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रेटिंग एजेंसी फिच ने घटाया GDP ग्रोथ का अनुमान
sanjeevnitoday.com | Wednesday, November 30, 2016 | 09:06:29 AM
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नई दिल्ली। नोटबंदी के मद्देनजर मौजूदा वित्त वर्ष में विश्व की प्रमुख रेटिंग एजेंसी फिच ने भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.9 प्रतिशत रहने का नया अनुमान व्यक्त किया है, जबकि पहले उसने 7.4 प्रतिशत का अनुमान व्यक्त किया था। फिच ने कहा कि नोटबंदी के बाद आर्थिक गतिविधियों में मामूली व्यवधान आएगा। एक रिपोर्ट में एजेंसी ने कहा है कि भारत सरकार के नोटबंदी के फैसले से उपजे नकदी संकट का असर अक्तूबर- दिसंबर तिमाही में आर्थिक गतिविधियों पर पड़ेगा। सरकार ने 8 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा की और 500 व 1000 रुपये के मौजूदा नोटों को चलन से बाहर कर दिया। 

इस तरह से लगभग 86 प्रतिशत करंसी एक साथ ही चलन से बाहर हो गई। एजेंसी ने कहा है की आरबीआई द्वारा बड़ी राशि के बैंक नोटों को चलने से बाहर करने के आश्चर्यजनक कदम के मददेनजर आर्थिक गतिविधियों में अस्थाई व्यवधान को देखते हुए भारतीय विकास दर के अनुमान में कमी की गई है। इस अमेरिकी एजेंसी ने 2017-18 व 2018-19 के लिए भी अपने बढ़ोतरी अनुमान को संशोधित कर क्रमश: 7.7 प्रतिशत व 8 प्रतिशत किया है। इसके मुताबिक ढांचागत सुधार एजेंडे के क्रमिक कार्यान्वयन से उच्च बढ़ोतरी में योगदान की उम्मीद है। 

खर्च करने योग्य आय व सरकारी कर्मचारियों के वेतन में लगभग 24 प्रतिशत से भी इसे बल मिलेगा। नोटबंदी के बारे में इसमें कहा गया है कि ग्राहकों के पास खरीदारी के लिए नकदी नहीं है, आपूर्ति सीरीज के बाधित होने व किसानों को खाद बीज खरीदने में दिक्कतों के भी समाचार हैं। इसमें कहा गया है, सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि नोटबंदी एक ही बार की जा सकती है। असंगठित क्षेत्रें काम करने वाले अपनी संपत्ति को छुपाने के लिए नये नोट व अन्य विकल्पों का इस्तेमाल कर सकेंगे।

नोटबंदी के बाद बैंकों की जमा में हुई जोरदार बढ़ोतरी के बाद भी बैंक अपनी ब्याज दरों को शायद ही कम करें। साथ ही इसकी वजह है कि रिजर्व बैंक ने बढ़ी हुई जमा पर 100 प्रतिशत का नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) लागू कर नकदी सोख ली है। एक वरिष्ठ बैंकर ने कहा, दरों में कटौती को भूल जाएं, बैंकों को बचत खातों पर 4 प्रतिशत के ब्याज भुगतान के लिए संसाधन जुटाने मुश्किल हो रहे हैं। इन बचत खातों में 500 और 1,000 के नोट भारी मात्रा में जमा हुए हैं।

वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ब्याज दरों को एक निश्चित सीमा से नीचे जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे पूंजी निकलने लगेगी। वरिष्ठ अधिकारी ने  साथ ही यह कहा कि आप ब्याज दरों को इतना नीचे नहीं ला सकते कि यहां से पूंजी अमेरिका पहुंचने लगे। इस बीच, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक तथा एचडीएफसी बैंक ने पहले ही अपनी जमा पर ब्याज दरें घटा दी हैं। इसे ऋण दरों में कटौती से पहले का कदम माना जाता है।

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