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बेवा मूना की जिन्दगी में जिलाधिकारी किंजल सिंह किस तरह देवदूत बनकर हुई शामिल, जानिए

Sanjeevni Today 07-12-2017 07:34:00

नई दिल्ली। गर्दिश से दो चार फुटपाथ पर सब्जी बेंचकर जीवन के तल्ख दौर से गुजर रही बेवा मूना की जिन्दगी में जिलाधिकारी किंजल सिंह उजास बनकर देवदूत की तरह शामिल र्हुइं। सराय पोख्ता मस्जिद की व्यवस्था देखने के लिए अचानक चौक सब्जी मण्डी में पहुंची किंजल सिंह को जर्जर हालत की वृद्धा मूना पर नजर पड़ी जो सब्जी बेंच रही थी। मूना के पास किंजल सिंह पहुंची और करेले का भाव पूंछा एक किलो करैला लिया जिसकी कीमत 50 रूपये थी परन्तु उसके एवज में मूना को उहोंने 1550 रूपये दिया और घर का अता-पता हाल-चाल पूंछकर चली गयीं।

यह वाकया सोमवार संध्याकाल करीब 7 से 8 के मध्य का है।

जिलाधिकारी करैला खरीदकर चली गयीं और 1550 रूपये पाकर बेवा मूना सुनहरे ख्वाब बनते हुए ककरही बाजार स्थित अपने टीनशेड के घर जा पहुंचीं और अपनी 17 वर्षीय नातिन रीतू पुत्री राम सुरेश मूल निवासिनी कन्हई का पुरवा हांसपुर जो अपनी नानी की देखरेख के अलावां परमहंस डिग्री कालेज अयोध्या में बीए प्रथम वर्ष में अध्ययन कर रही है को सारा वाकया बताया। खाना पका बेना झलते हुए नानी नातिन सोने की तैयारी करने लगीं रात्रि के लगभग 11 बजे थे तभी कई गाड़ियां बेवा मूना के घर के सामने आ रूकीं इन गाड़ियों में चिकित्सकों की भी एक टीम थी जिलाधिकारी किंजल सिंह व सरकारी अमला मूना के घर पहुंचा वहां की दशा देख उनका दिल पसीज गया


जिलाधिकारी किंजल सिंह ने मौके पर मौजूद जिलापूर्ति अधिकारी दीपक शरण वार्ष्णेय को निर्देशित किया कि तत्काल मूना को 5 किलो अरहर की दाल, 20 किलो आंटा, 50 किलो गेहूं और 40 किलो चावल उपलब्ध कराओ जबतक राशन आ नहीं जाता मैं यहीं रहूंगी। किंजल सिंह का फरमान सुन डीएफओ के फाक्ते उड़ गये कोटेदारों की दूकाने रात में बन्द हो चुकी थीं डीएसओ के एक शुभचिन्तक ने सलाह दिया कि कंधारी बाजार का कोटेदार राकेश गुप्ता की बहुत बड़ी राशन की दूकान है उसी से सारे सामान मंगवा लें। डीएसओ साहब गाड़ी पर सवार होकर कोटेदार राकेश की दूकान पर पहुंचे इतना सामान राकेश देने में जब असमर्थता जताने लगे तो पड़ोस के कोटदार आनन्द गुप्ता को भी तलब कर लिया गया। दोनो कोटेदारों ने डीएम की मंशा के अनुरूप राशन डीएसओ की गाड़ी में भरवाया और डीएमओ उसे लेजाकर मूना के हवाले कर दिया तबतक रात्रि के 12 बज चुके थे और डीएम साहिबा मौके पर थीं।

डीएम किंजल सिंह की उदारता यहीं थमी नहीं उन्होंने एसडीएम दीपा अग्रवाल को निर्देशित किया कि सुबह होते ही मूना को एक टेबल फैन, उज्जवला योजना के तहत एलपीजी सिलेंडर मय चूल्हा, तख्त, दो साड़ी और चप्पल उपलब्ध करा दिया जाय। एडीएम व एसडीएम ने मिलकर यह मांग मंगलवार की सुबह ही पूरा कर दिया। जाते -जाते 75 वर्षीय मूना से वादा कर गयीं कि खाना पकाने का वर्तन, पानी पीने के लिए एक हैण्डपम्प और रहने के लिए आवास का निर्माण सरकारी खर्चे से कराया जायेगा। डीएम की इस उदारता से जहां बेवा मूना व नातिन रीतू फूली नहीं समा रही हैं वहीं शहर के नुक्कड़ चौराहों के टी स्टालों पर डीएम की उदारता की चर्चाएं आम हो गयी हैं। लोग यहां तक कह रहे हैं कि काश डीएम साहिबा मेरे घर आ जातीं तो कम से कम उज्जवला के तहत हमें भी एलपीजी सिलेंडर व चूल्हा ही मिल जाता।

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