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सूखे से बचाव के लिए ये तकनीक अपनाएगा तमिलनाडु ग्रामीण
sanjeevnitoday.com | Wednesday, October 19, 2016 | 11:28:26 AM
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नई दिल्ली। बदलती जीवनशैली और विकास की अंधाधुंध दौड़ ने प्रकृति के साथ इस कदर छेड़छाड़ की है कि अब मौसम का कोई निश्चित समय नहीं रह गया है। जहां पहले ग्रामीण अंदाज़े से बता देते थे कि कौन से महीने में सर्दियां आएंगी और कौन से में बारिश पर आज जलवायु परिवर्तन के चलते मौसम की समय अवधि में काफी बदलाव आ चुका है। आज बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने मुनाफे के लिए पानी का अंधाधुंध प्रयोग कर रही हैं, जिसके कारण धरती का जल स्तर काफी गिर चुका है। 

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पानी की बढ़ती किल्लत के पीछे एक कारण कंकरीट जंगल का विकास भी है। हम ये कैसा विकास कर रहे हैं, जो आने वाले समय में हमें उन चीज़ों का ही मोहताज बना देगा, जो आज हमें आसानी से मिल जाती हैं। अब पहले की तरह गांवों में तालाब नहीं रह गए हैं, वो धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं। हाल ही में आपने सूखे से जुड़ी कई खबरें पढ़ी होंगी कि कैसे लोग पानी के लिए कई किलोमीटर का सफर तय कर रहे हैं। कुछ लोग इस सूखे के चलते अपनी जान भी गंवा चुके हैं। पर इस तरह से पानी के लिए मचता हाहाकार एक बड़ी समस्या की और इशारा करता है, जिससे जल्द ही छुटकारा नहीं मिला, तो आने वाली पीढ़ी को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा।

सूखे की समस्या से बचने के लिए तमिलनाडु के निवासियों ने जल संरक्षण का पारंपरिक तरीका अपनाने की पहल की है। आज तमिलानाडु के कई क्षेत्र सूखे की मार झेल रहे हैं, जिनमें से एक है रामनाथपुरम। इस गांव के निवासियों ने जल संरक्षण के लिए प्राचीन तरीका अपनाया है, जिसे Oorani कहते हैं। धान फाउंडेशन की मदद से गांव के तालाबों को रिस्टोर करने के लिए एक टैंक उपयोगकर्ता एसोसिएशन का गठन किया गया है।

Oorani एक तरह से तालाब का ही रूप होता है, जिसे जल संरक्षण के लिए खोदा जाता है। इस तरीके का इस्तेमाल आज से लगभग 2000 साल पहले किया गया था, जिसके बाद से इसका इस्तेमाल धीरे-धीरे चलन से बाहर हो गया। Oorani उन क्षेत्रों में ज़्यादा पाए जाते थे, जहां पानी की मात्रा अपर्याप्त रहती थी। इन तालाबों में जमा पानी का इस्तेमाल पीने और पशुओं के लिए किया जाता था। ये मानवनिर्मित तालाब जल संरक्षण में अहम भूमिका निभाते थे, जो किसानों के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। इन तालाबों का पानी रोजमार्रा के कार्यों के साथ-साथ किसानों को सिंचाई के लिए भी पानी मुहैया करवाता था।

एक बार Oorani की स्थापना हो गई, उसके बाद इसमें बारिश के पानी का संरक्षण होता रहता है, जो मोनसून के बाद भी पानी से लबालब भरा रहता है। इस टैंक का पानी लोगों को जल की कमी नहीं होने देता। इसमें इतना पानी एकत्रित हो जाता है कि किसान पानी की कमी के दौरान बिना खर्चे के अपने खेतों की सिंचाई कर सकते हैं। इस टैंक के पानी का इस्तेमाल पीने के लिए भी किया जा सकता है और पशुओं के लिए भी। ये ना केवल स्थानीय लोगों की, बल्कि पड़ोसी गांव के निवासियों की भी प्यास बुझा सकता है। इसके होने से गांव की महिलाओं और बच्चों को पानी के लिए मीलों का सफ़र नहीं तय करना पड़ेगा।

Oorani में जमा पानी गंदा होता है, उसे पीने से पहले साफ करने की ज़रूरत होती है। इसे साफ करना बेहद आसान है, बस आपको 'Thethankottai' के बीजों को 20 मिनट के लिए पानी में डाल दीजिए। Thethankottai एक प्राकृतिक कौयगुलांट है, जो पानी से मिट्टी और दूसरे प्रकार की गंदगी को पानी से अलग कर देता है। ये तरीका उन लोगों के हित में है, जो सोचते हैं कि प्राचीन काल के तरीके आज के दौर में काम नहीं करेंगे।

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