वरुण धवन हुए निराश, नही मिला वोटर लिस्ट में नाम लौटना पड़ा बिना मतदान एक्ट्रैस श्रद्धा कपूर पहुंची वोट डालने, फोटो क्लिक करते फोटोग्राफर के साथ हुआ कुछ ऐसा... बन गए अल्ट्रामैन, 3 दिन में 517km दौड़ लगाकर रच डाला इतिहास मिलिंद सोमन ने ये खट्टी-मीठी बातें दिलाती है बड़ी बहन की याद..! यहां लुक नही है मायने, है एक-दूसरे से बिल्कुल अलग फिर भी है साथ, ऐसे है यह कपल..! 7वां वेतन आयोग: बढ़ेगा कर्मचारियों का महंगाई भत्ता और एचआरए..! यूपी चुनाव में सबसे खूबसूरत उम्मीदवार, जो है काफी चर्चा में, तस्वीरें वायरल यहां बीमारी से पीड़ित लोगों को किडनैप कर, उनकी बॉडी पार्ट्स से बनाई जाती हैं दवाइयां..! संभल मे दस वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म, पुलिस मामला दबाने मे जुटी मुख्यमंत्री को जब स्कूली बच्चों ने ’शिक्षक’ बनकर पढ़ाया... ट्रेन से कटकर वृद्ध की मौत गोमती नदी में डूबा छात्र, हंगामा नोटबंदी राष्ट्रहित में एक बड़ा फैसला : मनोज सिन्हा संदिग्ध परिस्थितियों में विवाहिता की मौत, दहेज हत्या का आरोप शेयर बाजार में आई तेजी, सेंसेक्स में 100 अंकों का उछाल सपा-बसपा ने राजनीति में फैलाया कीचड़, अब खिलेगा कमल: राजनाथ मुख्यमंत्री के साथ दिव्यांग बच्चों ने साझा किए अपने बड़े सपने एक साल में 82000 धनाढ्यों ने छोड़ा देश पुलिस व सीआरपीएफ ने डकैत को दबोचा विजय माल्या को भारत लाने की मुहिम तेज
वीरसागर ने कहा- जीवन में गुरू का बडा महत्व होता है।
sanjeevnitoday.com | Wednesday, October 19, 2016 | 05:02:00 PM
1 of 1

नीमच। ईश्वर की कृपा से और सद्कर्मों से ही हमें सदगुरू मिलते हैं। गुरू की कृपा से हमें ईश्वर मिल सकता है। गुरू पूजन का बडा महत्व है। गुरूदेव का महापूजन सुख समृद्घि देने वाला है। यह पूजन महामंगलकारी होकर हमारे कष्टों को हरने वाला है। यह बात 107 मुनि वीरसागर महाराज ने कही। वे दिगम्बर जैन मंदिर में बुधवार सुबह सात बजे आयोजित चातुर्मास धर्मसभा में बोल रहे थे।

JAIPUR : मात्र 155/- प्रति वर्गफुट प्लाट बुक करे, कॉल -09314166166

मुनिश्री ने कहा कि संसार में मनुश्य बहुत उलझन में रहता है। सदगुरू मनुश्य का सच्चा गाइड होता है। संसार की भूल भूलैया से गाइड निकालता है। महावीर, गौतम, कुन्दकुन्द को गुरू माना है। इन गुरूओं को प्राचीनकाल से आज भी याद किया जा रहा है। आचार्य कुन्दकुन्द ने पावन समय सार, नियमसार सहित 74 शास्त्रों की रचना की और स्वयं ऐसा जीवन जिया कि दिगम्बर साधु का सही स्वरूप क्या होता है। दुनिया को बताया। जब पशुओं की बलि को धर्म माना जा रहा था। तब महावीर ने अहिंसा को धर्म बताया था। मुगलों और अंग्रेजों के शासन में लोग धर्म को भूल चुके थे। उस समय घना अंधकार हो रहा था। उस समय आचार्य शांतिसागर ने एक एक कदम साधना कर आगे बढाया था। वे पूरी प्रतिकूलताओं में आगे बढे। ठीक उसी प्रकार ज्ञानसागर और आचार्य विद्यासागर महाराज ने महान कार्य किया है।

आचार्य विद्यासागर ने 22 वर्ष की आयु में दीक्षा ग्रहण की थी। बुढापे में धर्म नहीं हो पाता है। उस काल में 60 वर्ष की आयु में दीक्षा लेते थे। ऐसे में अल्पायु में दीक्षा ली थी तो वह व्यक्ति कुछ नया करने वाला था। महान वही है जो रास्ते पर चलता है लेकिन नये रास्ते को बनाता भी है। परोपकार के लिए गाय दूध, पेड़ फल, नदी पानी और संत परोपकार का कार्य करते है। वे महान होते हैं। यही कार्य आचार्य विद्यासागर, शांतिसागर महाराज ने किया जो प्रेरणादायी है। जब तक बुढ़ापे का रोग नहीं लगे तभी धर्म शुरू करना चाहिए।

आचार्यश्री धर्मरक्षा के लिए विश्वनीय है। दिगम्बर जीवन मेकं मुनि जीता है उनका वर्तमान अच्छा रहता है उन्हें भविष्य की चिंता नहीं होती है। साधु चिंतित नहीं होते हैं। जो सही नेता होता है वह सामान्य होता है लेकिन असामान्यता के भी धनी होते हैं। अग्नि परीक्षा से सीता की रक्षा करने देवता लोग आए थे। सीता का धर्म के प्रति समर्पण के कारण आये थे। आचार्य विद्यासागर को महान उनके समर्पण ने बनाया था। आपका विरोधी आपके गुणों क्वालिटी को लेकर प्रशंसा करे तो व्यक्ति महान हो जाता है। जन्म से हर व्यक्ति सामान्य होता है। महान तो बाद में बनता है।

यह भी पढ़े: पति-पत्नी जैसा रिस्ता माना जाता है, देवर-भाभी का!..

यह भी पढ़े: भूलकर भी न करे... ऐसे पुरुषों से प्यार करना पड़ सकता है भारी...!

यह भी पढ़े: यहां की औरते 65 की उम्र में भी रहती हैं जवा, जानिए वजह

यह भी पढ़े : ताज़ा और रोचक ख़बरों से जुड़े रहने के लिए डाउनलोड करें हमारा एंड्राइड न्यूज़ ऍप



FROM AROUND THE WEB

0 comments

Most Read
Latest News
© 2015 sanjeevni today, Jaipur. All Rights Reserved.