रवेश के द्वार कभी नहीं खुले।  

डेव व्हाटमोर
ऑस्ट्रिलियन क्रिकेटर डेव व्हाटमोर का अंतरराष्ट्रीय करियर बेहद छोटा रहा है, उन्होंने 7 टेस्ट और एक एक दिवसीय खेलने का मौका मिला। इसके बाद व्हाटमोर ने कोचिंग को करियर के रूप में चुना, सबसे पहले उन्हें श्रीलंका की नेशनल क्रिकेट टीम को कोचिंग देने का अवसर मिला। दो साल के अपने कार्यकाल में पाकिस्तान ने 2012 में एशिया कप जीता, डेव व्हाटमोर ने आईपीएल में 2009 से 2011 तक कोलकाता नाइट राइडर्स की भी कोचिंग की, इस दौरान कोलकाता नाइट राइडर्स ने बेहतर प्रदर्शन किया।

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