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अहोई अष्टमी 2017: जानिए, अहोई अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त
sanjeevnitoday.com | Thursday, October 12, 2017 | 08:41:09 AM
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नई दिल्ली। अहोई अष्टमी माताएं अपनी संतानों के लिए रखती हैं। अहोई अष्टमी के इस व्रत के द्वारा संतान के लंबी उम्र की कामना की जाती है। इस व्रत से संतानों को सुखी जीवन, स्वास्थ्य, धन और करियर में प्रगति का वरदान प्राप्त होता है।

इस साल अहोई अष्टमी व्रत 12 अक्टूबर (गुरुवार) को है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से जिन्हें संतान नहीं है उन्हें भी संतान की प्राप्ति होती है। अहोई अष्टमी के दिन इन उपायों को करने से आपको संतान से संबंधित सभी समस्या का समाधान हो सकता है।

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खबरों के अनुसार व्रत के दौरान अहोई देवी के चित्र के साथ सेई और सेई के बच्चों के चित्र बनाकर पूजा की जाती है। माताएं दिनभर उपवास रखकर शाम को भक्ति-भाव के साथ दीवार पर अहोई की पुतली रंग भरकर बनाती हैं। 

- बाजार में मिलने वाले अहोई के बने चित्रों की पूजा भी की जा सकती है। पूजा के लिए माताएं चांदी की एक अहोई भी बनाती हैं। फिर अहोई की रोली, चावल, दूध व भात से पूजा करती हैं। जल से भरे लोटे पर सातिया बनाकर एक कटोरी में हलवा और रुपये रख दें। 

- अहोई माता की कथा सुनने के बाद अहोई की माला गले में पहन लें, जो बायना निकाल कर रखा है, उसे सास के पैर छूकर उन्हें दे दें। इसके बाद चंद्रमा को अ‌र्घ्य देकर व्रत खोलें।

- धारण की गई माला को दीपावली के बाद शुभ समय में गले से उतारकर उसका गुड़ से भोग लगाएं। सास को रोली तिलक लगाकर उनके पैर छूकर व्रत का उद्यापन करें।

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- अहोई व्रत करने के बाद शाम के समय पूजा की जाती है और इस वर्ष पूजा करने का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजे से लेकर 7.30 तक है और शाम की पूजा का समय 6.40 से लेकर शुरु हो रहा है।

- अहोई अष्टमी की पूजा आज गुरुवार को शाम 5:50 से 17: 06 बजे तक होगी। 

- सूर्यास्त के बाद जब तारे निकलने लगते हैं, तो अहोई माता की पूजा की जाती है। 

- पूजन से पहले जमीन स्वच्छ करें, पूजा का चौक पूरकर, एक लोटे में जलकर उसे चौकी के एक कोने पर रखकर पूजा करें और बाल-बच्चों के कल्याण की कामना करें। साथ ही अहोई अष्टमी के व्रत की कथा सुनें।

 

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