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नायक नरेन्द्र मोदी ! 1000 और 500 के नोटों के बलिदान से शुरू हुई भ्रष्टाचार के खिलाफ एक जंग : पढ़ते है शुरुआत से
sanjeevnitoday.com | Friday, December 2, 2016 | 10:02:25 AM
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नई दिल्ली। हर तरफ बस एक ही सवाल क्या नोटबंदी से भ्रष्टाचार में कमी आएगी ? बहुत दिन हो गए भ्रष्टाचार जैसे कैंसर से लड़ते हुए। तभी आया एक योद्धा नाम था उसका नरेन्द्र मोदी फिर उन्होंने शुरू किया आंदोलन भ्रष्टाचार के खिलाफ। लेकिन ये कहाँ से शुरू हुआ, कैसे शुरू हुआ चलिए हम बताते है

धमाकेदार इनकम डिक्लेरेशन स्कीम

कहानी की शुरुआत होती है एक धमाकेदार इनकम डिक्लेरेशन स्कीम से, जो शुरू हुई 1 जून 2016 से और समाप्त हुई 30 सितम्बर को । इसमें आपको बेनामी ट्रांजक्शन एक्ट 1988, वेल्थ टैक्स एक्ट और इनकम टैक्स एक्ट में कार्रवाई से सुरक्षा मिली। साथ ही बड़े आराम से आप 45 % हिस्सा सरकार से साझा कर के बाकी 55 % के कानूनन मालिक बन जाते हैं, जिस पर कोई सवाल नहीं होगा कि ये कैसे जमा किया गया रिश्वत लेके, ड्रग्स के व्यवसाय से या फिर तस्करी से। वैसे ये पहला मौका नहीं था इसके पहले भी भारतीय अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने के नाम पर ऐसी स्कीम लाई जा चुकी हैं, जिनमे वर्ष 1997 की, उल्लेखनीय है। बस दोनों में एक बड़ा अंतर है और वो है भारतीय अर्थव्यवस्था के बदलाव का। 1997 ऐसा समय था जब, देश ग्लोबलाइजेशन और दूसरे कई बड़ी घटनाओं के साये में जर्जर हालात से बाहर आने के लिए प्रयासरत था और संसाधनों के इंतेजाम की जुगत में लगा था। पर अब देश की अर्थव्यवस्था विश्व में एक मज़बूत स्थिति में है जिसमे भी क्रय क्षमता आधार पर यह तीसरे नंबर पर है जिसका अर्थ है, भारत दुनिया के लिए एक बड़ा बाज़ार बन चुका है। ऐसे में काला धन निकालने के लिए काले धन वालों पर रहमदिली की ये स्कीम वाक़ई साहेब के विशाल ह्रदय की द्योतक थी ।
 
दूसरा पड़ाव : कालेधन के रखवालो के लिए काला दिवस 
8 नवम्बर 2016 भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास का एक यादगार दिन और एक बड़ी घोषणा या उससे भी बड़ा एक यज्ञ, एक इम्तेहान- देशभक्ति का, जिसका नोटिफिकेशन प्रधान-सेवक द्वारा रात्रि 8 बजे जारी किया गया। बड़ी हिम्मत चाहिए ऐसे यज्ञ के लिए क्योंकि जिसकी चपेट में पूरा देश लिपट चूका है उस पर हमला करना आत्महत्या करने के बराबर है। फैसला हुआ और फैसला ये था की रात्रि 12 बजे से सभी 1000 और 500 के नोट नहीं चलेंगे '। फैसला सुनते ही भ्रष्टाचार वालो के घरो में तो जैसे भूकंप ही आ गया हो। जिसके पास जितना कालाधान था सब लेके भागे, कोई बैंको में तो कोई सोना खरीदने में ताकि कालाधान गलत तरीके से बचाया जा सके। और जिनके पास 100-100 के नोट थे उन्हें भला क्या प्रॉब्लम थी। लेकिन कालेधन के रखवालो के लिए वो काल दिन था। 

वो सोचते है की देशभक्ति के नाम पर उनपर अत्याचार किया जा रहा  

पुरे देश में किसी ने मोदी को भला कहा तो किसी ने बुरा। जिन लोगो को नोटबंदी से परेशानी हुई उन्होंने मोदी जी को बुरा कहा क्योकि वो सोचते है की देशभक्ति के नाम पर उनपर अत्याचार किया जा रहा है।  लेकिन वो भूल गए की इससे बड़ा अत्याचार तो कई सालों से हमारे साथ हो रहा है।  फैसला का असर इतना हुआ की जाली नोट और कालेधन किसी काम के नहीं रहे। जैसे उन्होंने आत्महत्या कर ली हो। इसके साथ-साथ सरकार की जो सबसे बड़ी आलोचना हो रही है वह है आयकर अधिनियम में संशोधन पेश करने की! एक तरफ प्रधानमंत्री ने कालाधन रखने वालों को 30 सितंबर तक मोहलत दी थी कि अगर उन्होंने स्वेच्छा से अपने कालेधन की घोषणा नहीं की तो दो सौ पर्सेंट का जुर्माना लगा दिया जाएगा, जो उनके कुल धन का टैक्स सहित पचासी पर्सेंट तक हो सकता है। मतलब काले धन वाले सौ रुपए में से मात्र ₹15 सफेद कर सकेंगे, जबकि उनका ₹85 सरकारी खातों में जमा हो जाएगा।

RBI ने सोमवार को प्रेस रिपोर्ट में कहा की  फैसले के असर से 27 नवम्बर तक बैंको में  8,44,982 करोड़ रूपये जमा हो गए। जो धन बैंको में होना चाहिए था वो वह तक पंहुचा।  यानी 17 दिन में 8.45 लाख करोड़ रूपये बैंक एकाउंट्स में जमा हुए।  

39 महीने के न्यूनतम स्तर पर पहुंचा रुपया
नोटबंदी का असर शेयर बाजार के साथ-साथ रुपए पर भी देखा गया। गुरुवार के शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 28 पैसे टूटकर 68.84 के स्तर पर आ चूका है, जो कि गत 39 महीनों में सबसे न्यूनतम है।  अब इस फैसले के और क्या असर होंगे ये तो आगे ही पता चलेगा, क्या हमारी अर्थव्यवस्था इसे झेल पायेगी।  लेकिन अगर देशहित में हमे कुछ परेशानियों का सामना करना पड़े तो हमें पीछे नही हटना चाहिए क्योंकि एक व्यक्ति अकेला नही लड़ सकता। उसे जरुरत है हमारी, जरुरत है हमारे विश्वास है की तो चलिए मोदी के साथ।  जिन्होंने देश के लिए घर तक को छोड़ दिया सलाम है उन्हें हमारा 

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