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विश्व योग दिवस : 10,000 साल पुरानी भारतीय परम्परा से वैश्विक शुरुआत तक
sanjeevnitoday.com | Tuesday, June 20, 2017 | 06:54:56 PM
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नई दिल्ली। आज से चार साल पहले तक इक्कीस जून को विश्व भर में केवल सबसे बड़े दिन  के रूप में जाना जाता था परन्तु 2015 के बाद प्राचीन भारत की इस 10,000 साल पुरानी परम्परा को वैश्विक पहचान मिली थी। सयुंक्त राष्ट्र संघ ने इक्कीस जून को लम्बी प्रक्रिया के बाद इस दिन को विश्व योग दिवस के रूप में मनाने का एलान किया था। प्रधानमंत्री मोदी के एक प्रस्ताव द्वारा यूएन में मांग की गयी थी की योग को वैश्विक मान्यता मिले। उसके बाद 193 सदस्यों के अनुमोदन पर 11 दिसंबर 2014 को विश्व योग दिवस की घोषणा हुई थी। भारत की सदियों पुरानी इस परम्परा को वैश्विक मान्यता मिलना भारत के लिए एक गौरव की बात है। 21 जून 2015 के दिन ही पहला योग दिवस मनाया गया था। अब यह दुनियाभर के 193 यूएन देशों में मनाया जाता है। 

योग का इतिहास............
भारत के प्राचीन साहित्य में  योग के 196 सूत्र हैं। इसके अलावा 84 योग के आसन हैं जिसमे सभी आसन किये जाते है। आज से छह: शताब्दी पूर्व कठोपनिषद में योग का जिक्र हुआ था। उसके बाद 2012 में योग नाम का एक टेबलेट भी लांच हुआ था। इसकी व्याख्या सबसे पहले प्राचीन साहित्य के सबसे बड़े ग्रन्थ ऋग्वेद में भी उल्लेख हुआ है। इस तरह से सालों पुरानी इस परम्परा को दुनिया ने अपनाया है। योग के तीन प्रकार है जिसमे ज्ञान, भक्ति और कर्म योग है। इनका उल्लेख गीता में किया गया है जिसमे भगवान् श्री कृष्ण ने लोगो को तीन प्रकार के योग का उपदेश दिया था। योग के आठ अंग भी है जिसमे यम, नियम, धारणा, ध्यान, समाधी, प्राणायाम, प्रतिहार और आसन हैं। भगवान् श्री शिव को आदि योगी माना जाता है। माना जाता है की उन्होंने ही ऋषियों को सबसे पहले योग सिखाया था। दुनिया भर में योग का प्रचार स्वामी विवेकानद ने किया था। बी के इस अयंगर योग गुरु के रूप में विश्व विख्यात है। प्राचीन योगी का दर्जा महर्षि पतंजली को दिया जाता है। इस प्रकार सब तरह से स्वस्थ और सुखी बनाने वाला योग दुनिया में शांति लाने का काम करेगा। 



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