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जीएसटी अपनाने की राह सुगम होनी चाहिए
sanjeevnitoday.com | Tuesday, June 20, 2017 | 06:10:11 PM
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नई दिल्ली। भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली की एक घोषणा के अनुसार तीस जून की रात में जीएसटी को लागू कर दिया जायेगा। आजाद भारत का यह अब तक का सबसे बड़ा कर सुधार होगा जिसमें अप्रत्यक्ष कर को एक बाजार प्रदान किया जायेगा। पूरा भारत जीएसटी लागू लागू होने के बाद एक राष्ट्रीय बाजार बन जायेगा जो की स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा अप्रत्यक्ष कर सुधार होगा। जीएसटी के लिए तीन अलग अलग व्यवस्था होगी जिसमे केंद्र, राज्य और एकीकृत जीएसटी होगी। सभी व्यापारियों को नयी व्यस्था के अनुसार रिटर्न फाइल करना होगा। जीएसटी की दरों का निर्धारण जीएसटी कौंसिल ने किया जिसमे पांच प्रकार के कर है। लगभग 81 % वस्तुएं 18 % दर से काम होगी। 28 % दरों में बाकी की वस्तुएं और सेवाएं है। 

अब तीस जून का दिन भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण होगा जब संसद के केंद्रीय हॉल में देश के प्रधानमन्त्री और राष्ट्रपति सहित विशेष सत्र में जीएसटी की शुरुआत होगी। इसके लिए लगभग तैयारियां कर ली गयी है। लेकिन जीएसटी परिषद ने संभवत: महसूस किया कि इस व्यवस्था को लागू करने में पहले ही काफी देर हो चुकी है। इसलिए तीस जून से आगे ना बढ़ाने का फैसला हुआ। इस बीच एक रियायत जरूर दी गई है। रिटर्न दाखिल करने संबंधी नियमों में जुलाई और अगस्त के लिए छूट दी गई है। जब तक ई-वे बिल प्रणाली तैयार नहीं होती, व्यापारियों के लिए इसे अपनाना जरूरी नहीं होगा। 

जीएसटी पर सरकार ने तैयारियां पूरी कर ली है परन्तु उद्योग जगत और व्यापारी वर्ग इससे संतुष्ट नहीं है। उड्डयन मंत्रालय ने भी एक सितम्बर तक का समय माँगा है। कई उद्योग जगत के संगठनों ने अपने आपको जीएसटी के लिए तैयार नहीं किया है और कहा है की इसके लिए अभी समय को बढ़ाया जाये। इस प्रकार सरकार को सब लोगो के लिए जीएसटी की राह को आसान बनाना होगा। बेहतर यही होता कि नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था लागू करने से पहले तमाम व्यवस्थाएं सुचारु कर ली जाएं। नोटबंदी जैसे फैसले से सबक लेकर सरकार सब आयामों को सोचकर ही जीएसटी को लागू करे। इस मामले में कुछ दूसरे देशों के अनुभव से भी सीखने की जरूरत है, जहां जीएसटी को लागू किया गया था परन्तु इस फैसले को उन्हें वापस लेना पड़ा था। इस तरह से लोगों की आशंकाओं को नजरअंदाज न करके सरकार को फैसला लेना चाहिए। 



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