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इच्छाओं पर काबू पाना सिखाता है 'रोजा'

Sanjeevni Today 18-06-2017 00:32:29

दुनिया में तेजी से बढ़ रहा है 'इस्लाम धर्म'। भले ही इस्लाम धर्म का उदय अरब देशों से हुआ, लेकिन वर्तमान में इस्लाम धर्म के अनुयायी लगभग विश्व के सभी देशों में मौजूद हैं। इन दिनों रमजान माह चल रहा है। जिसमें रोजा रखने की रिवायत सदियों से जारी है।

कुरान में लिखा है, ‘तुम पर रोजे अनिवार्य किए गए हैं जिस प्रकार तुमसे पहले के लोगों पर अनिवार्य किए गए थे ताकि तुम डर रखने वाले बन जाओ, ताकि तुम परहेजगारी पैदा हो।’ लेकिन, रोजा क्यों रखने के बाद क्या-क्या एहतिहयात बरतना चाहिए यहां ग़ौर फरमाएं...

- रोजा न रखने में बीमार और यात्रा करने वालों को छूट दी गई है।

- इच्छाओं पर काबू पाना सिखाता है 'रोजा'

- रोजा रखने की कुछ अनिवार्यताएं भी हैं, जैसे व्यक्ति का मुसलमान होना। अगर व्यक्ति मुसलमान नहीं है, तब वह रोजा नहीं रख सकता।

- जरूरी नहीं व्यक्ति बुद्धिमान और बालिग हो। अल्पायु न हो, मानसिक रूप से विकृत न हो। वह भी रोजा रख सकता है।

- मासिक धर्म वाली औरतों के लिए भी रोजा की अनिवार्यता नहीं रखी गई है।

 

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