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नोटबंदी की प्रक्रिया के दौरान किया गया 21,000 करोड़ का हेरफेर

Sanjeevni Today 06-12-2017 14:38:45

नई दिल्ली। सरकार को डीमॉनेटाइजेशन के दौरान कुछ कंपनियों की तरफ से बैंकों के साथ 21,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के लेनदेन होने के बारे में पता चला है। इन कंपनियों का रजिस्ट्रेशन अब खत्म किया जा चुका है। मुखौटा कंपनियों पर सरकार की ओर से चलाए गए अभियान के तहत इसका खुलासा हुआ है।

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हालांकि, कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय को अब भी बैंकों से करीब 1.6 लाख कंपनियों की जानकारी मिलनी बाकी है। केन्द्र सरकार के मुताबिक, लगभग 1.6 लाख ऐसी कंपनियों की जांच और चल रही है जिसके बाद हेरफर की गई 21,000 करोड़ की रकम में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है।

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हालांकि, केन्द्र सरकार अब उन बैंकों के खिलाफ कदम उठाने की पहल कर रही है जिन्होंने ऐसी कंपनियों के ट्रांजैक्शन की सूचना टैक्स विभाग को तुरंत मुहैया नहीं कराई। मिनिस्ट्री के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, 'हमने डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज से उन बैंकों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा है जिन्होंने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज की लिस्ट से हटा दी गई कंपनियों के ट्रांजैक्शन के बारे में डिटेल्स अब तक नहीं दिए हैं।

3 लाख डायरेक्टर्स अवैध करार
इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सरकार ने इन कंपनियों की जानकारी को भारतीय रिजर्व बैंक, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डॉयरेक्ट टैक्स और दूसरी वित्तीय यूनिट्स के साथ सांझा किया है। गौरतलब है कि, इसके पहले सरकार ऐसी कंपनियों के 3 लाख से ज्यादा प्रमोटर्स और डायरेक्टर्स को अवैध करार दे चुकी है जिन्होंने 3 साल से रिटर्न नहीं भरा है।

गौरतलब है कि, प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा गठित स्पेशल टास्क फोर्स जिसमें रेवेन्यू और कॉरपोरेट अफेयर्स के सचिव शामिल थे ने 5 बार मुलाकात की और ऐसी कंपनियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने का फैसला लिया।

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