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...तो इस कारण टीम इंडिया के कोच नहीं बन पाए वीरू पाजी
sanjeevnitoday.com | Monday, July 17, 2017 | 02:21:44 PM
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नई दिल्ली। पहली बार जब अनिल कुंबले और विराट कोहली के बीच अनबन की ख़बरें आयीं तो ये लगभग तय था कि रवि शास्त्री की वापसी तो किसी कीमत पर नहीं होगी। ये धारणा उस वक्त और पुख्ता हो गयी जब बीसीसीआई के एक टॉप अधिकारी ने वीरेंद्र सहवाग को कोच को रेस में कूदने को कहा। सहवाग शुरुआत में इस रेस में कूदना नहीं चाहते थे क्योंकि वो अनिल कुंबले का काफी सम्मान करते हैं। लेकिन, सहवाग को ये कहा गया कि अगर वो इस रेस में नहीं कूदे तब भी कुंबले को अपने पद से त्याग देना ही पड़ेगा और ऐसे में बेहतर है कि वो अपना दावा पेश करें। 

इसके बाद सहवाग को उनके पूर्व कप्तान और चहेते सौरव गांगुली से भी हरी झंडी मिल गई। रही-सही कसर इस बात से पूरी हो गयी कि विराट कोहली ने भी बीसीसीआई के अधिकारियों को ये आश्वासन दिया कि उन्हें सहवाग के नाम से कोई आपत्ति नहीं हैं। लेकिन, जैसे जैसे इटंरव्यू का वक्त नज़दीक आता गया, सहवाग के लिए टीम इंडिया का कोच बनने की उम्मीदें दम तोड़ने लगी। लेकिन, सहवाग सही मायने में उसी वक्त दौड़ से बाहर हो गए जब दोबारा कोच के आवेदन के लिए तारीख बढ़ा दी गई। ऐसा इसलिए किया गया कि ताकि रवि शास्त्री अपना दावा भर सकें। 

हालांकि, मीडिया में इस बात की भी चर्चा हुई है कि सहवाग को कोच का पद इसलिए नहीं मिला क्योंकि वो अपना स्पोर्ट स्टाफ चाहते थे। लेकिन, हमने जब इस बारे में बीसीसीआई के अधिकारियों से बात की तो उनका कहना साफ था अभी सहवाग का रुतबा कोचिंग के मामले में इतना बड़ा भी नहीं हुआ है कि वो ऐसी शर्तें रखने लगे। 

बहरहाल, सबसे ज़्यादा मायूसी सहवाग के प्रेजेंटेशन को लेकर हुई। क्रिकेट सलाहाकार समिति के सदस्य जो वीरू के दोस्त हैं, वो प्रेजेंटेशन से मायूस दिखे। उनका साफ मानना था कि अभी वीरू को किसी राष्ट्रीय टीम का कोच बनने के लिए थोड़ा वक्त लगेगा। 

आईपीएल की टीम किंग्स इलेवन पंजाब के लिए भी सहवाग का साधारण रिकॉर्ड उनके ख़िलाफ गया। इसके अलावा ये भी दलील दी गई कि चूंकि महेंद्र सिंह धोनी और युवराज सिंह जैसे समकालीन खिलाड़ी इस टीम में हैं, सहवाग के कोच बनने से सीनियर खिलाड़ियों से तनातीन बढ़ सकती है। यही वजह है कि 2 महीने पहले सहवाग कोच पद के जहां सबसे प्रबल दावेदार थे, वो दो महीने बाद टॉम मूडी से भी नीचे आ गए।

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