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विश्वकर्मा जयंती 2017: रांची में है 87 साल पुराना निर्माण के देवता विश्वकर्मा का मंदिर
sanjeevnitoday.com | Sunday, September 17, 2017 | 08:37:26 AM
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नई दिल्ली। निर्माण के देवता आराध्य देव भगवान विश्वकर्मा का आज रविवार को पूजन है। ऐसी मान्यता है कि सृष्टि के सबसे पहले इंजीनियर और वास्तुकार विश्वकर्मा जी थे जिसके चलते सभी तरह के पौराणिक संरचनाएं भगवान विश्वकर्मा ने किया था। विश्वकर्मा पूजा पूरे देश में तमाम कारखानों, मंदिरों और घरों आदि पर किया जा रहा है। 

 

इस समस्त ब्रह्मांड की रचना भी विश्वकर्मा जी के हाथों से हुई है। ऋग्वेद के 10वे अध्याय के 121वे सूक्त में लिखा है कि विश्वकर्मा जी के द्वारा ही धरती, आकाश और जल की रचना की गई है।। विश्वकर्मा पुराण के अनुसार आदि नारायण ने सर्वप्रथम ब्रह्मा जी और फिर विश्वकर्मा जी की रचना की। 

पर हम आपको बताते हैं झारखंड की राजधानी रांची के इकलौते 87 साल पुराने विश्वकर्मा मंदिर के बारे में। ये मंदिर आज पूरी तरह से सजाया संवारा गया है। यहां सुबह दस बजे से पूजा होगी। विश्वकर्मा मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित राजाराम शास्त्री ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से सभी प्रकार के फल की प्राप्ति होती है। पुजारी ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा के आशीर्वाद से गाड़ी खरीदने के बाद भक्त अगले साल दोबारा गाड़ी खरीद कर यहां मंदिर आते हैं। उन्होंने बताया कि इस मंदिर का निर्माण एक संत ने 1930 में कराया। संत की मनोकामना थी कि विश्वकर्मा भगवान का मंदिर बनाया जाए। तब से ही यहां भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जा रही है। उन्होंने कहा कि संत विश्वकर्मा की मंदिर बनाकर चले गए। फिर वह यहां नहीं आए, उनका दर्शन नहीं हुआ। 

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