संजीवनी टुडे

भारत अफ्रीका को देगा दस अरब डॉलर का कर्ज

संजीवनी टुडे 30-10-2015 00:00:00

नई दिल्ली। पीएम मोदी ने भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन अफ्रीकी महाद्वीप को 60 करोड़ डॉलर की आर्थिक सहायता देने का भी वादा किया है नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-अफ्रीका फोरम समिट को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और अफ्रीकी देशों की यह मुलाकात दुनिया की एक तिहाई मानवजाति को एक छत के नीचे ले आई है। उन्होंने कहा, 1.25 अरब भारतीयों और 1.25 अरब अफ्रीकियों के दिलों की धडक़न एक है। यह सिर्फ भारत और अफ्रीका की मुलाकात नहीं है। आज एक-तिहाई मानवजाति के सपने एक छत के नीचे इक_ा हुए हैं। अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और अफ्रीका में विकास की जबरदस्त संभावनाएं हैं।

शिखर सम्मेलन के अंतिम दिन प्रधानमंत्री ने अफ्रीका को 10 अरब डॉलर का कर्ज देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अफ्रीकी देशों के साथ भारत की साझेदारी को मजबूती देने के लिए अगले पांच साल में अफ्रीका को 10 अरब डॉलर का रियायती कर्ज मुहैया कराया जाएगा, जो मौजूदा ऋण कार्यक्रम से अलग होगा। पीएम मोदी ने भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन अफ्रीकी महाद्वीप को 60 करोड़ डॉलर की आर्थिक सहायता देने का भी वादा किया है। इसमें भारत-अफ्रीका विकास कोष का 10 करोड़ डॉलर और भारत-अफ्रीका स्वास्थ्य कोष का एक करोड़ डॉलर शामिल होगा।

पीएम मोदी ने कहा, इसमें अगले पांच साल में भारत में 50,000 छात्रवृत्तियां भी शामिल होंगी। इसके अलावा उन्होंने भारत में अफ्रीकी देशों के छात्रों को 50,000 छात्रवृत्तियां देने का वादा भी किया है। इससे पैन अफ्रीका ई-नेटवर्क और अफ्रीकी देशों में कौशल एवं प्रशिक्षण संस्थानों के विस्तार में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि दुनिया के 54 देशों के प्रतिनिधि आज यहां पर अलग-अलग रंगों में मौजूद हैं, इसलिए ही फैब्रिक को बेहद खास माना जाता है। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत और अफ्रीका में दो तिहाई जनता 35 वर्ष से कम आयु की है, इस लिहाज से दोनों ही देशों में भविष्य आज के युवाओं का है। 

यही लोग देश को आने वाले समय में नई दिशा प्रदान करेंगे। पीएम ने कहा कि आज सवा सौ करोड़ भारतीय और सवा सौ करोड़ अफ्रीकियों का एक ही सुर है। उनका कहना था कि भारत-अफ्रीका ने बदलते पर्यावरण पर जो चिंता दिखाई है वैसी चिंता किसी दूसरे मुल्क ने नहीं दिखाई। भारत-अफ्रीका के बीच संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के लिए उन्होंने तकनीक के आदान-प्रदान को बेहद जरूरी बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम दोनों ने मिलकर काफी लंबा रास्ता तय किया है लिहाजा आने वाला समय अब हमारा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दिनों विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों से हुई बैठक में जो चीजें निकलकर आई उससे वह अभिभूत हैं। इससे पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी समिट को संबोधित किया। पहले तीन दिनों में सभी देशों के बीच बनी सहमति पर भी चर्चा हुई।

 

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