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वीरसागर ने कहा- जीवन में गुरू का बडा महत्व होता है।
sanjeevnitoday.com | Wednesday, October 19, 2016 | 05:02:00 PM
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नीमच। ईश्वर की कृपा से और सद्कर्मों से ही हमें सदगुरू मिलते हैं। गुरू की कृपा से हमें ईश्वर मिल सकता है। गुरू पूजन का बडा महत्व है। गुरूदेव का महापूजन सुख समृद्घि देने वाला है। यह पूजन महामंगलकारी होकर हमारे कष्टों को हरने वाला है। यह बात 107 मुनि वीरसागर महाराज ने कही। वे दिगम्बर जैन मंदिर में बुधवार सुबह सात बजे आयोजित चातुर्मास धर्मसभा में बोल रहे थे।

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मुनिश्री ने कहा कि संसार में मनुश्य बहुत उलझन में रहता है। सदगुरू मनुश्य का सच्चा गाइड होता है। संसार की भूल भूलैया से गाइड निकालता है। महावीर, गौतम, कुन्दकुन्द को गुरू माना है। इन गुरूओं को प्राचीनकाल से आज भी याद किया जा रहा है। आचार्य कुन्दकुन्द ने पावन समय सार, नियमसार सहित 74 शास्त्रों की रचना की और स्वयं ऐसा जीवन जिया कि दिगम्बर साधु का सही स्वरूप क्या होता है। दुनिया को बताया। जब पशुओं की बलि को धर्म माना जा रहा था। तब महावीर ने अहिंसा को धर्म बताया था। मुगलों और अंग्रेजों के शासन में लोग धर्म को भूल चुके थे। उस समय घना अंधकार हो रहा था। उस समय आचार्य शांतिसागर ने एक एक कदम साधना कर आगे बढाया था। वे पूरी प्रतिकूलताओं में आगे बढे। ठीक उसी प्रकार ज्ञानसागर और आचार्य विद्यासागर महाराज ने महान कार्य किया है।

आचार्य विद्यासागर ने 22 वर्ष की आयु में दीक्षा ग्रहण की थी। बुढापे में धर्म नहीं हो पाता है। उस काल में 60 वर्ष की आयु में दीक्षा लेते थे। ऐसे में अल्पायु में दीक्षा ली थी तो वह व्यक्ति कुछ नया करने वाला था। महान वही है जो रास्ते पर चलता है लेकिन नये रास्ते को बनाता भी है। परोपकार के लिए गाय दूध, पेड़ फल, नदी पानी और संत परोपकार का कार्य करते है। वे महान होते हैं। यही कार्य आचार्य विद्यासागर, शांतिसागर महाराज ने किया जो प्रेरणादायी है। जब तक बुढ़ापे का रोग नहीं लगे तभी धर्म शुरू करना चाहिए।

आचार्यश्री धर्मरक्षा के लिए विश्वनीय है। दिगम्बर जीवन मेकं मुनि जीता है उनका वर्तमान अच्छा रहता है उन्हें भविष्य की चिंता नहीं होती है। साधु चिंतित नहीं होते हैं। जो सही नेता होता है वह सामान्य होता है लेकिन असामान्यता के भी धनी होते हैं। अग्नि परीक्षा से सीता की रक्षा करने देवता लोग आए थे। सीता का धर्म के प्रति समर्पण के कारण आये थे। आचार्य विद्यासागर को महान उनके समर्पण ने बनाया था। आपका विरोधी आपके गुणों क्वालिटी को लेकर प्रशंसा करे तो व्यक्ति महान हो जाता है। जन्म से हर व्यक्ति सामान्य होता है। महान तो बाद में बनता है।

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